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होमखेलक्रिकेटकानपुर के ग्रीन पार्क मैदान पर लगा ‘मार्शल’ लॉ, गावस्कर के हाथ से छूटा बल्ला

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unique cricket story: दुनिया ने वेस्टइंडीज के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में से एक, मैल्कम मार्शल का वो तांडव देखा, जिसे आज भी “मार्शल लॉ इन कानपुर” के नाम से याद किया जाता है. ग्रीन पार्क का वह टेस्ट मैच आज भी वेस्टइंडीज के उस दौर के दबदबे और मैल्कम मार्शल की महानता की गवाही देता है. जहां कुछ कहानियां सन्नाटे से शुरू होकर गरज के साथ खत्म होती हैं

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जब भारतीय टीम को अपने ही मैदान पर करना पड़ा मार्शल लॉ का सामना

नई दिल्ली. हार और जीत से ज्यादा असर उन मैचों का होता है जिनमें कोई टीम या खिलाड़ी सामने वाले के सामने एक स्टेटमेंट रखती है और ये बताती है कि मैदान पर उनका वर्चस्व था और रहेगा. साल 1983 ऐसा ही एक दौर था। जून 1983 में कपिल देव की ‘कपिल्स डेविल्स’ ने लॉर्ड्स के मैदान पर वेस्टइंडीज के अजेय साम्राज्य को ढहाकर विश्व कप जीता था. यह हार वेस्टइंडीज के स्वाभिमान पर गहरी चोट थी. महज चार महीने बाद, अक्टूबर 1983 में वेस्टइंडीज की टीम भारत का दौरा करने पहुंची. वे सिर्फ एक सीरीज खेलने नहीं आए थे, बल्कि अपनी खोई हुई बादशाहत और खौफ को दोबारा कायम करने आए थे.

इस दौरे के कानपुर टेस्ट में दुनिया ने वेस्टइंडीज के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में से एक, मैल्कम मार्शल का वो तांडव देखा, जिसे आज भी “मार्शल लॉ इन कानपुर” के नाम से याद किया जाता है. ग्रीन पार्क का वह टेस्ट मैच आज भी वेस्टइंडीज के उस दौर के दबदबे और मैल्कम मार्शल की महानता की गवाही देता है. जहां कुछ कहानियां सन्नाटे से शुरू होकर गरज के साथ खत्म होती हैं, वहीं इस मैच ने यह साबित किया कि जब वेस्टइंडीज का यह ‘कैरिबियाई तूफान’ अपनी पूरी लय में होता था, तो दुनिया की कोई भी बल्लेबाजी लाइन-अप उसके सामने टिक नहीं पाती थी.

कानपुर टेस्ट और मार्शल का ऑलराउंडर अवतार

ग्रीन पार्क, कानपुर में खेले गए इस सीरीज के पहले टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 454 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया. इस पारी में गोर्डन ग्रीनिज ने शानदार शतक (194 रन) लगाया, लेकिन निचले क्रम में आकर मैल्कम मार्शल ने जो किया, उसने भारतीय गेंदबाजों के हौसले पस्त कर दिए. मार्शल ने बल्ले से ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 92 रनों की बेशकीमती पारी खेली. वह महज 8 रनों से अपने शतक से चूक गए, लेकिन उन्होंने यह साफ कर दिया था कि वह भारतीय टीम को किसी भी मोर्चे पर ढील नहीं देने वाले हैं.

गेंद से मचाई तबाही, गावस्कर के हाथ से छूटा बैट

असली तूफान तब आया जब भारतीय टीम अपनी पहली पारी खेलने मैदान पर उतरी. वेस्टइंडीज के पास विवियन रिचर्ड्स, माइकल होल्डिंग और क्लाइव लॉयड जैसे दिग्गज थे, लेकिन कानपुर की पिच पर मैल्कम मार्शल ने जो रफ्तार और स्विंग दिखाई, उसका सामना करना नामुमकिन लग रहा था. मार्शल ने पारी की शुरुआत में ही भारत के महानतम सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर को बिना खाता खोले (शून्य पर) पवेलियन का रास्ता दिखा दिया. जिस गेंद पर लिटिल मास्टर आउट हुए उस पर उनके हाथ से बैट छूट गया था. गावस्कर का विकेट गिरना भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ टूटने जैसा था. इसके बाद मार्शल रुके नहीं उन्होंने अपनी आग उगलती गेंदों से भारतीय शीर्ष क्रम को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया. उन्होंने अपने उस स्पैल में सिर्फ 9 रन देकर 4 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए. यह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के सबसे घातक और विनाशकारी ओपनिंग स्पैल्स में से एक माना जाता है.

“मार्शल लॉ इन कानपुर”

मार्शल के इस जानलेवा आक्रमण के सामने भारतीय बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह बिखर गए. दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक भारत का स्कोर 5 विकेट पर सिर्फ 34 रन था. कानपुर के मैदान पर वेस्टइंडीज की इस घातक गेंदबाजी और मार्शल के खौफ को देखकर अगले दिन के अखबारों ने एक ऐसा हेडलाइन तैयार किया जो क्रिकेट इतिहास में अमर हो गया “मार्शल लॉ इन कानपुर”. यह शब्द उस खेल के माहौल को पूरी तरह बयां करता था, जहां मैदान पर सिर्फ और सिर्फ मैल्कम मार्शल का कानून चल रहा था. भारतीय टीम पहली पारी में सिर्फ 207 रन बना सकी और मैच में उसे एक पारी और 83 रनों से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी.

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Rajeev MishraAssociate editor

राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …

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