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CII on Property Tax : इनकम टैक्स विभाग ने प्रॉपर्टी पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की गणना करने और उस पर इंडेक्सेशन के तहत छूट दिलाने के लिए चालू वित्तवर्ष का महंगाई सूचकांक जारी कर दिया है. प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वालों से लेकर अन्य एसेट से लाभ कमाने वालों को भी इससे टैक्स बचाने का मौका मिलेगा.

प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वालों के लिए जरूरी खबर, जानें कैसे बचेगा पूरा टैक्स Zoom

प्रॉपर्टी या एसेट बेचने वाले को कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स का फायदा होता है.

नई दिल्ली. प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने वालों के लिए इनकम टैक्स विभाग की ओर से बड़ी खबर आई है. इस तरह के लेनदेन पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स के कैलकुलेशन के लिए सबसे जरूरी फैक्टर कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (सीआईआई) को निर्धारित कर दिया है. इसी सीआईआई के आधार पर संपत्ति या फिर अन्य चीजों की खरीद-बिक्री पर होने वाले लाभ पर टैक्स लगाया जाता है. सीआईआई क्यों जरूरी है और यह कैसे काम करता है, इसकी जानकारी होना बेहद जरूरी है.

आयकर विभाग ने अचल संपत्ति, सिक्योरिटीज और ज्वैलरी की बिक्री पर होने वाले लॉन्ग टर्म पूंजीगत लाभ की गणना के लिए चालू वित्तवर्ष का लागत महंगाई सूचकांक (सीआईआई) बढ़ा दिया है. टैक्सपेयर्स पूंजीगत परिसंपत्तियों की बिक्री से होने वाले लाभ की गणना महंगाई के प्रभाव के समायोजन के बाद करने के लिए लागत महंगाई सूचकांक (सीआईआई) का उपयोग करते हैं. इसके जरिये कैपिटल गेन टैक्स को कम किया जा सकता है.

चालू वित्तवर्ष के लिए कितना है सीआईआई
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की अधिसूचना के अनुसार, वित्तवर्ष 2026-27 के लिए लागत महंगाई सूचकांक 384 निर्धारित किया गया है. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह सूचकांक 376 था. एएमआरजी ग्लोबल के मैनेजमेंट पार्टनर रजत मोहन ने बताया कि लागत महंगाई सूचकांक की सालाना रिपोर्ट बताती है कि नई टैक्स व्यवस्था के तहत जहां भी इंडेक्सेशन का लाभ जारी है, वहां सरकार महंगाई समायोजन की निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

टैक्सपेयर्स को इससे क्या होगा फायदा
उन्होंने कहा कि इससे करदाताओं, मूल्यांकनकर्ताओं और टैक्स विशेषज्ञों को सूचीकृत लागत की गणना में स्पष्टता मिलती है और व्याख्या से जुड़े विवाद कम होते हैं. लागत महंगाई सूचकांक (सीआईआई) की अधिसूचना आयकर अधिनियम, 1961 के तहत हर साल जारी की जाती है. इसका उपयोग किसी पूंजीगत परिसंपत्ति की बिक्री पर पूंजीगत लाभ की गणना करते समय इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन निर्धारित करने के लिए किया जाता है.

कैसे तय होगा कैपिटल गेन टैक्स
आमतौर पर किसी एसेट को ‘दीर्घकालिक पूंजीगत एसेट’ की श्रेणी में आने के लिए 36 महीने से अधिक समय तक रखा जाना आवश्यक होता है. हालांकि, अचल संपत्ति एवं गैर-सूचीबद्ध शेयर के लिए यह अवधि 24 महीने और सूचीबद्ध सिक्योरिटीज के लिए 12 महीने है. वस्तुओं की कीमतें चूंकि समय के साथ बढ़ती हैं और मुद्रा की खरीद शक्ति घटती है. लिहाजा सीआईआई का उपयोग परिसंपत्तियों के मुद्रास्फीति-समायोजित खरीद मूल्य का निर्धारण करने के लिए किया जाता है, ताकि कर योग्य दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) की सही गणना की जा सके.

कैसे मिलता है इंडेक्सेशन का लाभ
मान लीजिए आपने कोई प्रॉपर्टी साल 2010 में 50 लाख रुपये में खरीदी और उसे 2026 में 1 करोड़ रुपये में बेचा. सीधे तौर पर देखा जाए तो आपको 50 लाख रुपये का फायदा दिख रहा है, लेकिन इनकम टैक्स विभाग इस पर आपको महंगाई का लाभ देता है. इसी महंगाई की गणना करने के लिए सीआईआई जारी किया जाता है. इस खरीद-बिक्री में हुए मुनाफे पर टैक्स की गणना सीआईआई के जरिये ही की जाएगी. साल 2010 का सीआईआई 167 था, जबकि चालू वित्तवर्ष का सीआईआई 384 रखा गया है. इस तरह, इंडेक्सेशन लगाकर प्रॉपर्टी की वैल्यू 1.26 करोड़ होनी चाहिए, जबकि इसे 1 करोड़ में ही बेचा गया तो इस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स शून्य हो जाएगा.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

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