-सुरक्षा में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं, हर इंतजाम पहले से रहे तैयार: राहुल पाल
-शिविरों की रसोई से बिजली के तारों तक जांच, आग लगी तो शुरुआती मिनटों में ही काबू पाने की तैयारी
-शिविरों में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा इंतजामों की परखी हकीकत, कमियां दूर कराने पर जोर
-पहले कुछ मिनट में आग पर काबू पाने की तैयारी, हर शिविर में पानी, रेत और अग्निशामक यंत्र अनिवार्य
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कांवड़ यात्रा-2026 के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग पूरी तरह सतर्क है। गाजियाबाद कमिश्नरेट क्षेत्र में सोमवार को अग्निशमन विभाग की टीमों ने विभिन्न कांवड़ मार्गों पर स्थापित शिविरों का निरीक्षण किया। इस दौरान शिविरों में आग से बचाव के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की गहनता से जांच की गई। अधिकारियों ने शिविर संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी आकस्मिक अग्निकांड की स्थिति में तत्काल प्रारंभिक स्तर पर आग पर काबू पाने के लिए रेत, बालू और पर्याप्त मात्रा में पानी हर समय उपलब्ध रखा जाए।
निरीक्षण के दौरान अग्निशमन टीमों ने शिविरों में लगे अग्निशामक यंत्रों की स्थिति जांची और विद्युत व्यवस्था, रसोई, गैस सिलेंडर तथा आपातकालीन निकास मार्गों का भी जायजा लिया। विभाग की ओर से शिविर संचालकों को समझाया गया कि कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिविरों में ठहरते हैं, ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। अग्निशमन विभाग की इस सक्रियता से कांवड़ मार्गों पर बने शिविरों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कांवड़ यात्रा पूरी होने तक निरीक्षण और जागरूकता अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था की इस यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
शिविरों में हर समय तैयार रखना होगा आग बुझाने का इंतजाम
अग्निशमन विभाग ने शिविर संचालकों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिविर में पर्याप्त संख्या में अग्निशामक यंत्र पूरी तरह कार्यशील स्थिति में रखे जाएं। इसके साथ ही रेत, बालू और पानी की पर्याप्त व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि आग लगने की स्थिति में अग्निशमन दल के पहुंचने से पहले प्रारंभिक नियंत्रण किया जा सके। अधिकारियों ने विद्युत तारों और अस्थायी विद्युत कनेक्शनों को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। शिविरों में बिजली की जरूरत को देखते हुए अस्थायी कनेक्शन लिए जाते हैं, इसलिए तारों को खुले में बिखरा छोडऩे, क्षतिग्रस्त तारों का इस्तेमाल करने और क्षमता से अधिक विद्युत भार डालने से बचने को कहा गया। गैस सिलेंडरों के इस्तेमाल को लेकर भी शिविर संचालकों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए। सिलेंडरों को सुरक्षित और हवादार स्थान पर रखने तथा उनके आसपास ज्वलनशील सामग्री नहीं रखने को कहा गया।
रसोई और मुख्य पंडाल के बीच रहे पर्याप्त दूरी
निरीक्षण के दौरान अग्निशमन अधिकारियों ने शिविरों में खाना बनाने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। विभाग ने निर्देश दिए कि मुख्य पंडाल को खाना बनाने के स्थान से पर्याप्त दूरी पर रखा जाए। रसोई में अग्निशामक यंत्र के साथ रेत और पानी की पर्याप्त व्यवस्था अनिवार्य रूप से रखी जाए। अधिकारियों ने कहा कि कांवड़ शिविरों में एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहते हैं। ऐसे में खाना बनाने के दौरान आग की छोटी घटना भी तेजी से फैल सकती है। इसलिए रसोई को मुख्य पंडाल से अलग रखना और आग बुझाने के साधनों को तुरंत उपलब्ध रखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही प्रत्येक शिविर में आपातकालीन निकास मार्ग को हमेशा अवरोधमुक्त रखने के निर्देश दिए गए। किसी भी परिस्थिति में निकास द्वार के सामने सामान, बिस्तर या अन्य सामग्री नहीं रखने को कहा गया, ताकि आपात स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
लापरवाही नहीं, सुरक्षा में सावधानी सबसे जरूरी : राहुल पाल
मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बड़ी संख्या में कांवडि़ए विभिन्न शिविरों में रुकते हैं, इसलिए आग से बचाव के लिए पहले से सभी जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिविर संचालक अग्निशामक यंत्रों को केवल औपचारिकता के तौर पर न रखें, बल्कि उनकी कार्यशीलता की नियमित जांच भी करते रहें। रसोई में गैस सिलेंडर का इस्तेमाल सावधानी से किया जाए और आग के स्रोत के आसपास ज्वलनशील सामग्री न रखी जाए। विद्युत तारों पर अतिरिक्त भार डालने से भी बचना होगा।
राहुल पाल ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि शिविर में पानी, रेत, बालू और अग्निशामक यंत्र उपलब्ध हों तथा लोगों को उनका इस्तेमाल करना आता हो तो आग को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने शिविर संचालकों से अपील की कि सुरक्षा संबंधी निर्देशों को गंभीरता से लें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें। उन्होंने बताया कि अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग की टीमें कांवड़ यात्रा के दौरान प्रमुख कांवड़ मार्गों और शिविरों में लगातार निरीक्षण कर रही हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं और शिविर संचालकों को आग से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य किसी घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पहले से जरूरी सावधानियां सुनिश्चित कर किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को न्यूनतम करना है।
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