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गेझा गांव में मंगलवार देर शाम नोएडा प्राधिकरण की सीवर सफाई करने लाइन में उतरे सेक्टर-44 निवासी शिवा अंदर ही बेहोश हो गए। काफी देर तक बाहर नहीं निकले पर हड़कंप मच गया। पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम ने उन्हें बाहर निकाला। अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि बिना गैस जांच और सुरक्षा उपकरण के कर्मचारी को सीवर लाइन में उतारा गया था। 

नोएडा प्राधिकरण के जीएम आरपी सिंह ने बताया कि मामले में संबंधित ठेकेदार एम/एस शिवजी कंस्ट्रक्शंस कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही जूनियर इंजीनियर राकेश कुमार की सेवा समाप्त कर दी गई है। मामले में संबंधित प्रबंधक के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि और वरिष्ठ प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

मृतक के परिजनों को नियमानुसार हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। नोएडा सेंट्रल के एडीसीपी स्वतंत्र सिंह ने बताया कि सफाई के दौरान शिवा सीवर के अंदर उतरे थे लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं निकले। सूचना मिलते ही फेज-2 थाना पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

इन सवालों का जवाब कौन देगा

  • जब सीवर की सफाई मशीनों से कराने का दावा किया जाता है तो कर्मचारी को क्यों उतारा गया?
  • बिना सुरक्षा उपकरण और गैस जांच के किसी कर्मचारी को सीवर में उतारने की अनुमति किसने और क्यों दी?
  • हर हादसे के बाद सुरक्षा मानकों का पालन कराने के दावे होते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी इतनी लचर कैसे है?
  • घटनास्थल पर प्रशिक्षित सुपरवाइजर, ऑक्सीजन व्यवस्था और आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम पहले से मौजूद क्यों नहीं था?
  • कर्मचारी को सीवरलाइन से बाहर निकालने में 4 घंटे से ज्यादा समय क्यों लगा?

 चार-पांच लोगों के सीवर में फंसे होने की चर्चा रही

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कर्मचारी को बगैर गैस जांच, पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था और जरूरी सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतारा गया था। जानकारों का कहना है कि ऐसे कार्य प्राथमिकता से मशीनों के माध्यम से कराए जाने चाहिए। घटना के बाद कुछ देर के लिए चार-पांच लोगों के सीवर में फंसे होने की चर्चा रही, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया कि केवल एक ही सफाईकर्मी अंदर था।

रोबोट से सफाई का दावा बेदम

सीवरेज सफाई के लिए रोबोट और अत्याधुनिक मशीनों के इस्तेमाल का दावा करने वाले नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग की व्यवस्थाओं पर मंगलवार को एक और मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अप्रैल 2025 में प्राधिकरण ने घोषणा की थी कि अब सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की सफाई कर्मचारियों के बजाय रोबोट और मशीनों से कराई जाएगी। 

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