अखिलेश कुमार मौर्य बताते हैं कि उन्होंने पांचवी तक पढ़ाई किये है उसके बाद घर की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़ दी और अपनी किस्मत खेती किसानी में आजमाएं और वह इस समय लगभग एक से डेढ़ बीघा में मचान विधि से कद्दू की खेती कर रहे हैं. बताते हैं कि एक से डेढ़ बीघा मचान विधि से कद्दू की खेती में लगभग चार से 5 हजार की लागत लगी है. एक से डेढ़ बीघा कद्दू की खेती में लगभग 40 से 50 हजार की इनकम होने की उम्मीद है.
पांचवी की पढ़ाई के बाद खेती में आजमाया किस्मत
अखिलेश कुमार मौर्य बताते हैं कि उन्होंने पांचवी तक पढ़ाई किये है उसके बाद घर की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़ दी और अपनी किस्मत खेती किसानी में आजमाएं और वह इस समय लगभग एक से डेढ़ बीघा में मचान विधि से कद्दू की खेती कर रहे हैं. बताते हैं कि एक से डेढ़ बीघा मचान विधि से कद्दू की खेती में लगभग चार से 5 हजार की लागत लगी है. एक से डेढ़ बीघा कद्दू की खेती में लगभग 40 से 50 हजार की इनकम होने की उम्मीद है. यह इनकम कम भी हो सकता है ज्यादा भी हो सकता है क्योंकि मार्केट के रेट पर निश्चित रहता है.
बीमारी का खतरा होता है कम
अखिलेश कुमार मौर्य ने बताया कि मचान पर बेल चढ़ने से खेत में हवा और धूप अच्छी तरह पहुंचती है. इससे पौधों में बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. साथ ही फल साफ-सुथरे रहते हैं और उनकी तुड़ाई भी आसानी से हो जाती है. इस वजह से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिला है. शुरुआत में मचान तैयार करने में कुछ खर्च जरूर आता है, लेकिन यह खर्च एक बार का होता है. मचान का उपयोग कई सीजन तक किया जा सकता है. अच्छी पैदावार और बेहतर कीमत मिलने से यह लागत आसानी से निकल जाती है. अगर किसान सही तरीके से मचान विधि अपनाएं और समय-समय पर फसल की देखभाल करें, तो कद्दू की खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. उनका मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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