Image Slider

-होंडा इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से मसीत गांव में शुरू हुआ अभियान, पहले स्वास्थ्य शिविर में 205 ग्रामीणों को मिली चिकित्सा सुविधा
-एक ही शिविर में 423 चिकित्सकीय परामर्श, महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच पर विशेष जोर
-तीन साल चलेगा अभियान, जांच से जागरूकता और उपचार तक पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवाएं; विद्यालयों को भी बनाया जाएगा माध्यम

उदय भूमि संवाददाता
खैरथल-तिजारा। औद्योगिक विकास की रफ्तार के साथ ग्रामीण समुदायों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में राजस्थान के टपूकड़ा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। होंडा इंडिया फाउंडेशन के सहयोग, ग्राम पंचायत मसीत की सहभागिता और शारदा वेलफेयर फाउंडेशन के क्रियान्वयन में 30 जुलाई को मसीत गांव में ‘प्रोजेक्ट स्वस्थ’ का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य जांच, जागरूकता, रोगों की समय पर पहचान और जरूरतमंद लोगों को विशेषज्ञ उपचार तक पहुंच उपलब्ध कराना है। उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में समुदाय और विद्यालय आधारित स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुभव के बाद शारदा वेलफेयर फाउंडेशन ने राजस्थान में अपने सामाजिक कार्यों का विस्तार किया है। परियोजना की शुरुआत के अवसर पर आयोजित पहले निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में ग्रामीणों ने उत्साह के साथ भाग लिया। शिविर में 205 ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला और चिकित्सकों की ओर से कुल 423 चिकित्सकीय परामर्श दिए गए। स्वास्थ्य शिविर में सामान्य स्वास्थ्य से लेकर महिलाओं और आंखों से जुड़ी समस्याओं की जांच की गई।

कुल 423 चिकित्सकीय परामर्श में 147 सामान्य चिकित्सकीय परामर्श, 142 महिलाओं को स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की सेवाएं तथा 134 लोगों की आंखों की जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श शामिल रहे। शिविर के दौरान एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य गैर-संचारी रोगों की भी जांच की गई। जांच के दौरान जिन लोगों में आगे उपचार की आवश्यकता पाई गई, उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के लिए उचित मार्गदर्शन दिया गया। आयोजकों के अनुसार परियोजना का उद्देश्य केवल एक-दो स्वास्थ्य शिविर आयोजित करना नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के बीच नियमित स्वास्थ्य जांच को लेकर जागरूकता बढ़ाना और समय रहते बीमारियों की पहचान करने की आदत विकसित करना है। इसके साथ ही पात्र परिवारों को आयुष्मान भारत योजना से जोडऩे का प्रयास भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। यदि परियोजना नियमित स्वास्थ्य जांच, समय पर उपचार और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल रहती है तो यह औद्योगिक विकास और सामुदायिक स्वास्थ्य के बीच बेहतर तालमेल का अनुकरणीय उदाहरण बन सकती है। टपूकड़ा में शुरू हुई यह पहल आर्थिक प्रगति के साथ स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य और सामाजिक सशक्तीकरण को जोडऩे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य पर रहेगा खास फोकस
टपूकड़ा क्षेत्र को ‘प्रोजेक्ट स्वस्थ’ के लिए चुना जाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह राजस्थान के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है और मेवात अंचल से भी जुड़ा हुआ है। क्षेत्र में एक ओर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी ग्रामीण आबादी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता की जरूरत महसूस कर रही है। इसी आवश्यकता को देखते हुए आने वाले तीन वर्षों में परियोजना के तहत टपूकड़ा क्षेत्र के समुदायों और विद्यालयों में नियमित स्वास्थ्य गतिविधियां संचालित की जाएंगी। महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। पोषण संबंधी परामर्श, दृष्टि परीक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन अभियान और गैर-संचारी रोगों की नियमित जांच जैसी गतिविधियां लगातार संचालित होंगी। विद्यालयों को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जाएगा। बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सही जानकारी देने के साथ उन्हें स्वस्थ व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि इसका प्रभाव उनके परिवारों तक भी पहुंचे।

तीन साल में तैयार होगा सामुदायिक स्वास्थ्य का मॉडल
‘प्रोजेक्ट स्वस्थ’ को एक समुदाय आधारित निवारक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बीमारी होने के बाद उपचार उपलब्ध कराने के बजाय बीमारी की समय रहते पहचान, रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति लोगों को जागरूक करना है। परियोजना के तहत एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य गैर-संचारी रोगों की नियमित स्क्रीनिंग पर विशेष जोर रहेगा। जरूरतमंद मरीजों को आगे के उपचार के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जाएगी। राजस्थान में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखते हुए इस तरह की पहल की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार राज्य में 15 से 49 वर्ष की 54.7 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जबकि 6 से 59 माह आयु वर्ग के 71.5 प्रतिशत बच्चे एनीमिया की समस्या से जूझ रहे हैं। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य गैर-संचारी रोगों का बोझ भी बढ़ रहा है। ऐसे में समुदाय स्तर पर नियमित जांच और शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। आयोजकों का कहना है कि परियोजना का लक्ष्य टपूकड़ा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उद्योग, ग्राम पंचायत, समुदाय और स्वास्थ्य संस्थानों की साझेदारी से ऐसा सहभागी स्वास्थ्य मॉडल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे भविष्य में देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी स्थानीय जरूरतों के अनुरूप लागू किया जा सके।

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||