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फरीदाबाद: पहले यह जगह लोगों की नजर में किसी काम की नहीं थी. चारों तरफ गड्ढे थे. नालियों का गंदा पानी भरा रहता था. कंपनी की राख गिरती थी. लोग बताते हैं कि यहां कदम रखना भी मुश्किल था. लेकिन जिन गरीब परिवारों के पास सिर छुपाने की कोई जगह नहीं थी उन्होंने इसी बदहाल जमीन को अपना सहारा बना लिया. किसी ने नालियों के पानी के बीच झुग्गी खड़ी की. किसी ने सिर पर ईंट और मिट्टी ढोकर जमीन को समतल किया. किसी ने मजदूरी के बाद बचाए हुए पैसों से एक-एक ईंट जोड़कर छोटी सी छत बनाई. आज वही लोग कहते हैं कि हमने अपने खून-पसीने से इस नरक जैसी जगह को रहने लायक बनाया.

तिनका-तिनका जोड़कर बनाया आशियाना

अब जब यह जगह बस गई, गलियां बन गईं, बच्चे बड़े हो गए और घर खड़े हो गए तब सरकार हमें उजाड़ने आ गई. गरीब की पूरी जिंदगी की कमाई दांव पर लग गई है. नोटिस मिलने के बाद हर घर में सन्नाटा पसरा है. किसी की आंखों में आंसू हैं तो किसी के चेहरे पर भविष्य की चिंता साफ दिखाई दे रही है. लोग कहते हैं कि अब अगर यह छत भी चली गई तो सिर छुपाने के लिए कहीं जगह नहीं बचेगी. जैसे तिनका-तिनका जोड़कर बनाया आशियाना पल भर में बिखरने वाला हो वैसे ही शिव नगर और मुजेसर के सैकड़ों परिवार इन दिनों डर और बेबसी के बीच दिन काट रहे हैं.

अब 600 से 700 परिवारों पर बेघर होने का संकट

फरीदाबाद के सेक्टर-22 स्थित शिव नगर और मुजेसर इलाके में सीपीडब्ल्यूडी की जमीन पर बने मकानों को खाली करने के नोटिस के बाद करीब 600 से 700 परिवारों की चिंता बढ़ गई है. लोगों के हाथों में बीपीएल कार्ड हैं, लेकिन आंखों में सिर्फ एक सवाल है कि आखिर अब जाएं तो कहां जाएं. कोई बिहार से आकर यहां बसा, कोई उत्तर प्रदेश से. किसी ने मजदूरी की… किसी ने सफाई का काम किया, किसी ने लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा कर बच्चों का पेट पाला. सालों की मेहनत से जो छोटा सा मकान बनाया था… अब उसके टूटने का डर हर परिवार को सता रहा है.

सीपीडब्ल्यूडी की जमीन पर कार्रवाई की तैयारी

केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के अभियंता सुरेश कुमार के मुताबिक मुजेसर, सारन और सेक्टर-22 में गर्वमेंट प्रेस की करीब 6 एकड़ जमीन है. करीब 25 साल पहले गर्वमेंट प्रेस बंद होने के बाद यह जमीन सीपीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर हो गई थी. विभाग का कहना है कि जमीन पर अवैध कब्जा है. पहले भी नोटिस दिए गए थे और मामला कोर्ट तक पहुंचा था. अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है. एसडीएम त्रिलोकचंद बताते हैं कि नियम के अनुसार लोगों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं और 26 जुलाई के बाद तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की जाएगी. लोगों से तय समय में जगह खाली करने की अपील की गई है.

