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सैफ ने लूटन टाउन और इंडियंस क्रिकेट क्लब के बीच खेले गए एक चैरिटी मैच में हिस्सा लिया. इस आयोजन में कई बिजनेस लीडर्स, समाजसेवी और क्रिकेट प्रेमी शामिल हुए, जिसका उद्देश्य बच्चों और जरूरतमंद समुदायों की मदद करना था. मैच की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिनमें सैफ पारंपरिक क्रिकेट सफेद कपड़ों में, हाथ में बल्ला लिए, मैदान पर पूरी तरह सहज नजर आए

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इंग्लैंड की धरती पर सैफ अली खान ने चैरिटी मैच में जड़ा अर्धशतक

नई दिल्ली. ज़्यादातर बॉलीवुड सितारे क्रिकेट को शौक के तौर पर खेलते हैं, लेकिन सैफ अली खान के लिए यह उनके परिवार की पहचान का हिस्सा है. हाल ही में सैफ ने इंग्लैंड की धूप भरी दोपहर में वही किया, जो पटौदी परिवार की कई पीढ़ियां करती आई हैं , क्रिकेट के मैदान पर उतरना. फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार मकसद एक नेक कारण था.

सैफ ने लूटन टाउन और इंडियंस क्रिकेट क्लब के बीच खेले गए एक चैरिटी मैच में हिस्सा लिया. इस आयोजन में कई बिजनेस लीडर्स, समाजसेवी और क्रिकेट प्रेमी शामिल हुए, जिसका उद्देश्य बच्चों और जरूरतमंद समुदायों की मदद करना था. मैच की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिनमें सैफ पारंपरिक क्रिकेट सफेद कपड़ों में, हाथ में बल्ला लिए, मैदान पर पूरी तरह सहज नजर आए.

सैफ ने जड़ा अर्धशतक

सैफ ने बल्लेबाजी में भी प्रभावित किया और अर्धशतक जड़ा, जिससे साफ है कि क्रिकेट का हुनर उनके खून में है. इस कार्यक्रम में कई जानी-मानी हस्तियां भी शामिल हुईं, जिनमें फिल्ममेकर निखिल द्विवेदी, समेना कैपिटल के फाउंडर शिरीष सराफ, डाबर के चेयरमैन मोहित बर्मन और INOXGFL ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर देवांश जैन शामिल थे. इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर मोंटी पनेसर और उस्मान अफज़ाल भी इस मौके का हिस्सा बने.इस अनुभव के बारे में बात करते हुए सैफ ने कहा कि यह उनके लिए खास मौका था, जहां उन्होंने परिवार के साथ समय बिताया और अपने बेटों तैमूर और जेह को इंग्लैंड की इस खास परंपरा से रूबरू कराया.

विरासत में मिला है क्रिकेट

सैफ अली खान के लिए क्रिकेट सिर्फ एक शौक नहीं है, बल्कि उनकी पहचान का अहम हिस्सा है। उनके पिता मंसूर अली खान पटौदी, जिन्हें ‘टाइगर’ के नाम से जाना जाता है, भारत के महान कप्तानों में से एक थे. उन्होंने महज 21 साल की उम्र में कप्तानी संभाली और विदेशों में भारत के खेलने के अंदाज को बदल दिया. खास बात यह है कि उन्होंने एक आंख की रोशनी खोने के बाद भी यह सब हासिल किया. क्रिकेट की यह विरासत इससे भी पीछे तक जाती है. उनके दादा इफ्तिखार अली खान पटौदी ने इंग्लैंड और भारत, दोनों के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला. उन्होंने 1946 के इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम की कप्तानी भी की थी यह उपलब्धि बहुत कम लोगों के पास है.

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Rajeev MishraAssociate editorमैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें

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