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अमेठी में स्वयं सहायता समूह के जरिए लोगों को रोजगार का मौका मिल रहा है स्वयं सहायता समूह के जरिए तरह-तरह के प्रोडक्ट तैयार होते हैं जिसमें अचार मुरब्बा चिप्स पापड़ के साथ-साथ खिलौने महिलाओं और पुरुषों के लिए कपड़े स्लीपर दोना पत्तल के साथ-साथ अलग-अलग चीज महिलाएं और पुरुष उद्यमी तैयार कर रहे हैं जिन्हें प्रति महीने एक समूह में 30 से 40 हजार  का मुनाफा हो रहा है. और उन्हें सफल होने का मौका भी मिला है इसके साथ ही स्वयं सहायता समूह के जरिए भी उनकी किस्मत बदल रही है और उन्हें एक पहचान समूह के जरिए मिली है.

अमेठीः बड़े शहरों में तो रोजगार के तमाम अवसर होते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र और छोटे इलाकों में रोजगार के अवसर कम होते हैं यहां हम मेहनत जितनी करते हैं उसके बदले उतना परिणाम हमें बेहतर नहीं मिलता लेकिन अमेठी जिले के अलग-अलग स्थान पर मौजूद कुछ ऐसे हुनरबाज उद्यमी है. जिन्होंने अपनी पहचान एक बेहतर विकल्प के साथ साबित किया कोई मछली पालन के जरिए कोई मुर्गी पालन के जरिए कोई पशुपालन के जरिए तो कोई अपने खुद के उद्योग जिसमें सब्जी उद्योग कपड़ा उद्योग सिलाई कढ़ाई उद्योग खिलौना उद्योग के जरिए लाखों रुपए की कमाई कर रहा है ऐसे में उद्यमियों की कहानी काफी दिलचस्प है.

स्वयं सहायता समूह में बदली किस्मत

अमेठी में स्वयं सहायता समूह के जरिए लोगों को रोजगार का मौका मिल रहा है स्वयं सहायता समूह के जरिए तरह-तरह के प्रोडक्ट तैयार होते हैं जिसमें अचार मुरब्बा चिप्स पापड़ के साथ-साथ खिलौने महिलाओं और पुरुषों के लिए कपड़े स्लीपर दोना पत्तल के साथ-साथ अलग-अलग चीज महिलाएं और पुरुष उद्यमी तैयार कर रहे हैं जिन्हें प्रति महीने एक समूह में 30 से 40 हजार  का मुनाफा हो रहा है. और उन्हें सफल होने का मौका भी मिला है इसके साथ ही स्वयं सहायता समूह के जरिए भी उनकी किस्मत बदल रही है और उन्हें एक पहचान समूह के जरिए मिली है.

लोकल 18 ने ऐसे उद्यमियों से बातचीत की उद्यमी आराधना सिंह ने कहा कि स्वयं सहायता समूह के जरिए उन्होंने पहले समूह में जोड़कर अपने समूह का काम किया फिर कुछ दिन बाद उन्होंने अपने सेट बिजनेस की शुरुआत की और आज वह पूरे भारत में इसकी सप्लाई करती हैं इसके साथ ही उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह के जरिए तरह-तरह का काम मिलता है महिलाओं को पहचान मिलती है और बेरोजगारों को रोजगार का मौका मिलता है.

खिलौना बनाने से शुरू किया काम

वही अमेठी जिले के मुसाफिरखाना तहसील की साइना बानो भी बताती है कि उन्होंने स्वयं सहायता समूह में जोड़कर खिलौने बनाने का काम शुरू किया और आज इस स्वयं सहायता समूह से उनकी पहचान बनी है उन्होंने कहा कि 50% तक का अनुदान समूह में मिलता है. जिसके जरिए आर्थिक समस्या भी नहीं होती और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है. वही इस पूरी पहल को लेकर रोजगार उपयुक्त राष्ट्रीय आजीविका मिशन प्रवीणा शुक्ला बताती हैं कि अलग-अलग तरीके से समूह की महिलाओं को बेरोजगारों को उद्यमियों को रोजगार से जोड़ा जा रहा है मकसद मात्र इतना है कि कोई भी बेरोजगार जागरूकता के अभाव में बेरोजगार ना रहे बल्कि उसे जागरुक कर उसे किसी ना किसी रोजगार से जोड़ा जाए ताकि उसकी आमदनी बेहतर हो और वह आत्मनिर्भर हो सके.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …

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