ग्रामीण इलाकों में भुट्टा देशी तरीके से भूना जाता है. इसे लकड़ी, उपले और कोयले की धीमी आंच पर तैयार किया जाता है. आग पर भुट्टे को बार-बार घुमाते हुए तब तक सेंका जाता है जब तक उसके दाने हल्के काले और सुनहरे न हो जाएं. इसके बाद उस पर नींबू का रस लगाएं नमक, काला नमक और हल्का लाल मिर्च पाउडर स्वाद बढ़ा देता है. यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है.
जैसे ही बरसात का मौसम आता है वैसे ही बाजारों और खेतों में ताजे मक्,के के भुट्टे दिखाई देने लगते हैं. गांवों में तो लोग सीधे खेत से ताजा भुट्टा तोड़कर उसका आनंद लेते हैं. मिट्टी की सोंधी खुशबू और हल्की बारिश के बीच भुना हुआ भुट्टा खाने का एक अलग ही आनंद रहता है. भुट्टा न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि पौष्टिक भी होता है.
ग्रामीण राकेश कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में भुट्टा देशी तरीके से भूना जाता है. इसे लकड़ी, उपले और कोयले की धीमी आंच पर भुना जाता है. आप भी अगर भूनना चाहते हैं तो भुट्टे को बार-बार घुमाते हुए तब तक सेंकते रहें और तब तक सेकें जब तक उसके दाने हल्के काले और सुनहरे न हो जाएं. इसके बाद उस पर नींबू का रस लगाएं नमक, काला नमक और हल्का लाल मिर्च पाउडर स्वाद बढ़ा देता है.
जब भी आप भुट्टा खाना चाह रहे हैं तो आपको ऐसे भुट्टे को खाना चाहिए जो गर्म रहे. जब आप इसमें नींबू, काला नमक और हल्की लाल मिर्च लगते हैं तो इसका स्वाद और अधिक बढ़ जाता है. ग्रामीण इलाके में लोग इसे बिना किसी मसाले के भी खाना पसंद करते हैं ताकि मक्के का असली स्वाद बना रहे. जब इसको आप खाएं तो धीरे-धीरे और चबाकर खाएं इससे आपके भुट्टे का असली और देसी स्वाद मिलता रहेगा.
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भुट्टे में भरपूर मात्रा में रेशा यानी फाइबर पाये जाने की वजह से हमारी पाचन क्रिया बेहतर बनी रहती है. अगर आपको कब्ज की समस्या है तो आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए. यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती है. लेकिन इसका उपयोग संतुलित तरीके से करना चाहिए.
मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव कहते हैं कि मक्के का भुट्टा फाइबर, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर हमारे पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और लंबे समय तक इससे पेट भरा होने का एहसास होता है. भुट्टे में ऊर्जा देने वाले कार्बोहाइड्रेट भी पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं.
सुल्तानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने के समय किसान ताजा भुट्टा तोड़कर वहीं आग जलाकर भून लेते हैं. परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर इसका आनंद लेते हैं. बारिश के मौसम में यह भूट्टा गांवों की संस्कृति को और अधिक बेहतर बना देता है.
भुट्टा खरीदते समय हमेशा हरे छिलके वाला, ताजा और दानों से पूरी तरह भरा हुआ भुट्टा खरीदना चाहिए. ऐसे भुट्टे का चयन करें जिसके दाने मुलायम और चमकदार हों. सूखे और सिकुड़े हुए दानों वाले भुट्टे स्वाद में अच्छे नहीं होता है. अगर भुट्टा खेत से सीधे मिल जाए तो उसका स्वाद और भी बेहतर होता है.
एक ऐसा पारंपरिक मौसमी भोजन है, जो स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन मेल माना जाता है. यह देशी तरीके से भुना हुआ भुट्टा आज भी आधुनिक फास्ट फूड के मुकाबले अधिक प्राकृतिक और पौष्टिक विकल्प माना जाता है. इसलिए बारिश के मौसम में ताजा भुट्टे का संतुलित मात्रा में सेवन जरूर करना चाहिए और इसके देसी स्वाद का आनंद उठाना चाहिए.
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