बीजेपी सांसद जगदीश शेट्टार ने कहा, स्थायी निवासी प्रमाण पत्र का मकसद क्या है?.. किसी भी राज्य सरकार को निवासी प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नहीं दिया गया था, क्योंकि नागरिकता, निवासी प्रमाण पत्र, ये सब केंद्र सरकार की जिम्मेदारी हैं. यहां तक कि जाति जनगणना का अधिकार भी केंद्र के ही पास है. राज्य सरकार का स्थायी निवासी प्रमाण पत्र जारी करना कानून और संविधान के खिलाफ है. इसलिए, अगर कोई अदालत जाता है, तो निश्चित रूप से इसे रद्द कर दिया जाएगा.
तो कर्नाटक कांग्रेस का SIR है क्या?
कर्नाटक में चुनाव आयोग के SIR से पहले राज्य सरकार ने यह विशेष सेवा शुरू की है. यह सर्टिफिकेट उन लोगों के लिए होगा जो राज्य में निर्धारित नियमों के अनुसार लंबे समय से रह रहे हैं और सरकार द्वारा तय की गई शर्तें पूरी करते हैं. सरकार का कहना है कि ऐसा हम इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इसके जरिये सरकारी योजनाओं का लाभ उचित लोगों को दे सकें. एजुकेशन, नौकरी और अन्य योजनाओं में लोग इसका फायदा उठा सकें. लेकिन बीजेपी का कहना है कि राज्य सरकार ऐसा प्रमाणपत्र दे ही नहीं सकती.
किस-किसको मिल रहा ये प्रमाणपत्र
- उसका जन्म कर्नाटक में हुआ हो.
- वह कम से कम 10 साल से कर्नाटक में रह रहा हो.
- उसने कक्षा 12 तक की पढ़ाई में राज्य में कुल 10 साल की शिक्षा पूरी की हो.
- उसके पिता, माता, अभिभावक या जीवनसाथी कर्नाटक में रहते हों.
- उसके पास कर्नाटक में आवासीय संपत्ति हो, या वह ऐसी संपत्ति का मालिक, कब्जाधारी या निवासी हो.
- उसका नाम मतदाता सूची, आधार, राशन कार्ड, राजस्व अभिलेख या अन्य सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो.
- आवेदक या उसके माता-पिता में से किसी ने किसी सरकारी विभाग या सार्वजनिक संस्था में कम से कम 7 वर्ष तक सेवा की हो.
आवेदन कैसे होगा?
- जो भी व्यक्ति यह निवास प्रमाणपत्र लेना चाहता है, वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकेगा.
- ऑनलाइन आवेदन सेवा सिंधु पोर्टल के माध्यम से किया जा सकेगा.
- लोगों की मदद के लिए सरकार वार्डों और मतदान केंद्रों पर लगभग 50,000 सहायता केंद्र भी स्थापित कर रही है.
- यह व्यवस्था कर्नाटक की मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान पात्र निवासियों की सहायता के लिए की जा रही है.
क्या राज्य सरकार को यह अधिकार है?
संविधान के मुताबिक- कोई भी राज्य सरकार परमानेंट रेजिडेंस सर्टिफिकेट और डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी कर सकती है. लेकिन वह नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं दे सकती. नागरिकता देने का काम सिर्फ केंद्र सरकार कर सकती है और वह भी सिटिजनशिप एक्ट 1955 के अनुसार तय होता है. अनुच्छेद 162 में इसका जिक्र है.
सिटिजनशिप एक्ट 1955 क्या कहता है?
यह कहता है कि केवल राज्य में रहने के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. हालांकि केंद्र को शक्ति है कि वह सरकारी नौकरियों और निवास के लिए शर्तें तय करे. राज्य सरकार खुद ये शर्तें नहीं बना सकतीं. संविधान कहता है कि भारत का नागरिक कहीं भी जाकर रह सकता है, इसलिए कोई भी राज्य किसी को रोक नहीं सकता. इसीलिए नागरिकता तय करने का पूरा पावर सेंटर के पास है.
कर्नाटक सरकार कैसे दे रही?
कर्नाटक सरकार परमानेंट रेसिडेंट सर्टिफिकेट दे रही. यह व्यक्ति का जन्म, लंबे समय से वहां रहने, एजुकेशन, परिवार का निवास, संपत्ति, सरकारी कागजातों में दर्ज जानकारियों के आधार पर जारी होगा.इसका इस्तेमाल सिर्फ सरकारी योजनाओं के लिए हो सकता है. कोई भी इससे एडमिशन ले सकता है, नौकरी ले सकता है. आरक्षण का लाभ ले सकता है. लेकिन इसे लेकर कोई ये नहीं कह सकता कि वह भारत का नागरिक है. यह प्रमाणपत्र किसी को भारतीय नागरिक नहीं बनाता.
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