Last Updated:
Shimla Mirch ki Kheti: शिमला मिर्च की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए किसान अगर सही तकनीक अपनाएं तो कम लागत में अच्छी कमाई कर सकते हैं. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सीधे बीज बोने के बजाय ट्रे में पौध तैयार कर बेड विधि और लो टनल पॉलीहाउस से खेती करने पर पौध सुरक्षित रहती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
Shimla Mirch ki Kheti: शिमला मिर्च की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी पैदावार के लिए सही तकनीक अपनाना बेहद जरूरी होता है. कई किसान सीधे खेत में बीज डालकर इसकी खेती करते हैं, लेकिन कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार पहले पौध तैयार करके रोपाई करने से फसल बेहतर होती है और नुकसान की संभावना भी कम रहती है. फिरोजाबाद में बड़ी संख्या में किसान शिमला मिर्च की खेती करते हैं. ऐसे में किसान अगर ट्रे में पौध तैयार कर बेड विधि और लो टनल पॉलीहाउस का इस्तेमाल करें तो कम लागत में अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.
ट्रे में तैयार करें शिमला मिर्च की पौध
फिरोजाबाद कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. पृथ्वीपाल सिंह ने लोकल 18 को बताया कि जिले के नारखी क्षेत्र में किसान बड़े स्तर पर शिमला मिर्च की खेती करते हैं. बारिश के मौसम से पहले ही किसान इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं. उन्होंने बताया कि शिमला मिर्च की बेहतर खेती के लिए खेत में सीधे बीज बोने के बजाय पहले पौध तैयार करना ज्यादा फायदेमंद रहता है.
किसानों को पौध तैयार करने के लिए ट्रे का इस्तेमाल करना चाहिए. ट्रे में पौध अच्छी तरह विकसित होती है और पौध खराब होने का खतरा भी कम रहता है. पौध तैयार करते समय ट्रे को पॉलीथिन से ढककर रखना चाहिए, जिससे बाहर से आने वाले कीड़े और खरपतवार पौध को नुकसान न पहुंचा सकें.
लो टनल पॉलीहाउस से मिलेगा फायदा
कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, शिमला मिर्च की खेती के लिए खेत में बेड तैयार करके पौध की रोपाई करनी चाहिए. इसके साथ ही किसान लो टनल पॉलीहाउस का उपयोग कर सकते हैं. इससे पौधों को मौसम के उतार-चढ़ाव और कीटों से बचाने में मदद मिलती है. उन्होंने बताया कि सही तरीके से खेती करने पर फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है.
डॉ. पृथ्वीपाल सिंह ने बताया कि अच्छी पैदावार के लिए किसानों को हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चयन करना चाहिए. शिमला मिर्च की खेती में शंकर प्रजाति के बीज का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. किसान ट्रे में तैयार की गई करीब 30 दिन पुरानी पौध को खेत में लगा सकते हैं. रोपाई के बाद पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल करना फायदेमंद रहता है.
खाद और मल्चिंग का रखें ध्यान
वहीं रोपाई के बाद इसमें जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए. लगभग 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद या गोबर की सड़ी खाद का इस्तेमाल करें. इसके बाद खेत में 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करें. इसमें कुछ मात्रा रोपाई के समय और कुछ मात्रा रोपाई के 20 दिन बाद देनी चाहिए. वहीं, शिमला मिर्च की खेती में किसान मल्चिंग का उपयोग करें.
बरसात के मौसम में फफूंद और कीटों से फसल के बचाव के लिए किसान भाई नीम की फलियों को सुखाकर उनका रस या घोल तैयार कर छिड़काव कर सकते हैं. इससे फसल को रोगों से बचाने में मदद मिलेगी और पैदावार भी बेहतर होगी.
About the Author
सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



