मप्र के छतरपुर जिले में हर साल सांपों के काटने से ही इंसानों की मौत हो जाती हैं. 100 में 5 ही ऐसे जहरीले सांप होते हैं जिनके काटने से मौत हो जाती हैं. बारिश के मौसम छतरपुर जिले में कौन-कौन से जहरीले सांप निकलते हैं? आइए जानते हैं एक्सपर्ट से
छतरपुर जिले में 1400 सांप पकड़ने वाले सर्प मित्र आकाश सिंह राठौर लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि जिले में वैसे तो 100 तरह के सांप देखने को मिलते हैं. लेकिन इन 100 सांपों में से 5 प्रजाति के सांप ही खतरनाक होते हैं. अगर समय से इलाज न मिला तो इनके काटने से इंसानों की मौत हो जाती हैं.
ये हैं जहरीले सांप
सर्प मित्र आकाश बताते हैं कि छतरपुर जिले में कोबरा (जिसे क्षेत्रीय भाषा में काला नाग या काली नागिन कहते हैं), रसेल वाइपर, कॉमन करैत, रेड स्नैक (धमना) पाए जाते हैं जो बहुत जहरीले और ख़तरनाक होते हैं. कि़ग कोबरा भी बहुत खतरनाक होता है लेकिन छतरपुर जिले में रेयर ही देखने को मिलता है.
कोबरा सांप भी पकड़ चुके
आकाश बताते हैं कि उन्होंने छतरपुर में कोबरा या काला नाग, रसेल वाइपर, रेड स्नेक(धमना) और वॉटर स्नेक सांप पकड़ चुके हैं. सबसे ज्यादा धमना और पानी का सांप सबसे ज्यादा निकलते हैं. धमना सांप वाटर स्नेक से खतरनाक होता है. वहीं वॉटर स्नेक बिना जहर वाला सांप होता है.
सांप निकलने पर करें ये काम
आकाश बताते हैं कि जब भी आपके यहां सांप निकलता है तो सबसे पहले 112 कॉल करना है या फिर वन विभाग से संपर्क करना है. जब कोई न आए तो आप मुझे बुला लीजिए. सांप को देखकर घबराना नहीं है. आकाश बताते हैं कि अगर किसी इंसान को सांप बाईट कर देता है तो सीधे जिला अस्पताल जाना हैं. एंटी वेनम का इंजेक्शन लगवाना है. झाड़-फूंक और अंधविश्वास में नहीं पड़ना है.
काटने पर शरीर में दांतों की पहचान करें
आकाश बताते हैं कि जब जहरीला सांप काटता है तो वह 2 डोट के निशान छोड़ता है. वहीं जो सांप जहरीला नहीं होता है वह मुंह के शेप में कई डोट छोड़ता है. अगर 2 डोट आए हैं तो समझ लीजिए कि जहरीले सांप ने काटा है. ऐसी स्थिति में तुरंत जिला अस्पताल जाना चाहिए.
सांपों के पसंदीदा भोजन
आकाश बताते हैं कि बारिश के मौसम सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर भोजन की तलाश में घरों में निकलते हैं. घरों में रहने वाले चूहे, मेंढ़क और छिपकली को खाने के लिए सांप आते हैं. सभी सांपों का यही फेवरेट भोजन होता है.
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