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सुल्तानपुर के आनंद कुमार त्रिपाठी द्वारा संपादित पंडित रामनरेश त्रिपाठी ग्रंथावली खंड एक के काव्य संकलन में पंडित रामनरेश त्रिपाठी के दोहों का वर्णन किया गया है उसी में एक दोहा यह भी लिखा गया है कि- सुल्तानपुर में सुख चहै तो काम संभाले तीन। चुगली, निंदा और खुशामद कहे देवकलीदीन।। उनके दोहे का वर्णन करते हुए पंडित रामनरेश त्रिपाठी के पुत्र जयंत त्रिपाठी कहते हैं कि पंडित रामनरेश त्रिपाठी बहुत ही दूरदर्शी और उच्च विचारों वाले थे. उन्होंने सुल्तानपुर में ऐसे लोगों पर व्यंग्य कसा जो किसी की निंदा, चुगली और खुशामद को अपनी दिनचर्या मानते हैं.

सुल्तानपुरः उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला ना सिर्फ ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जिला है, बल्कि साहित्य सृजन के मामले में भी सुल्तानपुर ने कई ऐसे साहित्यकारों को निर्मित किया जिनकी रचनाएं आज किसी सीमा में ना बंधकर बल्कि वह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हुई. उसी में एक थे पंडित रामनरेश त्रिपाठी जिनका पथिक, मिलन और अन्य कई ऐसी रचनाएं जिन्होंने देश की स्वतंत्रता संग्राम में युवाओं में जोश भरने का काम किया उन्होंने ही सुल्तानपुर जिले के बारे में तरकश के तीर में कुछ दोहों का वर्णन किया है जिसमें वह व्यंग्य करते हुए सुल्तानपुर के ऊपर उपरोक्त दोहा लिखते हैं.

लिखा है यह दोहा

सुल्तानपुर के आनंद कुमार त्रिपाठी द्वारा संपादित पंडित रामनरेश त्रिपाठी ग्रंथावली खंड एक के काव्य संकलन में पंडित रामनरेश त्रिपाठी के दोहों का वर्णन किया गया है उसी में एक दोहा यह भी लिखा गया है कि- सुल्तानपुर में सुख चहै तो काम संभाले तीन। चुगली, निंदा और खुशामद कहे देवकलीदीन।।

उनके दोहे का वर्णन करते हुए पंडित रामनरेश त्रिपाठी के पुत्र जयंत त्रिपाठी कहते हैं कि पंडित रामनरेश त्रिपाठी बहुत ही दूरदर्शी और उच्च विचारों वाले थे. उन्होंने सुल्तानपुर में ऐसे लोगों पर व्यंग्य कसा जो किसी की निंदा, चुगली और खुशामद को अपनी दिनचर्या मानते हैं. उसी तर्ज पर उन्होंने साधारण और ईमानदार लोगों को सतर्क करते हुए कहा कि अगर आपको सुल्तानपुर में सुख चाहिए तो तीन काम में संभालने की क्षमता होनी चाहिए उन्होंने व्यंग्य करते हुए तीन काम बताया की चुगली, खुशामद और निंदा यह तीन काम आपको सुख की तरफ ले जाएंगे हालांकि उनका यह व्यंग्य था लेकिन आज पूरे सुल्तानपुर में लोगों की जुबान पर रहता है.

आसपास के लोग करते हैं इस्तेमाल

यह दोहा सिर्फ सुल्तानपुर तक ही नहीं प्रसिद्ध हुआ बल्कि आसपास के जिलों में भी लोग इस दोहे को सुल्तानपुर के लिए इस्तेमाल करते हैं. पंडित राम नरेश त्रिपाठी द्वारा लिखा गया यह दोहा सिर्फ सुल्तानपुर तक ही नहीं प्रसिद्ध हुआ बल्कि जौनपुर, अमेठी अयोध्या रायबरेली अंबेडकर नगर और अन्य कई जिलों में लोगों की जुबान पर बैठ गया. यानी कि सुल्तानपुर की पहचान अपने कई पौराणिक और ऐतिहासिक स्थलों को जानने के साथ-साथ सतर्क रहने के लिए भी बन गई और या दोहा आज के समय में सुल्तानपुर के हर बच्चे और युवाओं की जुबान पर भी रटा हुआ है.

सतर्क करना था उद्देश्य

जयंत त्रिपाठी आगे कहते हैं कि उनके इस दोहे का उद्देश्य इतना मात्र था कि वह ऐसे लोगों से सावधान रहें जो हमेशा चुगली निंदा और खुशामद को ही अपना पेशा मानते हैं. ऐसे में उन्होंने सुल्तानपुर के उन लोगों की आलोचना की जो लोग अपने अंदर बेईमानी झूठ फरेब जैसी नियत रखते हैं. यह दोहा सुल्तानपुर के लोगों के साथ-साथ अन्य कई बड़ी हस्तियों द्वारा भी बीच-बीच में दोहराया जाता रहा है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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