फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ की आइकॉनिक ‘मिस ब्रिगेंजा’ यानी अर्चना पूरन सिंह ने अपनी इमेज को लेकर बड़ा बयान दिया है. अर्चना ने माना कि यह रोल उनकी सबसे बड़ी जीत भी है और कमी भी, क्योंकि वह 25 सालों में इसे पीछे नहीं छोड़ पाईं. हालांकि, अब वह अपनी नई वेब सीरीज ‘आदर्श बाल विद्यालय’ से इस टैग को तोड़कर एक नए और दमदार अवतार में नजर आने वाली हैं.
हाल ही में आईएएनएस से बातचीत में अर्चना पूरन सिंह ने अपने फिल्मी सफर, मिस ब्रिगेंजा की इमेज और अपने नए प्रोजेक्ट्स पर बात की.
मिस ब्रिगेंजा वाली इमेज से आगे बढ़ने की कोशिश
अर्चना पूरन सिंह ने अपनी नई वेब सीरीज ‘आदर्श बाल विद्यालय’ के जरिए अपनी पुरानी इमेज को तोड़ने की ओर एक कदम बढ़ाया है. उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट में उन्होंने जानबूझकर मिस ब्रिगेंजा वाले अंदाज से बिल्कुल अलग किरदार चुनने की कोशिश की है. अर्चना कहती हैं कि उन्होंने इस सीरीज में जो रोल निभाया है, वह उनके पिछले किरदारों से काफी अलग है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि दर्शक इस नए रूप को भी उतना ही प्यार देंगे. उनका मानना है कि वह खुद तो मिस ब्रिगेंजा के साए से काफी आगे निकल चुकी हैं, अब दर्शकों को भी उन्हें उस पुराने फ्रेम से बाहर निकालकर देखना चाहिए.
मिस ब्रिगेंजा मेरी सबसे बड़ी जीत भी है और कमी भी
अपनी बात को बेहद ईमानदारी से रखते हुए अर्चना ने माना कि मिस ब्रिगेंजा का किरदार उनके करियर की एक ऐसी उपलब्धि है, जो एक ढाल भी बनी और चुनौती भी. वे कहती हैं कि मिस ब्रिगेंजा एक तरफ मेरी बहुत बड़ी जीत है, तो दूसरी तरफ इसे मेरी कमी भी कहा जा सकता है. कमी इसलिए, क्योंकि मैं इतने सालों में ऐसा कोई दूसरा किरदार नहीं कर पाई जो मिस ब्रिगेंजा के खुमार को पीछे छोड़ सके. इसका सीधा मतलब यह है कि जो सबसे बेहतरीन काम होना था, वह 20-25 साल पहले ही हो गया और उसके बाद वैसा कोई बड़ा जादू नहीं चल पाया.
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