65 वर्षीय सरोज बोलीं अब इस उम्र में कहां जाएं

शिव नगर की बुजुर्ग निवासी सरोज बताती हैं कि मैं 65 साल की हूं और करीब 30 साल से यहां रह रही हूं. प्रशासन वाले नोटिस देकर गए हैं. उसमें लिखा है कि 26 जुलाई तक मकान खाली कर दो. उसके बाद अगर कोई सामान टूटता है तो उसकी जिम्मेदारी हमारी होगी. मैं हाथ में बीपीएल कार्ड लेकर खड़ी हूं. सरकार कहती है कि गरीबों की मदद करती है लेकिन आज हमें ही उजाड़ा जा रहा है. अब इस उम्र में कहां जाएंगे… यही समझ नहीं आ रहा.

30 गज जमीन खरीदकर मजदूरी से बनाया आशियाना

स्थानीय निवासी लीलावती बताती हैं कि मैं 25 साल से यहां रह रही हूं. उस समय 15 हजार रुपये देकर करीब 30 गज जमीन ली थी. फिर धीरे-धीरे ढाई लाख रुपये लगाकर मकान बनाया. यह पूरा इलाका करीब 20 फीट गहरा गड्ढा था. यहां कंपनी की राख गिरती थी. बिजली नहीं थी… पानी नहीं था. कंपनी से पानी लाकर गुजारा करते थे. कई लोगों ने तो नालियों के पानी के बीच झुग्गियां खड़ी की थीं. हम मजदूरी करके एक-एक पैसा जोड़ते गए और जैसे पैसे होते गए…वैसे-वैसे मकान बनाते गए. आज जब हमने इस जगह को रहने लायक बना दिया…तब सरकार कह रही है कि यहां से निकल जाओ. जब यह जगह नरक थी तब कोई नहीं आया. अब जब यह स्वर्ग जैसी बन गई तो हमें हटाया जा रहा है. मेरे बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं. कोई मजदूर है, कोई सफाई कर्मचारी है… कोई कोठियों में झाड़ू-पोछा करता है. हम गरीब आखिर जाएं तो कहां जाएं.

पति नहीं रहे अब बेटी के साथ कहां जाएंगी राजकुमारी

स्थानीय निवासी राजकुमारी बताती हैं कि मैं 56 साल की हूं और 25 साल से यहां रह रही हूं. उस समय 20 हजार रुपये में 30 गज जमीन ली थी. किसी तरह चार से पांच लाख रुपये जोड़कर मकान बनाया. मेरे पति अब इस दुनिया में नहीं हैं. यहां सिर्फ मैं और मेरी बेटी रहते हैं. नोटिस मिलने के बाद रातों की नींद उड़ गई है. समझ नहीं आ रहा कि अगर मकान टूट गया तो हम दोनों कहां जाएंगे.

छत टूटने का डर हर परिवार को अंदर से तोड़ रहा है

स्थानीय निवासी मलखान सिंह बताते हैं कि मुझे यहां रहते हुए करीब 26 साल हो गए हैं. मेरी उम्र अब 60 साल हो गई है. पहले 15 हजार रुपये में करीब 35 गज जमीन ली थी. फिर चार से पांच लाख रुपये खर्च करके मकान बनाया. यहां करीब 700 मकान हैं. हर परिवार ने मजदूरी करके अपना घर बनाया है. किसी ने चोरी नहीं की…किसी ने गलत काम नहीं किया. बस मेहनत की और अपने बच्चों के लिए एक छत खड़ी की. अब वही छत टूटने का डर हर परिवार को अंदर से तोड़ रहा है.

लोगों में बढ़ी बेचैनी

फिलहाल, 26 जुलाई की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है शिव नगर और मुजेसर के लोगों की बेचैनी भी बढ़ती जा रही है. हर घर में यही चर्चा है कि अगर बुलडोजर आया तो सिर छुपाने के लिए जगह कहां मिलेगी. जिन हाथों ने कभी नालियों के पानी के बीच झुग्गी खड़ी की थी और सालों की मेहनत से उसे पक्के मकान में बदला, आज वही हाथ अपने आशियाने को बचाने की गुहार लगा रहे हैं. उनके लिए यह सिर्फ ईंट और सीमेंट का मकान नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी की कमाई, संघर्ष और बच्चों के भविष्य का सहारा है.

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