- वृंदावन योजना के मकान में छापा, 1370 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब के साथ एक आरोपी गिरफ्तार
- क्यूआर कोड स्कैन करने पर नहीं मिला कोई विवरण, जांच में ब्रांड लेबल और ढक्कन भी निकले कूटरचित
- आजमगढ़ के सप्लायर तक पहुंची जांच, नकली सामग्री तैयार करने वाले नेटवर्क की तलाश तेज
- 612 बोतल एट पीएम और 758 बोतल आफ्टर डार्क ब्रांड की शराब बरामद
- नकली पहचान देकर दूसरे राज्य में खपाने की थी तैयारी, अधिक मुनाफे के लिए रचा गया था पूरा खेल
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। राजधानी में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और अंतरराज्यीय तस्करी के खिलाफ आबकारी विभाग ने एक बार फिर बड़ा प्रहार किया है। फर्जी क्यूआर कोड, नकली ब्रांड लेबल और कूटरचित ढक्कनों के सहारे अवैध शराब को असली ब्रांड का रूप देकर दूसरे राज्यों में खपाने की तैयारी का आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है। थाना पीजीआई क्षेत्र के सेक्टर-10, वृंदावन योजना स्थित एक मकान में छापेमारी कर टीम ने 1370 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की है। बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब ढाई़ लाख रुपये बताई जा रही है। मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि शराब की सप्लाई और नकली क्यूआर कोड व लेबल तैयार करने वाले अन्य लोगों की तलाश में जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह के निर्देशन में अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग को अपने सक्रिय मुखबिर तंत्र से सूचना मिली थी कि वृंदावन योजना के सेक्टर-10 स्थित एक मकान में बड़ी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब छिपाकर रखी गई है। सूचना में यह भी सामने आया कि शराब को फर्जी पहचान देकर असली ब्रांड के नाम पर बाजार में उतारने की तैयारी चल रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई की और बताए गए स्थान पर छापेमारी की। कार्रवाई का नेतृत्व आबकारी निरीक्षक विवेक सिंह, राहुल सिंह, अरविंद बघेल और राम श्याम की संयुक्त टीम ने किया। टीम ने मकान की तलाशी ली तो वहां बड़ी मात्रा में अवैध अंग्रेजी शराब बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान अनिल वर्मा निवासी आजाद नगर, कृष्णानगर, लखनऊ को गिरफ्तार किया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मुखबिर तंत्र की सक्रियता, टीमों के बीच बेहतर समन्वय और लगातार की जा रही निगरानी के चलते अवैध शराब के इस नेटवर्क तक पहुंचने में सफलता मिली।
क्यूआर कोड स्कैन किया तो खुल गया नकली शराब का राज
छापेमारी के बाद बरामद शराब की जांच की गई तो पूरे खेल की परतें खुलती चली गईं। बरामद बोतलों पर लगे क्यूआर कोड को विभागीय मोबाइल एप के माध्यम से स्कैन किया गया, लेकिन किसी भी बोतल का विवरण उपलब्ध नहीं हुआ। इसके बाद बोतलों पर लगे ब्रांड लेबल और ढक्कनों की भी जांच की गई। जांच में लेबल और ढक्कन भी कूटरचित पाए गए। बरामद शराब में 180 मिलीलीटर की 612 बोतल एट पीएम प्रीमियम ब्लैक सुपीरियर व्हिस्की और 180 मिलीलीटर की 758 बोतल आफ्टर डार्क ब्लू रेयर ग्रेन व्हिस्की शामिल हैं। दोनों ब्रांड की कुल 1370 बोतलों में करीब 246.60 बल्क लीटर शराब बरामद हुई। अधिकारियों के मुताबिक नकली क्यूआर कोड और ब्रांडिंग सामग्री के सहारे शराब को पहली नजर में असली दिखाने की कोशिश की जा रही थी।
इसके बाद इसे दूसरे राज्य में भेजकर अधिक मुनाफा कमाने की तैयारी थी। प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी अनिल वर्मा ने शराब की आपूर्ति आजमगढ़ निवासी विमल यादव के माध्यम से किए जाने की जानकारी दी है। इसके बाद जांच टीम अब सप्लाई चेन से जुड़े लोगों तक पहुंचने में जुट गई है। विभाग को आशंका है कि नकली क्यूआर कोड, लेबल और ढक्कन तैयार करने के लिए अलग नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। शराब तस्कर अपने अवैध धंधे को चमकाने के लिए एक बार फिर तैयारी में जुट गए है, मगर आबकारी विभाग की रणनीति और उनके मुखबिर तंत्र के आगे बेबस नजर आ रहे है।
पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी में जुटा आबकारी विभाग
जिला आबकारी अधिकारी करुणेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। विभाग की कार्रवाई केवल शराब बरामद करने और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध कारोबार के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क तक पहुंचना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले की प्रारंभिक जांच में नकली क्यूआर कोड, ब्रांड लेबल और ढक्कनों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ाया गया है। शराब की आपूर्ति करने वाले लोगों के साथ-साथ नकली सामग्री तैयार करने वालों की भी पहचान की जा रही है। जो भी व्यक्ति इस नेटवर्क में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग की टीमें लगातार अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय रखे हुए हैं और पुलिस समेत अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई कर रही हैं। राजधानी में हुई यह कार्रवाई इसी मजबूत नेटवर्किंग और सतर्क निगरानी का परिणाम है। मामले में थाना पीजीआई में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की विभिन्न धाराओं और आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं शराब की सप्लाई करने वाले और नकली क्यूआर कोड, ब्रांड लेबल व ढक्कन तैयार करने वाले अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। आबकारी विभाग ने साफ कर दिया है कि अवैध शराब के निर्माण और अंतरराज्यीय तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।
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