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-पसोंडा की सरकारी जलाशय भूमि पर खड़ी मिली बहुमंजिला इमारत, महापौर सुनीता दयाल ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
-रिटायर्ड अधिकारी के नाम से फर्जी रिपोर्ट लगाकर कराया गया नक्शा पास, जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा
-नगर निगम, जीडीए और तहसील की होगी संयुक्त कार्रवाई, नापजोख के बाद अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच गाजियाबाद में एक बड़ा मामला सामने आया है। शालीमार गार्डन मेन स्थित पसोंडा क्षेत्र की झील (जलाशय) की सरकारी भूमि पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बहुमंजिला इमारत और पार्किंग का निर्माण कर दिया गया। मामले की जानकारी मिलने पर गुरुवार को महापौर सुनीता दयाल अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और पूरे प्रकरण की जांच कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। महापौर ने स्पष्ट कहा कि सरकारी जलाशय की भूमि को हर हाल में कब्जामुक्त कराया जाएगा तथा अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए गाजियाबाद नगर निगम, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) और तहसील प्रशासन संयुक्त रूप से अभियान चलाएंगे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि पसोंडा, शालीमार गार्डन मेन स्थित खसरा संख्या 1563/1, 1563, 1564 एवं संबंधित अभिलेखों में दर्ज भूमि राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार झील (जलाशय) की श्रेणी में आती है तथा इस पर नगर निगम का स्वामित्व दर्ज है। इसके बावजूद इस बहुमूल्य सरकारी भूमि पर बहुमंजिला फ्लैट और पार्किंग का निर्माण कर दिया गया।

महापौर ने नागरिकों से अपील की कि वे इस क्षेत्र में संबंधित खसरा संख्या वाले किसी भी प्लॉट या फ्लैट की खरीद-फरोख्त से पहले पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें, ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी का शिकार न हों। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी अभिलेखों में झील के रूप में दर्ज भूमि पर निर्माण कराने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया। आरोप है कि रिटायर्ड राजस्व अधिकारी के नाम से फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और रिपोर्ट तैयार कर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में प्रस्तुत की गई, जिसके आधार पर नक्शा स्वीकृत कराया गया। मौके पर मौजूद संबंधित सेवानिवृत्त अधिकारी ने भी अपने नाम से जारी रिपोर्ट को देखकर आश्चर्य जताया और कहा कि जिस तिथि की रिपोर्ट दिखाई जा रही है, उस समय वह पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके थे। ऐसे में उनके नाम से रिपोर्ट जारी होना गंभीर अनियमितता और फर्जीवाड़े की ओर संकेत करता है।

महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि शहर की सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों की रक्षा नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव ने बताया कि नगर निगम, जीडीए और तहसील प्रशासन की संयुक्त टीम गठित की जा रही है। निर्धारित तिथि पर भूमि की दोबारा पैमाइश कराई जाएगी और राजस्व अभिलेखों का मिलान करने के बाद अवैध कब्जों को हटाते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई विधिक प्रक्रिया के तहत पारदर्शी तरीके से की जाएगी। निरीक्षण के दौरान संपत्ति अधीक्षक राम शंकर वर्मा, जीडीए के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार, राजस्व अधीक्षक ओमपाल, सुरेंद्र कौशिक, लेखपाल मनोज कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण कर उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड का अवलोकन किया तथा आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी। महापौर ने कहा कि नगर निगम नागरिकों से भी अपील करता है कि किसी भी भूखंड या फ्लैट की खरीद से पहले उसकी राजस्व स्थिति, स्वामित्व और स्वीकृत अभिलेखों की जांच अवश्य करें। सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में खरीदारों के लिए भी गंभीर आर्थिक और कानूनी संकट का कारण बन सकता है। उन्होंने दोहराया कि सरकारी संपत्ति पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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