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Agriculture Tips: मानसून की पहली बारिश उन किसानों के लिए सुनहरा मौका लेकर आई है, जिनके पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं. ऐसी स्थिति में मूंग की खेती कम लागत, कम पानी और कम समय में अच्छी कमाई का विकल्प बन सकती है. महज 60 से 70 दिनों में तैयार होने वाली इस फसल पर एक एकड़ में 10 से 12 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि बेहतर पैदावार मिलने पर किसान 40 से 50 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं. जानिए मूंग की उन्नत किस्में, सही बुवाई का तरीका और ज्यादा उत्पादन के आसान उपाय.

शाहजहांपुर: मानसून की पहली बारिश आते ही उन किसानों के चेहरे खिल उठे हैं, जिनके पास सिंचाई के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. ऐसे किसान कम समय और नाममात्र की लागत में तैयार होने वाली मूंग की खेती करके तगड़ी कमाई कर सकते हैं. मूंग एक ऐसी नकदी फसल है जो महज 60 से 70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. केवल 10 से 12 हजार रुपये प्रति एकड़ की मामूली लागत लगाकर किसान इससे 40 से 50 हजार रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं. बाजार में दालों की बढ़ती मांग के कारण यह खेती घाटे का सौदा बिल्कुल नहीं है.

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि मानसून के समय मूंग की खेती वर्षा आधारित क्षेत्रों के किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि मूंग की फसल के लिए जलभराव हानिकारक होता है, इसलिए इसे कम पानी में आसानी से उगाया जा सकता है. अगर किसान उन्नत किस्मों का चयन करें और बुवाई से पहले बीज उपचार जरूर करें, तो पैदावार बेहतरीन होगी. यह फसल न सिर्फ कम लागत में बंपर कमाई देती है, बल्कि इसकी जड़ें मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाती हैं.

उन्नत किस्में और बुवाई का सही तरीका
मूंग की सफल खेती के लिए सही किस्म का चुनाव करना बेहद जरूरी है. मानसून के लिए ‘पंत मूंग 5’, ‘पूसा विशाल’ या ‘मेहा’ जैसी किस्में सबसे उपयुक्त हैं, जो कम दिनों में तैयार होती हैं. बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम थीरम या कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें. इसके बाद राइजोबियम कल्चर से भी उपचारित करें ताकि पौधों का विकास अच्छा हो. लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए.

कम सिंचाई और जल निकासी का प्रबंधन
जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन नहीं हैं, उनके लिए मानसून की बारिश ही काफी है. मूंग को बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है, लेकिन खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए. भारी बारिश के दौरान खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, अन्यथा फसल गल सकती है. बुवाई के बाद अगर लंबे समय तक सूखा पड़े, तभी सिंचाई की जरूरत होती है, जो मानसून के मौसम में आमतौर पर प्राकृतिक रूप से पूरी हो जाती है.

खाद, उर्वरक और खरपतवार नियंत्रण
कम लागत में ज्यादा उत्पादन के लिए सही मात्रा में खाद देना जरूरी है. बुवाई के समय प्रति एकड़ लगभग 8-10 किलोग्राम नाइट्रोजन और 16-20 किलोग्राम फास्फोरस की जरूरत होती है. मूंग की फसल में शुरुआती 20 से 30 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के 20 दिन बाद और दूसरी 35 दिन बाद करें. रासायनिक नियंत्रण के लिए खरपतवार नाशक पेंडीमेथालिन का छिड़काव सही समय पर करें.

लागत, कमाई और शुद्ध मुनाफे का गणित
मूंग की खेती का सबसे आकर्षक पहलू इसका आर्थिक गणित है. एक एकड़ में बीज, खाद, जुताई और दवाइयों को मिलाकर कुल लागत करीब 10 से 12 हजार रुपये आती है. बेहतर देखभाल करने से एक एकड़ से लगभग 5 से 7 क्विंटल मूंग की पैदावार आसानी से मिल जाती है. वर्तमान बाजार भाव के हिसाब से यह फसल 50 से 60 हजार रुपये में बिकती है. इस प्रकार किसान महज दो महीनों में 40,000 रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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