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J&K School Book Screening Order: जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर के सभी सरकारी, प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग सेंटरों को अपनी लाइब्रेरी और क्लासरूम की हर किताब की स्क्रीनिंग करने का आदेश दिया है. आपत्तिजनक या देश विरोधी कंटेंट पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है.

कश्मीर में किताबों पर 'डिजिटल' पहरा! स्कूल और कोचिंग सेंटर में छनेगी 1-1 बुकZoom

J&K school book screening order: जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में हर किताब की जांच होगी

नई दिल्ली (J&K School Book Screening Order). जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर घाटी के सभी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों में मौजूद किताबों को लेकर सख्त रुख अपना लिया है. सरकार का मानना है कि बच्चों तक ऐसी कोई भी किताब या सामग्री नहीं पहुंचनी चाहिए जो विवादित हो या जिससे समाज का माहौल बिगड़े. इसीलिए स्कूल शिक्षा निदेशालय ने नया फरमान जारी किया है. इसके तहत हर शिक्षण संस्थान को अपनी लाइब्रेरी से लेकर क्लासरूम तक की सभी किताबों की बारीकी से जांच करनी होगी.

इस नए आदेश के बाद कश्मीर के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में हड़कंप मच गया है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ चेतावनी नहीं है. सभी स्कूलों को सर्टिफिकेट जमा करके लिखित में देना होगा कि उनके यहां कोई भी ‘आपत्तिजनक’ किताब नहीं है. सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और बच्चों के भविष्य के लिए जरूरी कदम बता रही है. वहीं सूबे की सियासत में इस फैसले को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. विपक्षी दल इसे इतिहास को बदलने और विचारों पर पाबंदी लगाने की कोशिश करार दे रहे हैं. समझिए पूरा मामला.

क्या है सरकार का नया आदेश और क्यों मची हलचल?

कश्मीर संभाग के स्कूल शिक्षा निदेशक की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक, घाटी के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग सेंटर को अपने कैंपस की सघन चेकिंग करनी होगी. इसके तहत लाइब्रेरी, ऑफिस, क्लासरूम और स्टाफ रूम में रखी किताबें खंगाली जाएंगी. सभी स्कूल प्रमुखों को अपने-अपने मुख्य शिक्षा अधिकारी या जोनल शिक्षा अधिकारी के पास सर्टिफिकेट जमा करना होगा. उन्हें गारंटी देनी होगी कि उनके स्कूल कैंपस में ऐसी कोई भी सामग्री मौजूद नहीं है जो नियमों के खिलाफ हो.

किन किताबों पर गाज गिरने की आशंका?

आदेश में लिखा है कि ऐसी सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जो किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हो. जो किताबें देश के मौजूदा कानूनों के खिलाफ हों, राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाती हों या अलगाववाद को बढ़ावा देती हों, उन्हें तुरंत हटाया जाएगा. कुछ दिनों पहले ही बीजेपी ने सरकारी स्कूलों में कुछ अलगाववादी नेताओं का महिमामंडन करने वाली किताबों की खरीद के खिलाफ प्रदर्शन किया था.

आदेश की अनदेखी पर कड़ी कार्रवाई

करीब 1 साल पहले जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग ने कश्मीर पर लिखी गईं 25 किताबों की बिक्री और प्रकाशन पर रोक लगा दी थी. इनमें अरुंधति रॉय और ए.जी. नूरानी जैसे लेखकों की किताबें भी शामिल थीं. सरकार का आरोप था कि ये किताबें अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देती हैं. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस आदेश का पालन करने में अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई बरती गई तो संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

कश्मीर डिवीजन में इस समय 10,787 सरकारी और 2,386 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल चल रहे हैं, जिन पर यह नियम लागू होगा.

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Deepali PorwalSenior Sub EditorDeepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

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