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Chui Mui Plant Health Benefits: खेतों की मेड़ों, बगीचों और खाली पड़ी जमीन पर आसानी से मिलने वाला लाजवंती (छुईमुई) का पौधा अपनी अनोखी खासियत की वजह से तो लोगों का ध्यान खींचता ही है, लेकिन आयुर्वेद में इसके कई औषधीय गुणों का भी उल्लेख मिलता है. पारंपरिक चिकित्सा में इसकी पत्तियों, जड़ों और पूरे पौधे का अलग-अलग तरीकों से उपयोग किया जाता रहा है.

खेतों की मेड़ों, बगीचों और खाली पड़ी जमीन पर अक्सर दिखाई देने वाला लाजवंती (छुईमुई) का पौधा अपनी अनोखी खासियत की वजह से लोगों का ध्यान खींचता है. इसकी पत्तियों को हल्का सा छूते ही वे तुरंत सिकुड़कर बंद हो जाती हैं और कुछ देर बाद फिर से सामान्य हो जाती हैं. यही वजह है कि यह पौधा बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आयुर्वेद में लाजवंती को औषधीय गुणों वाला पौधा भी माना गया है.

लोकल 18 से बातचीत में वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति ने बताया कि लाजवंती का इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता रहा है. आयुर्वेद में इसकी पत्तियों, जड़ों और पूरे पौधे का अलग-अलग तरीकों से उपयोग बताया गया है. हालांकि उन्होंने सलाह दी कि किसी भी बीमारी में इसका इस्तेमाल बिना विशेषज्ञ की सलाह के नहीं करना चाहिए.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार लाजवंती में कई ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जिन्हें आयुर्वेद में शरीर के लिए लाभकारी माना गया है. इसे शीतल, कसैला और घाव भरने वाले गुणों वाला पौधा बताया गया है. इसके अलावा आयुर्वेद में इसके सूजन कम करने और संक्रमण से बचाव में सहायक गुणों का भी उल्लेख मिलता है.

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आयुर्वेद में पुराने समय से लाजवंती की पत्तियों का लेप छोटे-मोटे घावों पर लगाने का उल्लेख मिलता है. माना जाता है कि इससे घाव भरने की प्रक्रिया में मदद मिल सकती है और सूजन भी कम हो सकती है. हालांकि अगर घाव गहरा हो या उसमें संक्रमण हो, तो तुरंत डॉक्टर से इलाज कराना चाहिए.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि पारंपरिक आयुर्वेद में बवासीर से जुड़ी कुछ समस्याओं के लिए भी लाजवंती का उपयोग बताया गया है. इसकी जड़ और पत्तियों से तैयार कुछ आयुर्वेदिक योगों का वर्णन ग्रंथों में मिलता है. हालांकि इसकी मात्रा और सेवन का तरीका केवल विशेषज्ञ की सलाह से ही अपनाना चाहिए.

आयुर्वेद में लाजवंती को कसैले गुणों वाला पौधा माना जाता है. इसी वजह से कुछ पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग दस्त और पेट से जुड़ी कुछ समस्याओं में किया जाता रहा है. हालांकि अगर पेट की समस्या गंभीर हो, तो घरेलू उपचार करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार महिलाओं से जुड़ी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में भी लाजवंती का उपयोग आयुर्वेदिक उपचारों में किया जाता है. कई आयुर्वेदिक औषधियों में इसका मिश्रण भी किया जाता है. हालांकि इसका सेवन हमेशा योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में ही करना चाहिए.

यदि शरीर के किसी हिस्से में हल्की सूजन हो, तो आयुर्वेद में लाजवंती की पत्तियों का लेप लगाने का उल्लेख मिलता है. माना जाता है कि इससे सूजन कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि यदि सूजन ज्यादा हो, दर्द बढ़ रहा हो या चोट गंभीर हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है.

वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि कुछ आयुर्वेदिक उपचारों में लाजवंती का उपयोग त्वचा से जुड़ी समस्याओं के लिए भी किया जाता है. इसकी पत्तियों का लेप त्वचा पर लगाया जाता है. हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है, इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

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