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शिवराजपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय नदीहा धामू में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले बच्चों को जुलाई तक पूरी किताबें नहीं मिल सकीं. विभागीय अधिकारियों ने जब मौके पर जानकारी ली तो पता चला कि कक्षा एक से तीन तक की कुछ किताबें पहुंची थीं, लेकिन चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चों को सभी किताबें नहीं मिली थीं. इस मामले के सामने आने के बाद पूरे विकासखंड में विभागीय स्तर पर हलचल मच गई.

कानपुर: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुए 100 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन जिले के कई सरकारी प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिल सकीं. एक ओर बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि जिले के 1.36 लाख से ज्यादा बच्चों को 13.64 लाख किताबें वितरित कर दी गई हैं, वहीं दूसरी ओर कई स्कूलों में शिक्षकों का कहना है कि किताबें या तो काफी देर से पहुंचीं या फिर कुछ कक्षाओं तक अब भी पूरी तरह नहीं पहुंच सकी हैं.

ऐसे में सत्र के शुरुआती महीनों में हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई. जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के तहत कुल 1937 प्राथमिक और जूनियर विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 1,36,327 बच्चे पढ़ते हैं. विभाग के अनुसार कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को कुल 13.64 लाख किताबें उपलब्ध कराई जानी थीं. हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति कई जगह अलग दिखाई दी.

शिवराजपुर और ककवन के स्कूलों में सामने आई देरी की तस्वीर

शिवराजपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय नदीहा धामू में कक्षा एक से पांच तक पढ़ने वाले बच्चों को जुलाई तक पूरी किताबें नहीं मिल सकीं. विभागीय अधिकारियों ने जब मौके पर जानकारी ली तो पता चला कि कक्षा एक से तीन तक की कुछ किताबें पहुंची थीं, लेकिन चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चों को सभी किताबें नहीं मिली थीं. इस मामले के सामने आने के बाद पूरे विकासखंड में विभागीय स्तर पर हलचल मच गई.

इसी तरह ककवन विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय हरिपुरवा में बच्चों तक किताबें जुलाई के अंतिम सप्ताह में पहुंचीं. जबकि नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो जाता है और उसी समय से नियमित पढ़ाई भी शुरू हो जाती है. यहां के शिक्षकों का कहना है कि हर साल किताबों के वितरण में देरी होती है, जिससे शुरुआती महीनों में पढ़ाई प्रभावित होती है.

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा असर

बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिओम सिंह का कहना है कि जिले में 1.36 लाख बच्चों को 13.64 लाख किताबें वितरित की जा चुकी हैं. उन्होंने माना कि कुछ जगह किताबें समय से बच्चों तक नहीं पहुंच पाती हैं. इसके पीछे एक कारण प्रेरणा पोर्टल पर समय से जानकारी अपडेट न होना भी है. बीएसए के मुताबिक सभी स्कूलों के शिक्षकों को छात्रों की संख्या और किताबों की जरूरत का विवरण प्रेरणा पोर्टल पर दर्ज करना होता है. लेकिन जुलाई खत्म होने तक जिले के करीब 50 प्रतिशत शिक्षकों ने भी यह जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं की थी. इससे किताबों की आपूर्ति और वितरण की प्रक्रिया प्रभावित होती है. विभाग का कहना है कि शासन से किताबें आने के बाद उन्हें पहले जिला स्तर पर रखा जाता है.

इसके बाद विकासखंड के बीआरसी कार्यालयों में भेजा जाता है और वहां से शिक्षकों के माध्यम से बच्चों तक पहुंचाया जाता है. इसी प्रक्रिया में कई बार देरी हो जाती है.हालांकि, सवाल यह है कि जब नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 100 दिन से अधिक हो चुके हैं, तब भी यदि कुछ स्कूलों के बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिल पाईं, तो इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ना तय है. अब अभिभावकों और शिक्षकों को उम्मीद है कि विभाग आने वाले समय में किताबों का वितरण समय से सुनिश्चित करेगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई सत्र की शुरुआत से ही बिना किसी बाधा के चल सके.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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