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गोंडा के किसान प्रवीण बताते हैं कि हमारे बाग में ताइवान पिंक, ताइवान, रेड डायमंड और ब्लैक डायमंड जैसे प्रजापत की अमरूद की बागवानी कर रहे हैं. बाराबंकी के किसान कुलभूषण सिंह और प्रभात सिंह के यहां गया तो हमने देखा कि उनके यहां ताइवान पिंक अमरूद के वैरायटी की बागवानी कर रहे हैं. हमने उनसे राय लिया और काफी रिसर्च करने के बाद हमने शुरुआत में कुछ पौधे लगाए तो वह पौधे हमारे सरवाइव कर गए. फिर हमने इस समय लगभग 1 एकड़ में अमरूद की बागवानी कर रहे हैं.

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गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के मनकापुर एक किसान ने पारंपरिक खेती के साथ अमरूद की बागवानी शुरू की और आज इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं. किसान का कहना है कि अनाज की खेती की तुलना में अमरूद की बागवानी से अधिक मुनाफा मिल रहा है. यही वजह है कि अब आसपास के कई किसान भी फलों की खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं.

लोकल 18 से बातचीत के दौरान प्रगतिशील किसान प्रवीण सिंह ने बताया कि उन्होंने डेढ़ साल पहले अपने खेत में अमरूद का बाग लगाया था. शुरुआत में पौधों की देखभाल, सिंचाई और खाद पर ध्यान दिया. समय के साथ पेड़ों ने अच्छी पैदावार देना शुरू कर दिया. अब हर सीजन में बड़ी मात्रा में अमरूद तैयार होता है, जिसे स्थानीय मंडियों और आसपास के बाजारों में आसानी से बेच दिया जाता है.

ताइवान पिंक व रेड डायमंड की कर रहे खेती

प्रवीण बताते हैं कि हमारे बाग में ताइवान पिंक, ताइवान, रेड डायमंड और ब्लैक डायमंड जैसे प्रजापत की अमरूद की बागवानी कर रहे हैं. बाराबंकी के किसान कुलभूषण सिंह और प्रभात सिंह के यहां गया तो हमने देखा कि उनके यहां ताइवान पिंक अमरूद के वैरायटी की बागवानी कर रहे हैं. हमने उनसे राय लिया और काफी रिसर्च करने के बाद हमने शुरुआत में कुछ पौधे लगाए तो वह पौधे हमारे सरवाइव कर गए. फिर हमने इस समय लगभग 1 एकड़ में अमरूद की बागवानी कर रहे हैं. 1 एकड़ में लगभग डेढ़ लाख रुपए की लागत लगी है. लेकिन पौधा छोटा था तो हमने इसमें लहसुन और आलू की खेती कर लिए थे जिससे हमारा लागत निकल आया है अब जो होगा प्रॉफिट ही प्रॉफिट होगा.

प्रतिदिन निकल रहा एक कुंतल अमरूद

प्रवीण सिंह बताते हैं कि लगभग डेढ़ साल का पौधा है और फल देना शुरू कर दिया है पहली बार हमने हार्वेस्टिंग कर रहे हैं और प्रतिदिन लगभग 1 कुंतल अमरूद निकल रहा है. बरसात में थोड़ा फल मक्खी का प्रकोप ज्यादा होता है इसलिए काफी फसल का नुकसान हो जाता है. उन्होंने बताया कि पहले हार्वेस्टिंग है इसलिए लगभग 10 कुंतल हार्वेस्टिंग हो जाएगा. उन्होंने बताया कि अच्छी खासी इनकम होने की उम्मीद है.

भविष्य में इसको आगे बढ़ाना है क्योंकि यह अमरूद 12 महीने फल देता रहता है. और पॉकेट मनी की किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है. इसलिए किसान भाई से कहना चाहेंगे कि यह उनके पास ज्यादा जमीन नहीं है तो अपने खेत के किनारे अमरूद नींबू जैसे फल जरूर लगाएं जिससे उनको पॉकेट मनी की किसी भी प्रकार की दिक्कत ना हो.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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