आइए जानते हैं हलहारिणी अमावस्या पर किए जाने वाले 10 प्रमुख पारंपरिक उपाय।
1. पवित्र नदी में स्नान और तर्पण
अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी- जैसे गंगा, यमुना या नर्मदा में स्नान करें। इसके बाद हाथ में कुशा, जो कि एक प्रकार की घास होती है, काले तिल और जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का स्मरण करते हुए 3 बार तर्पण यानी जल अर्पित करें।
2. पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा
पीपल के पेड़ में देवताओं के साथ-साथ पितरों का भी वास माना जाता है। अत: सुबह के समय पीपल की जड़ में कच्चा दूध, गंगाजल, काले तिल और चीनी मिला हुआ जल अर्पित करें। इसके बाद ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ मंत्र का जाप करते हुए पीपल की 7 बार परिक्रमा करें। शाम को पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
3. पंचबलि भोग
अमावस्या के दिन घर में सात्विक भोजन बनाएं। ध्यान रहें कि यह बिना लहसुन-प्याज का हो। फिर भोजन तैयार होने के बाद सबसे पहले 5 विशेष हिस्से निकालें:
गोबलि: गाय के लिए
श्वानबलि: कुत्ते के लिए
काकबलि: कौए के लिए
देवादिबलि: देवताओं या अग्नि के लिए
पिपीलिकादिबलि: चींटियों के लिए
ये विशेष भोजन निकालने के बारे में माना जाता है कि कौए और कुत्ते के माध्यम से यह भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है।
4. दक्षिण दिशा में ‘पितृ दीपक’ जलाना
अमावस्या की शाम को घर के दक्षिण कोने में या मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके सरसों के तेल का एक दीपक जरूर जलाएं। दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है, वहां दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
5. हलहारिणी अमावस्या पर ‘हल’ और अन्न का दान
6. गीता के 7वें अध्याय का पाठ
पितरों की आत्मा की शांति और उन्हें मोक्ष दिलाने के लिए हलहारिणी अमावस्या के दिन श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करें। यदि आप स्वयं पाठ नहीं कर सकते, तो इसे घर में ऑडियो के रूप में चलाकर शांति से सुनें। पाठ का पुण्य अपने पितरों को अर्पित करें।
7. काले तिल और कुश का विशेष दान
पितृ दोष से मुक्ति के लिए अमावस्या के दिन काले तिल, कुशा घास, ऊनी वस्त्र या छाते का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। इसे किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक दें।
8. जल पात्र या घड़े का दान
गर्मी और उमस के इस मौसम में किसी मंदिर, प्याऊ या सार्वजनिक स्थान पर पानी से भरा मिट्टी का घड़ा या कलश दान करना महादान माना गया है। राहगीरों को ठंडा जल पिलाने से पितरों की आत्मा को परम शांति मिलती है और कुंडली का पितृ दोष शांत होता है।
9. चींटियों और मछलियों को भोजन देना
सुबह के समय किसी सूखे तालाब, पेड़ के नीचे या पार्क में चींटियों के लिए ‘कसार’ यानी भुने हुए आटे में चीनी या शक्कर मिलाकर खिलायें।
इसके अलावा, आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर किसी साफ नदी या तालाब की मछलियों को खिलाएं। यह उपाय राहु-केतु के दोष को भी दूर करता है, जो अक्सर पितृ दोष का कारण बनते हैं।
10. गायत्री मंत्र या पितृ गायत्री का जाप
अमावस्या के दिन शांत चित्त होकर सफेद आसन पर बैठें और गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करें। या फिर आप इस विशेष पितृ मंत्र का जाप कर सकते हैं:
‘ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥’
विशेष नोट: हलहारिणी अमावस्या के दिन घर में किसी भी प्रकार के वाद-विवाद, कलह या तामसिक भोजन यानी मांस-मदिरा से पूरी तरह दूर रहें। मन में शांत और क्षमा का भाव रखकर किए गए उपाय ही पितरों तक पहुंचते हैं।
हलहारिणी अमावस्या- FAQS
प्रश्न 1. क्या हलहारिणी अमावस्या पर पितृ तर्पण किया जा सकता है?
उत्तर: हां, धार्मिक परंपराओं में इस दिन पितृ तर्पण को शुभ माना जाता है।
प्रश्न 2. क्या पितृ दोष के लिए केवल यही उपाय पर्याप्त हैं?
उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये पारंपरिक उपाय हैं। विशेष अनुष्ठान के लिए योग्य आचार्य से परामर्श लेना उचित रहता है।
प्रश्न 3. क्या इस दिन दान करना आवश्यक है?
उत्तर: दान अनिवार्य नहीं है, लेकिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान पुण्यदायी माना जाता है।
प्रश्न 4. पितरों के लिए कौन-सा दान शुभ माना जाता है?
उत्तर: काले तिल, अन्न, गुड़, वस्त्र, जल और भोजन का दान पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।
प्रश्न 5. क्या कौओं को भोजन कराने का महत्व है?
उत्तर: कई धार्मिक परंपराओं में कौओं को पितरों का प्रतीक मानकर उन्हें भोजन अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है।
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