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Plant Care Tips: यदि आप अपने घर के बैकयार्ड को प्राकृतिक और आकर्षक लुक देना चाहते हैं, तो विधारा की बेल एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. यह तेजी से बढ़ने वाली सजावटी बेल है, जो कम देखभाल में भी अच्छी तरह विकसित होती है. इसे धूप वाली जगह पर लगाने, नियमित सिंचाई करने और मजबूत सहारे की व्यवस्था करने से यह तेजी से फैलती है और पूरे क्षेत्र को हरियाली से भर देती है. विधारा की बेल न केवल घर की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि प्राकृतिक वातावरण भी तैयार करती है. सही देखभाल के साथ यह आपके गार्डन को सालभर ताजा और आकर्षक बनाए रख सकती है.
भीलवाड़ा: अक्सर लोगों का सोचा यही होता है कि घर के पीछे बैकयार्ड पर एक छोटा सा किचन गार्डन हो जिसमें हरियाली दिखाई दे इसके लिए लोग कई खर्च भी करते हैं लेकिन आज हम आपको एक ऐसी बेल के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसके लगाने के बाद घर का बैक या हरियाली से भर जाएगा और छाया भी हो जाएगी. अगर आप अपने घर के बैक-यार्ड या खाली जगह को हरियाली से भरना चाहते हैं. तो विधारा की बेल जिसे आम भाषा में तामेश्वर की बेल भी कहते हैं. ये एक ऐसी बेल हैं जो तेजी से बढ़ने वाली औषधीय और सजावटी बेल है, जो कम देखभाल में भी अच्छी तरह विकसित हो जाती है. इसकी घनी हरी पत्तियां घर के आसपास ठंडक का एहसास कराती हैं. खास बात यह है कि इसे लगाने के लिए किसी विशेष तकनीक या महंगे सामान की जरूरत नहीं होती. थोड़ी सी तैयारी और नियमित देखभाल से यह बेल कुछ ही महीनों में पूरे बैक-यार्ड को हरे-भरे रूप में बदल सकती है. यह बेल घर की दीवारों, जालियों, गेट और बाउंड्री पर आसानी से फैल जाती है और पूरे परिसर को अट्रैक्टिव लुक देती है.
विधारा की बेल लगाने के लिए सबसे पहले ऐसी लोकेशन देखें जहां पर्याप्त धूप और खुली हवा आती हो. यह बेल आधी और पूरी दोनों तरह की धूप में अच्छी तरह बढ़ती है, लेकिन रोजाना कुछ घंटे धूप मिलने से इसकी बढ़वार ज्यादा तेज होती है. मिट्टी में गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट मिलाने से पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और जड़ें मजबूत बनती हैं. पौधा लगाने के बाद हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे. अगर आप इसे गमले में लगाना चाहते हैं, तो कम से कम 16 से 18 इंच का गमला चुनें, जिससे जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके. बेल को सहारा देने के लिए लकड़ी, लोहे की जाली या रस्सी का इस्तेमाल करें ताकि यह ऊपर की ओर तेजी से फैल सके और सुंदर हरियाली तैयार हो सके.
विधारा की बेल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती. शुरुआती दिनों में नियमित पानी देना जरूरी होता है, लेकिन एक बार पौधा अच्छी तरह स्थापित हो जाए तो सामान्य सिंचाई से भी यह आसानी से बढ़ता रहता है. बरसात के मौसम में अतिरिक्त पानी देने की जरूरत नहीं होती, जबकि गर्मियों में मिट्टी सूखने पर सिंचाई करनी चाहिए. समय-समय पर सूखी और कमजोर शाखाओं की छंटाई करने से नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं और बेल ज्यादा घनी बनती है.
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अगर बैक-यार्ड में दीवार, गेट, जाली या पेर्गोला बना हुआ है तो विधारा की बेल वहां बेहद आकर्षक दिखाई देती है. कुछ ही समय में यह पूरी संरचना को हरे रंग से ढक देती है और घर को प्राकृतिक गार्डन जैसा रूप दे देती है. इसकी घनी पत्तियां तेज धूप को भी काफी हद तक रोकती हैं, जिससे आसपास का एनवायरनमेंट ठंडा महसूस होता है. छोटे घरों में भी इसे गमलों के माध्यम से आसानी से उगाया जा सकता है. बालकनी, टैरेस या खुले आंगन में भी यह बेल सुंदर हरियाली का अहसास कराती है. यदि इसके साथ अन्य फूलों वाले पौधे लगाए जाएं तो पूरे गार्डन की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है और घर का वातावरण अधिक ताजगी भरा नजर आता है.
विधारा की बेल केवल सजावटी पौधा ही नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में भी इसका विशेष महत्व बताया गया है. इसकी जड़ और अन्य भागों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में कई तरह से किया जाता रहा है. यह पौधा इसलिए भी खास है क्योंकि यह तेजी से बढ़ता है, लंबे समय तक हरा रहता है और कम लागत में बेहतरीन परिणाम देता है. यदि समय-समय पर इसकी देखभाल की जाए तो यह कई वर्षों तक घर की सुंदरता बढ़ाता रहता है. इसकी प्राकृतिक हरियाली पक्षियों और तितलियों को भी आकर्षित करती है, जिससे घर के आसपास का वातावरण और भी जीवंत बन जाता है.
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