Meerut News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ केवल 1857 की क्रांति की जन्मभूमि ही नहीं है, बल्कि देश को कई दिग्गज क्रिकेटर देने वाली नर्सरी भी है. शहर का प्रसिद्ध भामाशाह पार्क (पूर्व में विक्टोरिया पार्क) आज भुवी और प्रवीण कुमार जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को गढ़ने के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी जमीन के नीचे अंग्रेजी हुकूमत के जुल्म और भारतीय वीरों की शहादत का एक ऐसा गौरवशाली इतिहास दबा है, जो शायद हर कोई नहीं जानता. अंग्रेजों के दौर में यह मैदान एक खौफनाक जेल हुआ करता था, जिसकी दीवारें क्रांतिकारियों के हुंकार से दहल उठी थीं. इतिहासकार प्रोफेसर केके शर्मा से खास बातचीत के आधार पर जानिए इस पार्क का क्रांतिकारी अतीत और वर्तमान की कहानी.
इतिहासकार प्रोफेसर केके शर्मा ने लोकल-18 की टीम से खास बातचीत करते हुए बताया कि वर्तमान समय में जिसे शहरवासी भामाशाह पार्क के नाम से जानते हैं, वह विक्टोरिया के नाम से जेल हुआ करती थी. उन्होंने बताया कि उस समय जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीय विद्रोह करते थे, तो ब्रिटिश हुकूमत के अधिकारी भारतीय क्रांतिकारियों को विक्टोरिया जेल में ही बंद कर दिया करते थे. इसी जेल में उन 85 सैनिकों को भी बंद कर दिया गया था, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के कारतूस को चलाने से मना करते हुए विद्रोह कर दिया था.
जेल तोड़कर दिल्ली की तरफ कूच
उसके पश्चात यह चिंगारी ऐसे उत्पन्न हुई कि आसपास के ग्रामीणों के साथ मिलकर क्रांति का नेतृत्व कर रहे लोगों ने विक्टोरिया जेल पर हमला बोल दिया था. तत्पश्चात जेल की दीवार और गेटों को तोड़कर क्रांतिकारियों को आजाद कराते हुए बड़ी संख्या में दिल्ली की तरफ कूच किया था.
क्रिकेट हब और कौमी एकता का प्रतीक
दरअसल, मेरठ का विक्टोरिया पार्क इस समय क्रिकेट का हब बन चुका है. यहां से भुवनेश्वर कुमार, प्रवीण कुमार, शिवम मावी, कर्ण शर्मा सहित ऐसे कई खिलाड़ी निकले हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है और वर्तमान समय में छू भी रहे हैं.
बताते चलें कि वर्तमान समय में भामाशाह पार्क जाएंगे, तो आपको वह स्थान देखने को मिलेगा, जहां उन 85 क्रांतिकारियों के नाम का उल्लेख भी किया गया है. यह स्मृति उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, क्योंकि इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख सभी के नाम आपको देखने को मिलेंगे कि किस प्रकार देश को आजाद कराने में सभी धर्म के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
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Rahul Goyal is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations …
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