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केंद्र सरकार डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों पर कड़ा शिकंजा कसने जा रही है. अब नकली वीडियो बनाना और सोशल मीडिया पर चलाना बड़ा अपराध होगा. नए कानून में दोषियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान होगा और जमानत भी मुश्किल होगी.
घर-दुकान हो जाएगा जब्त, जमानत भी मुश्किल… फेक वीडियो-ऑनलाइन ठगों की लंका लगाने जा रही सरकार
केंद्र सरकार डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में लिप्त लोगों पर कड़ा शिकंजा कसने जा रही है. लोगों को बेवकूफ बनाकर या डिजिटल अरेस्ट कर लाखों-करोड़ों रुपयों की ऑनलाइन ठगी करने वाले लोगों के खिलाफ भारत सरकार मजबूत कानून लाने जा रही है. इसमें न केवल अपराधियों के घर-दुकान और संपत्तियां जब्त हो जाएंगे बल्कि उन्हें जमानत मिलना भी मुश्किल हो जाएगा.
जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार जल्द ही डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट को अपराध घोषित कर सकती है. इसी मानसून सत्र में सरकार एक नया कानून ला सकती है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से किसी के भी बनाए गए डीपफेक वीडियो या फोटो और ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों को अलग-अलग आपराधिक अपराध माना जाएगा. बताया जा रहा है कि यह भारत में एआई से होने वाले साइबर अपराधों से निपटने का सबसे बड़ा कानूनी कदम होगा.
बताया जा रहा है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के तीन जस्टिस मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहंते की बेंच के गौर करने के बाद उठाया जा रहा है. मंगलवार को बैंच ने कहा था कि मौजूदा कानूनों में इन दोनों अपराधों की साफ परिभाषा नहीं है जिससे ऐसे गंभीर मामलों में भी किसी पर मुकदमा चलाना मुश्किल हो जाता है. क्या नया कानून इस कमी को दूर करेगा और सजा भी साफ तय करेगा.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “क्या डिजिटल अरेस्ट को कानून में अलग से परिभाषित करना जरूरी है? इसमें जबरन वसूली और डकैती जैसे तत्व हैं. क्या इसे गंभीर सजा वाला अलग अपराध बनाना चाहिए, क्या साथ में यह प्रावधान भी होगा कि आरोपी के खिलाफ कुछ मिलने पर उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाए?”
इसके जवाब में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया कि केंद्र सरकार की एक अंतर-विभागीय समिति डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों की खामियों पर रिपोर्ट तैयार कर रही है. वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट के लिए नया कानून बनाने पर काम कर रही है.
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ‘बनाए जा रहे नए कानून में इन दोनों को अलग अपराध माना जाएगा. दोषियों की संपत्ति और बैंक खाते फ्रीज करने का प्रावधान भी होगा. यह कानून आईटी नियमों के साथ काम करेगा, जिन्हें इस साल पहले ही एआई वाले नुकसानदायक कंटेंट के खिलाफ सख्त किया गया था.’
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में डीपफेक यानि एआई से बने फेक वीडियो और आवाज क्लोनिंग वाले घोटाले तेजी से बढ़े हैं. ऐसे वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर तैरते मिलते हैं जिनमें डीपफेक से मशहूर लोगों और आम नागरिकों की नकल की जाती है और वे ऑरिजिनल जैसे दिखाई देते हैं. इससे लोगों में इन लोगों के प्रति दुर्भावना आ जाती है या मशहूर लोगों की बदनामी होती है.
वहीं डिजिटल अरेस्ट की बात करें तो व्हाट्सएप या फेसबुक और इंस्टग्राम के माध्यम से ठग पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बनकर लोगों को धमकाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं और यह घोटाला करोड़ों रुपये का हो जाता है.
अभी तक धोखाधड़ी, नकल और पहचान चोरी जैसे अपराधों में पहले से बीएनएस और आईटी एक्ट में सजा दी जाती है लेकिन डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट की अलग परिभाषा न होने से जांच मुश्किल हो जाती है. हालांकि अब नया कानून इससे निपटने में मदद करेगा और ऐसे अपराधों को रोकने में असरदार साबित होगा.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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