Image Slider

Last Updated:

महराजगंज में लगभग हर मौसम में नदी के किनारे बसे गांव के मछुआरे बड़ी गंडक नदी में मछली पकड़ने के लिए आते हैं. नदी के नजदीक गांव बसे होने की वजह से इन लोगों का जुड़ाव भी नदी से दिखता है. बड़ी गंडक नदी में एक खास प्रजाति की चेपुआ मछली पाई जाती है जो अपने अलग विशेषता के लिए जानी जाती है. चेपुआ मछली की बात करें तो यह स्थानीय क्षेत्र के साथ-साथ अन्य दूसरे क्षेत्र में भी बहुत ही प्रसिद्ध है. बड़ी गंडक नदी में मिलने वाले इस खास प्रकार की मछली की खूब मांग होती है.

ख़बरें फटाफट

महराजगंज: यूपी के महराजगंज जिले में नेपाल से होकर आने वाली कई छोटी बड़ी नदियां बहती हैं. सीमावर्ती जिला होने की वजह से यह अपने आप में एक खास जिला है. हम सब ने बचपन से यह सुना है कि नदियां अपने आसपास के क्षेत्र में ज्यादा पानी होने की वजह से उफान पर आ जाती हैं और आस पास के क्षेत्रों में बहुत बर्बादी होती है. इसके ठीक विपरीत कई फायदे भी इन क्षेत्रों में देखने को मिलते हैं जैसे कि नदी एक बड़े भूमि क्षेत्र को उपजाऊ बनाती है. इसके साथ ही जीने और रहन-सहन के लिए कुछ मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध कराती है.

यही वजह है कि इतिहास के किताबों में हमें यह पढ़ने का मिलता है कि नदियों के किनारे ही अलग-अलग सभ्यताओं का विकास हुआ. महराजगंज जिले की बात करें तो यह जिला भी नेपाल के पहाड़ों से होकर आने वाली नदियों से जुड़ा हुआ है. इनमें से ही एक है बड़ी गंडक नदी जो जिले के आखिरी छोर से बहते हुए कुशीनगर और बिहार की ओर चली जाती है. इस नदी से सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों का जीवन जुड़ा हुआ है. खासकर यहां के किसान, नाविक और मछुआरे तो बड़ी गंडक नदी जिसे हम नारायणी नदी के नाम से भी जानते हैं उसके सहारे ही अपने आर्थिक जीवन को दिशा देते हैं.

गंडक नदी की मछलियां बनती हैं आर्थिक सहारा

लगभग हर मौसम में नदी के किनारे बसे गांव के मछुआरे बड़ी गंडक नदी में मछली पकड़ने के लिए आते हैं. नदी के नजदीक गांव बसे होने की वजह से इन लोगों का जुड़ाव भी नदी से दिखता है. बड़ी गंडक नदी में एक खास प्रजाति की चेपुआ मछली पाई जाती है जो अपने अलग विशेषता के लिए जानी जाती है. चेपुआ मछली की बात करें तो यह स्थानीय क्षेत्र के साथ-साथ अन्य दूसरे क्षेत्र में भी बहुत ही प्रसिद्ध है. बड़ी गंडक नदी में मिलने वाले इस खास प्रकार की मछली की खूब मांग होती है. ज्यादातर यहां के स्थानीय लोग ही बड़ी गंडक नदी से इन मछलियों को निकालते हैं और आसपास के अलग-अलग मार्केट में भी पहुंचाते हैं.

मानसून का समय शुरू होते ही बड़ी संख्या में नदी से मछुआरे इन मछलियों को निकालते हैं. इसके साथ ही एक चिंता का विषय यह भी है कि धीरे-धीरे इन मछलियों की स्टॉक में कमी आ रही है जो एक गंभीर विषय बना हुआ है. बड़ी गंडक नदी के आसपास बसे लोगों की बात करें तो उनके लिए चेपुआ मछली सिर्फ भोजन के लिए ही नहीं बल्कि उनके आर्थिक जीवन से भी जुड़ा हुआ है.

पर्यटकों को खूब पसंद आती है यह चेपुआ मछली

चेपुआ मछली के डिमांड का अंदाज़ इस बात से ही लगाया जा सकता है कि स्थानीय मार्केट में न मिलने के बाद लोग नदी के किनारे मछुआरों के पास जाकर खरीदने के लिए भी पहुंच जाते हैं. इसके अलावा जब मछुआरे इन मछलियों को मार्केट में लेकर जाते हैं तो इसके लिए ग्राहक ज्यादा आकर्षित होते हैं. बड़ी गंडक नदी महराजगंज के सीमावर्ती क्षेत्र से होते हुए कुशीनगर जिले के पनियहवा से गुजरती है जहां पर मछली और भुजा का प्रचलन है. इसी बड़ी गंडक नदी से वहां के मछुआरे भी चेपुआ मछली को निकालते हैं और आने वाले पर्यटकों के लिए तैयार करते हैं. पनियहवा में आने वाले पर्यटक चेपुआ मछली और भुजा के लिए ही ज्यादा आते हैं जिससे इस मछली के डिमांड का अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसे में हम इस चीज को बहुत ही नजदीक से देख सकते हैं कि नदियां सिर्फ बाढ़ नहीं लाती बल्कि अपने आसपास के क्षेत्र को उर्वर बनती हैं और अन्य दूसरे साधन भी उपलब्ध कराती हैं.

About the Author

authorimg

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …

और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||