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महाराष्ट्र में शरद पवार के अगले सियासी कदम को लेकर अटकलें तेज हैं. बीजेपी नेता और मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया है कि शरद पवार पर उनकी पार्टी के भीतर से ही दबाव बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी के सामने एनडीए में शामिल होने या किसी बड़े विपक्षी दल के साथ जाने जैसे विकल्प हैं. इस बयान के बाद एनसीपी के संभावित विलय और नए सियासी समीकरणों की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

शरद पवार के आगे कुआं, पीछे खाई... मगर साहब ने साध ली है चुप्पीZoom

महाराष्‍ट्र में शरद पवार के मूव पर सबकी न‍िगाहें हैं.

महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं. पिछले कुछ दिनों से यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) का अगला कदम क्या होगा? क्या पार्टी इंडिया गठबंधन में बनी रहेगी, एनडीए का दामन थामेगी या फिर कांग्रेस के साथ विलय का रास्ता चुनेगी? इन तमाम सवालों पर शरद पवार ने अब तक चुप्पी साध रखी है, लेकिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है.

कोल्हापुर में मीडिया से बातचीत करते हुए चंद्रकांत पाटिल ने दावा किया कि शरद पवार पर उनकी अपनी पार्टी के भीतर से ही बड़ा राजनीतिक फैसला लेने का दबाव बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार की उम्र हो चुकी है और अब वे थक गए हैं. उनकी ही पार्टी के भीतर से किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ जाने का दबाव बढ़ रहा है. इसलिए इस संबंध में शरद पवार को जल्द फैसला लेना चाहिए.’ पाटिल के मुताबिक, एनसीपी (एसपी) के सामने दो विकल्प हैं या तो एनडीए के साथ जाए या फिर किसी बड़े विपक्षी दल के साथ पार्टी का विलय कर दिया जाए.

आखिर किस ओर जाएंगे शरद पवार?

महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि शरद पवार का अगला दांव क्या होगा. लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच उनकी पार्टी लगातार दबाव में दिखाई दे रही है. ऐसे में बीजेपी मंत्री का यह बयान इन अटकलों को और हवा दे रहा है कि एनसीपी (एसपी) के भीतर भविष्य को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है.

पाटिल ने कहा कि राजनीति में बड़े फैसले सार्वजनिक होने से पहले पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सचिन अहीर के शिवसेना में शामिल होने की किसी को भनक नहीं लगी थी. इसी तरह एकनाथ शिंदे भी राजनीतिक रणनीति को आखिरी समय तक गोपनीय रखने के लिए जाने जाते हैं.

मुलाकातों ने बढ़ाया सियासी सस्पेंस

हाल के दिनों में एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे की बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े से मुलाकात और उसके बाद उद्धव ठाकरे से उनके मिलने को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं. इन मुलाकातों को संभावित राजनीतिक बदलाव से जोड़कर देखा जाने लगा.

हालांकि एकनाथ खडसे ने इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने साफ कहा कि उनका बीजेपी में लौटने का कोई इरादा नहीं है और वह पूरी मजबूती से शरद पवार के साथ खड़े हैं. खडसे ने बताया कि उद्धव ठाकरे से मुलाकात सिर्फ अपने 75वें जन्मदिन के अमृत महोत्सव समारोह का निमंत्रण देने के लिए थी, इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.

क्यों बढ़ी हलचल?

चंद्रकांत पाटिल का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक दल लगातार नए समीकरण तलाश रहे हैं. बीजेपी नेता ने भले ही इसे अपना राजनीतिक विश्लेषण बताया हो, लेकिन उनके इस बयान ने एनसीपी (एसपी) के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं को नई ऊर्जा दे दी है.

फिलहाल शरद पवार की ओर से इस पूरे मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यही सवाल गूंज रहा है कि क्या ‘साहब’ सही समय का इंतजार कर रहे हैं या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर होने वाला है. फिलहाल जवाब भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तय है कि बीजेपी नेता के बयान ने एनसीपी (एसपी) को लेकर चल रहे सस्पेंस को और गहरा जरूर कर दिया है.

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Saad Omar

साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें

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