परदे पर सितारों की चमक दिखती है, लेकिन उस चमक को बनाने वाले लाइटमैन की जिंदगी अब भी संघर्षों से भरी है. सुबह तड़के सेट पर पहुंचने से लेकर देर रात तक काम करने वाले इन तकनीशियनों का कहना है कि 18 घंटे की ड्यूटी के बाद भी उन्हें सिर्फ 1800 रुपये मिलते हैं. कम मेहनताना, देर से भुगतान और खराब सुविधाओं के बीच उनका दर्द अब सामने आया है, जिसने बॉलीवुड के ग्लैमर के पीछे की हकीकत उजागर कर दी.
लाइटमैन ने अपनी आपबीती शेयर की है.
बड़े पर्दे पर जब कोई फिल्म रिलीज होती है तो दर्शकों की नजरें सिर्फ सितारों और निर्देशक पर रहती हैं. लेकिन कैमरे के पीछे हजारों तकनीशियन ऐसे होते हैं, जिनकी मेहनत से किसी फिल्म का हर सीन जीवंत बनता है. इन्हीं में शामिल हैं लाइटमैन, जिनका काम शूटिंग के दौरान रोशनी की पूरी व्यवस्था संभालना होता है. हालांकि, करोड़ों रुपये के बजट वाली फिल्मों में काम करने के बावजूद इन तकनीशियनों का दावा है कि उन्हें आज भी बेहद मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है. प्रोडक्शन हाउस ‘रील्जेन क्रिएटिव’ की हाल ही में जारी एक डॉक्यू-सीरीज में दिल्ली के कई लाइटमैन ने अपने कामकाजी जीवन की चुनौतियों को खुलकर साझा किया. उन्होंने बताया कि लंबी ड्यूटी, कम मेहनताना, भुगतान में देरी और बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी उनकी सबसे बड़ी परेशानियां हैं.
‘समय से पहले लाइटिंग तैयार करनी होती है’
दिल्ली में ‘वाइड लाइट’ के मालिक सूरज गौतम ने बताया कि उनकी टीम का दिन अकसर रात खत्म होने से पहले ही शुरू हो जाता है. उन्होंने कहा कि शूटिंग सेट पर समय से पहले लाइटिंग तैयार करनी होती है, इसलिए कई बार कर्मचारियों को रात 3 बजे तक पहुंचने का कॉल टाइम देना पड़ता है. उनके मुताबिक, कैमरा चलने से पहले पूरी लाइटिंग व्यवस्था तैयार करना लाइटमैन की जिम्मेदारी होती है.
मेहनत के मुकाबले नहीं मिलता भुगतान
फ्रीलांस लाइटमैन दिनेश भारती ने भी बताया कि इस पेशे में काम के घंटे तय नहीं होते. कभी सुबह 2 बजे तो कभी 5 बजे काम शुरू करना पड़ता है. उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा मेहनत करने वालों में लाइटमैन शामिल हैं, लेकिन मेहनत के मुकाबले उन्हें सबसे कम भुगतान मिलता है.
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