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बंद कमरे में जबरदस्ती महिला की छाती दबाना, सलवार उतारने की कोशिश करना रेप की कोशिश नहीं है। 9 जुलाई को पटना हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाते हुए स्टूडियो मालिक को बरी कर दिया। क्या है पूरा मामला, कोर्ट ने क्यों बरी किया और इस फैसले का क्या असर होगा; जानेंगे, बूझे की नाही में…। सवाल-1: लड़की की छाती दबाना और सलवार खोलने की कोशिश करने का पूरा मामला क्या है? जवाबः 20 जनवरी 2008 को बांका जिले के अमरपुर स्थित ‘छाया स्टूडियो’ के मालिक के खिलाफ रेप की कोशिश की FIR हुई। युवती ने आरोप लगाया था… 5 साल तक चले ट्रायल के बाद 2013 में बांका कोर्ट ने हिमांशु को IPC की धारा 376/511 (रेप का प्रयास) और 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) के तहत दोषी करार दिया था। उसे 3 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। लोअर कोर्ट के फैसले को हिमांशु ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। सवाल-2ः आरोपी के वकील ने हाईकोर्ट में क्या दलीलें दी? जवाबः हिमांशु उर्फ मिथिया के वकील अजय मुखर्जी और गणेश शर्मा ने पटना हाईकोर्ट में दलील दी कि निचली अदालत का फैसला गैरकानूनी है। सवाल-3ः पटना हाईकोर्ट ने किस आधार पर आरोपी को बरी किया? जवाबः 9 जुलाई को फैसला सुनाते हुए पटना हाईकोर्ट के जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने कहा- इस मामले में मेडिकल एविडेंस का अभाव है। और रेप करने की कोशिश की दिशा में भी स्पष्ट शारीरिक प्रयास के प्रमाण नहीं है। इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है। जस्टिस सिंह ने अपने फैसले में 3 बातों को आधार बनाया… 1. पेनेट्रेशन का कोई सबूत नहीं कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने बल का प्रयोग अवश्य किया, क्योंकि उसने युवती को बंधक बनाया। दरवाजा बंद किया। उसकी सलवार उतारने की कोशिश की और उसकी छाती दबाकर शारीरिक उत्पीड़न किया। हालांकि, ये घटना रेप के प्रयास के बजाय मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाले हैं। 2. युवती की नहीं हुई मेडिकल जांच कोर्ट ने कहा कि इस केस में बहुत खामियां हैं। कोर्ट ने कहा कि 5 गवाहों में एक ही स्वतंत्र गवाह था, जो मुकर गया। जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने वाले जांच अधिकारी से मुकदमे के दौरान पूछताछ तक नहीं नहीं की गई थी। इसके अलावा चिकित्सा अधिकारी की भी गवाही नहीं कराई गई। 3. सिर्फ माता-पिता ही मुख्य गवाह इस मामले में पीड़िता के माता-पिता ही मुख्य गवाह हैं, जिनका इस मामले के नतीजे से सीधा संबंध है। सुप्रीम कोर्ट के कृष्ण कुमार मलिक और संदीप राय मामलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा… ‘यौन अपराधों में पीड़िता की अकेली गवाही सजा के लिए पर्याप्त हो सकती है, लेकिन इसके लिए गवाही का बेदाग और पूरी तरह से विश्वसनीय होना अनिवार्य है। अगर गवाही में कमियां या विरोधाभास हैं, तो बिना स्वतंत्र पुष्टि के आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यहां युवती के बयानों में कई तरह का विरोधाभास है।’ सवाल-4ः भारतीय कानून में ‘रेप की कोशिश’ किसे माना जाता है? जवाब: 25 अक्टूबर 2021 को एक अन्य केस की सुनवाई के दौरान रेप की तैयारी और रेप की कोशिश में फर्क बताया गया था… सवाल-5: पटना हाईकोर्ट के इस फैसले का क्या असर पड़ेगा? जवाबः पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट सर्वदेव सिंह का कहना है, ‘हाईकोर्ट ने कानून के तहत ही फैसला सुनाया है। इसलिए इसका निगेटिव इम्पैक्ट पड़ना गलत है। हालांकि, लोगों के बीच इस फैसले को लेकर आक्रोश भी हो सकता है।’ वहीं, मगध महिला कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर और साइकोलॉजिस्ट निधि सिंह इसके 3 बड़े दूरगामी परिणाम बतातीं हैं… सवाल-6: अब पीड़िता के पास क्या कानूनी रास्ते बचे हैं? जवाबः एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर पीड़िता को पटना हाईकोर्ट के फैसले पर आपत्ति है, तो वह फैसले को हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दे सकती है। या सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। इसके बाद कोर्ट केस को आगे बढ़ाते हुए सुनवाई शुरू करेगी। अगर जांच में आरोपी पर अटेम्प्ट टू रेप का मामला साबित हो जाता है, तो उन्हें संगीन धाराओं के तहत सजा दी जाएगी।

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