अश्लेषा नक्षत्र का ज्योतिषीय महत्व
अश्लेषा नक्षत्र को ज्योतिष में तीक्ष्ण और संवेदनशील नक्षत्र माना गया है। इसके स्वामी बुध और देवता नाग होने के कारण इस दौरान वाणी में कड़वाहट, मान-सम्मान में उतार-चढ़ाव और गुप्त शत्रुओं का भय बढ़ सकता है। सूर्य (अग्नि तत्व) का अश्लेषा (जल तत्व की राशि कर्क) में रहना मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है।
इन 5 राशियों के लिए शुरू होगा ‘टफ टाइम’
1. मेष राशि (Aries)
सूर्य का यह गोचर आपके चौथे भाव को प्रभावित करेगा। इस दौरान माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ अनबन हो सकती है। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी में निर्णय न लें।
2. मिथुन राशि (Gemini)
बुध के स्वामी वाले नक्षत्र में सूर्य का आना आपकी वाणी में तीखापन ला सकता है। पारिवारिक मामलों में संयम बरतें। अचानक धन खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है। लेन-देन में सावधानी बरतें।
3. कर्क राशि (Cancer)
सूर्य आपकी ही राशि और अश्लेषा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। इससे आपके स्वभाव में गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। सेहत का विशेष ध्यान रखें, विशेषकर सिरदर्द या आंखों से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
4. तुला राशि (Libra)
नौकरी और व्यापार के क्षेत्र में कुछ रुकावटें आ सकती हैं। वरिष्ठ अधिकारियों (Boss) के साथ बातचीत में विनम्रता बनाए रखें। किसी भी नए निवेश से 17 अगस्त तक बचने की सलाह दी जाती है।
5. मकर राशि (Capricorn)
सप्तम भाव पर सूर्य का प्रभाव दांपत्य जीवन में तनाव पैदा कर सकता है। जीवनसाथी के साथ गलतफहमियां न बढ़ने दें। व्यापारिक साझेदार (Partnership) के साथ पारदर्शिता बनाए रखें।
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