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होमताजा खबरधर्मगयाजी में पिंडदान के लिए आ रहें? कौन हैं आपके कुल तीर्थ पुरोहित, ऐसे लगाएं पता

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Pitru Paksha Gaya: सदियों से इन पुरोहितों के पास अपने यजमानों का वंशावली रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है. जिसे पंजी या वंशावली रजिस्टर कहा जाता है. इन पंजी रजिस्टरों में परिवार के पूर्वजों के नाम, गांव, जिला, गोत्र, पिंडदान की तिथि तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज रहती है. पुरोहित का नाम अज्ञात होने पर बड़ों से पूछें या गया के पंजीकार से संपर्क करें. 

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गयाजी: गयाजी में पितृपक्ष के दौरान पिंडदान और श्राद्ध का विशेष धार्मिक महत्व है. हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार गया जी में पितरों का श्राद्ध और पिंडदान करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. परिवार को पितृदोष से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. इस वर्ष पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरु हो रही है. 10 अक्टूबर तक चलेगा. इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पूर्वजों के पिंडदान के लिए गया जी पहुंचेंगे. ऐसे में अधिकांश लोगों के मन में यह प्रश्न होता है कि गया जी में उनके तीर्थ पुरोहित कौन हैं और उनका पता कैसे करें?

यजमानों का वंशावली रिकॉर्ड सुरक्षित
विष्णुपद क्षेत्र में स्थित रामानुज मठ के मठाधीश स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य महाराज बताते है कि गयाजी के तीर्थ पुरोहित पीढ़ियों से अलग-अलग राज्यों, जिलों और परिवारों के यजमानों का पिंडदान एवं श्राद्ध संस्कार कराते आ रहे हैं. सदियों से इन पुरोहितों के पास अपने यजमानों का वंशावली रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है, जिसे पंजी या वंशावली रजिस्टर कहा जाता है. इन पंजी रजिस्टरों में परिवार के पूर्वजों के नाम, गांव, जिला, गोत्र, पिंडदान की तिथि तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज रहती है.

पिंडदान के बाद सुफल कहां से लें? 
इन्होंने बताया गयाजी में पिंडदान के बाद सुफल अपने तीर्थ पुरोहित से ही लेना चाहिए. सुफल केवल वही तीर्थ पुरोहित देते हैं, जिनके यहां संबंधित यजमान परिवार की वंशावली पंजी सुरक्षित रहती है. यदि किसी परिवार का पहले से गया के किसी पुरोहित से पारंपरिक संबंध है, तो उसी पुरोहित से पिंडदान कराना और उन्हीं से सुफल प्राप्त करना परंपरा का हिस्सा माना जाता है.

200-400 वर्षों का रिकॉर्ड उपलब्ध
कई परिवारों का रिकॉर्ड 200-400 वर्ष या उससे भी अधिक पुराना मिलता है. यदि आप पहली बार गया आ रहे हैं या अपने पुरोहित का नाम भूल गए हैं, तो चिंता की आवश्यकता नहीं है. सबसे पहले अपने दादा-दादी, माता-पिता, चाचा या अन्य बड़े सदस्यों से पूछें कि पहले पिंडदान कराने कौन-से पुरोहित के पास जाते थे. कई परिवारों को अपने पुरोहित का नाम और पता याद रहता है.

याद रखें ये, मिलेगी मदद
यदि घर में पहले के पिंडदान की रसीद, फोटो, निमंत्रण पत्र या कोई धार्मिक दस्तावेज सुरक्षित है, तो उसमें पुरोहित का नाम और पता मिल सकता है. यदि केवल अपना गांव, जिला, राज्य और गोत्र पता है, तो गया के पंजीकार या संबंधित पुरोहित परिवार आपकी वंशावली देखकर सही तीर्थ पुरोहित का पता बता सकते हैं. इसके अलावे गया जी पहुंचने पर विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में स्थित अधिकृत पंजीकार और पुरोहित परिवारों से संपर्क करें. वे आपके परिवार की जानकारी के आधार पर संबंधित पुरोहित तक पहुंचने में मदद करते हैं.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…

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