Image Slider

दिल्ली के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और जटिल मेडिकल मामले का सफल इलाज कर एक महिला की जान बचाई। जांच में पता चला कि महिला की प्रेगनेंसी गर्भाशय में नहीं, बल्कि पेट के अंदर किडनी के पास विकसित हो रही थी। डॉक्टरों ने की-होल (लैप्रोस्कोपिक) सर्जरी के जरिए बिना बड़ा चीरा लगाए सफल ऑपरेशन किया।

बंगलूरू की रहने वाली महिला नियमित गर्भावस्था जांच के लिए दिल्ली के इस निजी अस्पताल पहुंची थी। शुरुआती अल्ट्रासाउंड में डॉक्टरों को पेट में एक बड़ी थैली जैसी संरचना दिखाई दी, जिसे पहले डर्मोइड सिस्ट (त्वचा के भीतर थैलीनुमा गांठ) समझा गया। लेकिन बाद में एमआरआई जांच से पता चला कि गर्भाशय की दीवार फट गई थी और 12 सप्ताह का भ्रूण पेट के अंदर किडनी और मुख्य रक्त वाहिकाओं के पास विकसित हो रहा था।

अस्पताल के ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभाग के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. मन्नन गुप्ता ने बताया कि यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी (भ्रूण का गर्भाशय के बाहर विकसित होना ) का बेहद दुर्लभ रूप है। आमतौर पर ऐसी गर्भावस्था फैलोपियन ट्यूब या ओवरी में होती है, लेकिन इस मामले में भ्रूण किडनी के पास विकसित हो रहा था।  डॉ. गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने अपने पूरे चिकित्सा कॅरिअर में पहली बार ऐसा मामला देखा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह का मामला लगभग 30 हजार मामलों में से किसी एक में देखने को मिलती है।

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||