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Rajasthan Agriculture News: अच्छी बारिश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से शुरू हो गई है. इस बार खेतों में एक नई तस्वीर देखने को मिल रही है, जहां महिलाएं ट्रैक्टर चलाकर खेती की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महिलाएं खेत तैयार करने और बुवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. इससे खेती के कार्यों में तेजी आई है और किसानों में बेहतर उत्पादन की उम्मीद भी बढ़ी है. महिलाओं की सक्रिय भागीदारी न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भी पेश कर रही है.

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महिलाएं संभाल रहीं ट्रैक्टर, खेतों में बदली तस्वीर, अच्छी बारिश से बुवाई तेज

जालौर: जालोर जिले के ग्रामीण इलाकों में मानसून की अच्छी बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई ने जोर पकड़ लिया है. खेतों में इन दिनों रौनक लौट आई है और किसान समय पर बुवाई में जुटे हुए हैं. इस बीच एक खास और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आ रही है. यहां की महिला किसान ट्रैक्टर चलाकर खुद खेतों में बुवाई कर रही हैं.

जालोर के सांचौर, भीनमाल और आहोर क्षेत्र के गांवों में महिलाएं अब खेती के आधुनिक तरीकों को अपनाते हुए ट्रैक्टर की स्टीयरिंग संभाल रही हैं. वे न सिर्फ खेत की जुताई और बीजारोपण कर रही हैं, बल्कि पूरे कृषि कार्य में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. यह बदलती तस्वीर ग्रामीण समाज में महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को दर्शाती है.

खेती-किसानी में महिलाओं की भूमिका हमेशा से अहम
किसान हनुमान सुथार और मनोहर लाल गोदारा बताते हैं कि खेती-किसानी में महिलाओं की भूमिका हमेशा से अहम रही है, लेकिन अब वे हर काम में आगे बढ़कर हिस्सा ले रही हैं. पहले महिलाएं केवल सहायक भूमिका में नजर आती थीं, लेकिन अब वे ट्रैक्टर चलाने जैसे बड़े कार्य भी खुद कर रही हैं. उनका कहना है कि खेती केवल पुरुषों का कार्य नहीं है, बल्कि महिलाएं भी हर चरण में कंधे से कंधा मिलाकर काम करती हैं.

अच्छी बारिश के चलते खेतों में पर्याप्त नमी बनी
हाल ही में हुई अच्छी बारिश के चलते खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है, जो बुवाई के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है. इसी वजह से किसान बाजरा, मूंग, ग्वार और मोठ जैसी खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से कर रहे हैं. समय पर बुवाई होने से इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है. महिलाएं ट्रैक्टर के जरिए तेजी से बीजारोपण कर रही हैं, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है. खेत की तैयारी, बीज चयन, बुवाई और पशुपालन जैसे कार्यों में उनका योगदान बेहद अहम है. यह न सिर्फ खेती को आसान बना रहा है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह महिलाओं की भागीदारी बढ़ती रही, तो आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी. साथ ही, यह बदलाव समाज में सकारात्मक सोच और समानता का संदेश भी दे रहा है.

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Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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