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उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक किसान ने मचान विधि अपनाकर एक ही खेत में लौकी, करेला और बोड़ा की खेती शुरू की है. करीब 8 से 10 हजार रुपये की लागत से तैयार इस मॉडल से उन्हें हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आय हो रही है. मचान तकनीक से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और रोगों का खतरा भी कम रहता है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड मुजेहना के एक किसान ने मचान विधि अपनाकर खेती में नई मिसाल पेश की है. किसान एक ही खेत में लौकी, बोड़ा (लोबिया) और करेले की खेती कर रहे हैं. इस तरीके से उन्हें अच्छी पैदावार के साथ बेहतर मुनाफा भी मिल रहा है. आसपास के किसान भी अब इस मॉडल को देखकर प्रेरित हो रहे हैं.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान प्रगतिशील किसान रामू निषाद बताते हैं कि मचान विधि में बांस और तार की मदद से ऊंचा ढांचा तैयार किया जाता है. बेल वाली फसलें इसी मचान पर फैलती हैं. इससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, फलों की गुणवत्ता अच्छी रहती है और बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है. जमीन खाली रहने के कारण खेत की देखभाल और सिंचाई करना भी आसान हो जाता है.
एक खेत में तीन फसल
रामू निषाद बताते हैं कि एक ही खेत में लौकी, बोड़ा और करेला लगाया है. तीनों फसलों की तुड़ाई अलग-अलग समय पर होती रहती है, जिससे बाजार में लगातार उपज बिकती रहती है और आमदनी का सिलसिला बना रहता है. स्थानीय मंडियों के साथ-साथ आसपास के बाजारों में भी इन सब्जियों की अच्छी मांग रहती है. उन्होंने बताया कि लौकी की फसल खत्म होने वाली है जब तक करेले में फल आना शुरू हो जाएगा और साथ ही साथ बोड़ा में भी फूल आना शुरू हो गया है.
रामू निषाद बताते हैं कि उनको मचान विधि से खेती का आईडिया पानी संस्थान से मिला है पहले वह पारंपरिक तरीके से खेती करते थे जिसमें लगत वही होता था और मुनाफा कम होता था और बरसात के मौसम में सब्जी खराब होने की संभावना अधिक रही थी और जब से मचान विधि से कर रहे हैं जब से फल काम खराब होती है रोग कम लगते हैं और उत्पादन अच्छा हो रहा है.
रामू निषाद का कहना है कि शुरुआत में मचान तैयार करने में कुछ खर्च जरूर आता है, लेकिन यह कई वर्षों तक उपयोग में आ जाता है. अच्छी देखभाल, समय पर सिंचाई और संतुलित खाद के प्रयोग से फसल की पैदावार बढ़ती है. यही कारण है कि उनकी सालाना आय लाखों रुपये तक पहुंच रही है. उन्होंने बताया कि वह लगभग एक से डेढ़ बीघा में मचान विधि से खेती कर रहे हैं. भविष्य में उसको और आगे बढ़ाना है.
लागत और कमाई
रामू निषाद बताते हैं कि एक से डेढ़ बीघा में लगभग 8 से 10 हजार रुपए का खर्च आया है और हर महीने लगभग 30 हजार रुपए का इनकम हो रहा है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…
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