उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी उर्फ एन.डी. तिवारी को कांग्रेस का सबसे अनुभवी नेताओं में गिना जाता था. एन.डी. तिवारी सिर्फ यूपी के ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के भी मुख्यमंत्री रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार में भी कई अहम मंत्रालय संभाले हैं. लेकिन राजनीतिक सफलताओं के साथ-साथ उनकी पर्सनल जिंदगी का एक अध्याय ऐसा भी रहा. जिसने उन्हें देशभर की सुर्खियों में ला दिया था. यह कहानी है एक लंबे कानूनी विवाद, डीएनए टेस्ट और फिर 88 साल की उम्र में हुई दूसरी शादी की है.
कौन थे नारायण दत्त तिवारी?
नारायण दत्त तिवारी का जन्म 18 अक्टूबर 1925 को नैनीताल जिले के बलूती गांव में हुआ था. नारायण दत्त तिवारी छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे. स्वतंत्रता आंदोलन में भी हिस्सा लिया और बाद में कांग्रेस के बड़े नेताओं में शामिल हुए. वह उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री (1976-77, 1984-85, 1988-89) और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (2002-07) के रूप में काम किया. 1986 और 1988 के बीच उन्होंने प्रधान मंत्री राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में पहली बार विदेश मामलों के मंत्री और फिर वित्त मंत्री के रूप में भी काम किए. यही नहीं वह सिर्फ सीएम ही नहीं, 2007 से 2009 तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक गलियारों में उन्हें विकास कार्यों और प्रशासनिक अनुभव के लिए जाना जाता था है.
फिर एक विवाद ने बदल दी तस्वीर
राजनीति में सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन 2008 में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया. रोहित शेखर नाम के एक युवक ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि नारायण दत्त तिवारी उनके बायोलॉजिकल पिता हैं. तिवारी ने शुरुआत में इस दावे को स्वीकार नहीं किया. मामला अदालत तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली.
जब हुआ DNA टेस्ट
अदालत के निर्देश पर नारायण दत्त तिवारी का डीएनए परीक्षण कराया गया. 2012 में आई डीएनए रिपोर्ट में यह पता चला कि रोहित शेखर नारायण दत्त तिवारी के बायोलॉजिकल पिता हैं. इसके बाद तिवारी ने सार्वजनिक रूप से रोहित शेखर को अपना पुत्र स्वीकार किया. यह मामला उस समय देश में खूब चर्चा बटोरा.
88 साल की उम्र में दूसरी शादी
डीएनए विवाद के बाद एक और खबर ने पूरे देश को चौंका दिया. जब मई 2014 में 88 साल की उम्र में नारायण दत्त तिवारी ने उज्ज्वला शर्मा से विवाह किया. यह विवाह लखनऊ में सादगी के साथ संपन्न हुआ, लेकिन इसकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हुई. उज्ज्वला शर्मा लंबे समय से तिवारी के करीब मानी जाती थीं. विवाह के बाद दोनों सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी साथ दिखाई दिए.
राजनीति से बड़ी हो गई निजी जिंदगी की चर्चा
अब यह संयोग कहे या कुछ और जिस नेता ने कई सालों तक राजनीति में अपनी धाक बनाई, उसकी जिंदगी का सबसे ज्यादा चर्चित अध्याय राजनीतिक नहीं, बल्कि पर्सनल जीवन रहा.
लेकिन राजनीतिक योगदान भी कम नहीं था
नारायण दत्त तिवारी को उत्तर प्रदेश के सबसे अनुभवी मुख्यमंत्रियों में गिना जाता है. औद्योगिक विकास, निवेश और प्रशासनिक फैसलों को लेकर उनका कार्यकाल अक्सर याद किया जाता है. हालांकि, उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा विवाद इतना बड़ा हो गया कि नई पीढ़ी के कई लोग उन्हें पहले उसी वजह से याद करते हैं, जबकि उनका राजनीतिक योगदान उससे कहीं बड़ा रहा है. UP CM के गजब किस्से का यह पार्ट बताता है कि राजनीति करने वाले नेताओं का जीवन सिर्फ सत्ता तक सीमित नहीं होता. कभी-कभी निजी जिंदगी के फैसले और विवाद भी इतिहास का हिस्सा बन जाते हैं.
अंतिम समय में नारायण दत्त तिवारी लंबी बीमारी से परेशान रहे. जिसके बाद 18 अक्टूबर 2018 को राजधानी दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में दोपहर में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली थी.
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