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-अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण पर लगातार दूसरे दिन बड़ी कार्रवाई, दो लाख वर्गमीटर भूमि से हटाए गए अवैध निर्माण
-मरोरगढ़ी और चपरगढ़ में चला ध्वस्तीकरण अभियान, भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
-सरकारी भूमि पर कब्जा या बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने वालों को नहीं मिलेगी कोई राहत

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने अधिसूचित क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों और सरकारी भूमि पर कब्जे के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए लगातार दूसरे दिन भी बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। दो दिनों तक चले इस व्यापक अभियान में करीब दो लाख वर्गमीटर सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 700 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों, प्रवर्तन टीम और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई। प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि अधिसूचित क्षेत्र में अवैध निर्माण और बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। यीडा द्वारा चलाए गए अभियान के पहले दिन, 9 जुलाई को जनपद अलीगढ़ के टप्पल क्षेत्र स्थित ग्राम मरोरगढ़ी और आसपास के गांवों में अवैध रूप से विकसित की जा रही कॉलोनियों को निशाना बनाया गया। इस दौरान हरित वाटिका मरोरगढ़ी सहित कई अवैध कॉलोनियों में बुलडोजर चलाकर करीब 1.50 लाख वर्गमीटर भूमि पर किए गए अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिए गए। प्राधिकरण के अनुसार मुक्त कराई गई इस भूमि का बाजार मूल्य लगभग 450 करोड़ रुपये है।

इस अभियान का नेतृत्व विशेष कार्याधिकारी (आईएएस) शैलेंद्र कुमार सिंह ने किया। उनके साथ उप जिलाधिकारी अभिषेक शाही, तहसीलदार मनोज कुमार सिंह, प्राधिकरण के परियोजना विभाग के अधिकारी तथा अलीगढ़ पुलिस प्रशासन की टीम मौजूद रही। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। विशेष कार्याधिकारी (आईएएस) शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा यीडा क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों का निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकारी भूमि पर कब्जा कर अवैध निर्माण करने वालों के विरुद्ध प्राधिकरण की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। हमारा उद्देश्य नियोजित विकास को सुरक्षित रखना और आम नागरिकों को अवैध परियोजनाओं में निवेश से बचाना है।

अभियान के दूसरे दिन 10 जुलाई को प्राधिकरण ने अधिसूचित क्षेत्र के ग्राम चपरगढ़ में 60 मीटर चौड़ी हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान करीब 50 हजार वर्गमीटर भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। यह भूमि प्राधिकरण द्वारा अर्जित और कब्जा प्राप्त संपत्ति है, जिस पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कर लिया था। प्राधिकरण ने बुलडोजर चलाकर सभी अवैध निर्माण हटवा दिए। इस भूमि का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 250 करोड़ रुपये आंका गया है। इस कार्रवाई का नेतृत्व अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने किया।

अभियान में उप जिलाधिकारी हरी प्रताप सिंह, उप जिलाधिकारी शिव अवतार सिंह, प्राधिकरण के परियोजना, भूलेख एवं प्रवर्तन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) की भी तैनाती की गई थी। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा अधिसूचित क्षेत्र में सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा, अतिक्रमण या बिना स्वीकृति कॉलोनी विकसित करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। भविष्य में भी ऐसे अभियान लगातार चलाए जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति नियमों की अनदेखी करेगा तो उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी भूखंड, प्लॉट या कॉलोनी में निवेश करने से पहले उसकी वैधता और प्राधिकरण से स्वीकृति की पूरी जांच अवश्य कर लें। कई बार लोग सस्ती जमीन के लालच में अवैध कॉलोनियों में निवेश कर देते हैं, जिससे बाद में उन्हें आर्थिक नुकसान और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यीडा अधिकारियों का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और निवेश क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में नियोजित विकास को बनाए रखना और सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राधिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अवैध कॉलोनियां न केवल विकास योजनाओं को प्रभावित करती हैं, बल्कि भविष्य में मूलभूत सुविधाओं और अधोसंरचना विकास में भी बड़ी बाधा बनती हैं।

अधिसूचित क्षेत्र में बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण, भूखंडों की बिक्री या कॉलोनी विकसित करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है और जहां भी अवैध गतिविधियां सामने आएंगी, वहां बिना किसी पूर्वाग्रह के बुलडोजर कार्रवाई जारी रहेगी। दो दिनों में 700 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराकर यीडा ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए अब कोई राहत नहीं है। प्राधिकरण का कहना है कि नियोजित विकास, निवेशकों के हितों की सुरक्षा और कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी इसी तरह के सख्त अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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