राम और श्याम… दोनों ने बचपन साथ बिताया, साथ बड़े हुए और जिंदगी के हर सुख-दुख में एक-दूसरे का हाथ थामे रखा। लेकिन बुधवार को रोहिणी सेक्टर-16 के जी-4 में हुए हादसे से 20 मिनट के अंतर से जन्मे इन जुड़वां भाइयों की जोड़ी हमेशा के लिए बिछड़ गई।
इमारत गिरने के हादसे में राम की मौत हो गई। अस्पताल के बाहर खड़े श्याम की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वह बार-बार बस एक ही बात दोहरा रहे थे, मेरा भाई बहुत सीधा था… उसने किसी का क्या बिगाड़ा था? एक पल में इस हादसे ने न सिर्फ जुड़वां भाइयों को जुदा कर दिया, बल्कि एक परिवार से उसका सहारा भी छीन लिया। पीछे रह गए हैं बूढ़ी मां की सूनी आंखें, छोटे बच्चों का अनिश्चित भविष्य और एक ऐसे भाई का दर्द, जिसके लिए उसका हमसाया हमेशा के लिए बिछड़ गया।
हादसे की सूचना मिलते ही परिवार में अफरा-तफरी मच गई। छोटा भाई रवि और राम का दोस्त उन्हें पीसीआर की मदद से डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल लेकर पहुंचे। रवि ने बताया कि राम के सिर से लगातार खून बह रहा था और उनके कपड़े पूरी तरह खून से भीग चुके थे। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। श्याम ने बताया कि परिवार जी-4 इलाके में ही रहता है।
घर में मां, छोटा भाई, श्याम और राम का परिवार साथ रहता है। राम अपने पीछे पत्नी और 8 व 12 साल के दो बेटों को छोड़ गए हैं। परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। वह इलाके की मार्केट में बाइक रिपेयरिंग की दुकान चलाकर घर का खर्च उठाते थे।
अस्पताल पहुंचने से पहले जिंदगी साथ छोड़ गई
बुधवार दोपहर भी राम रोज की तरह दुकान पर काम कर रहे थे। उनका दोस्त रवि भी वहीं मौजूद था। इसी दौरान कुछ सामान लेने के लिए दोनों बाइक से मार्केट की ओर निकले। लेकिन कुछ ही पल बाद इमारत भरभराकर गिर पड़ी। दोनों मलबे के नीचे दब गए। रवि को मामूली चोटें आईं, लेकिन राम मलबे में पूरी तरह दब गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल पहुंचने से पहले ही जिंदगी उनका साथ छोड़ चुकी थी।
कैसे बच्चों को पालूंगी
हादसे के समय राम की पत्नी घर पर नहीं थीं। उन्हें फोन पर सिर्फ इतना बताया गया कि उनकी सास घायल हो गई हैं। यह सुनते ही वह घबराकर घर पहुंचीं, लेकिन वहां पता चला कि हादसे का शिकार उनके पति हुए हैं। वह तुरंत अस्पताल पहुंचीं, जहां उन्हें राम की मौत की खबर मिली। पति के निधन की सूचना मिलते ही उनका दर्द शब्दों में नहीं समा पा रहा था। रोते-बिलखते वह बस यही कह रही थीं, अब हमारे परिवार का क्या होगा… बच्चों को कैसे पालूंगी?
डीसीपी बने जीवनदाता, मलबे में फंसे मजदूर तक पहुंचाई ऑक्सीजन
रोहिणी में बुधवार को हुए हादसे के बीच एक पुलिस अधिकारी का मानवीय चेहरा लोगों के दिलों को छू गया। सूचना मिलते ही रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त शशांक जायसवाल कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गए। मलबे के नीचे दबे एक मजदूर को हाथ हिलाकर मदद की गुहार लगाते देख उन्होंने हालात की गंभीरता तुरंत समझ ली।
जदूर को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। ऐसे में डीसीपी ने बिना देर किए अपने स्टाफ को ऑक्सीजन सिलिंडर और पाइप की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। पास के अस्पताल से सिलिंडर मंगवाया गया और खुद जायसवाल ने पाइप के जरिए मलबे में फंसे मजदूर तक ऑक्सीजन पहुंचाई।
बारिश के बावजूद शशांक जायसवाल कई घंटे तक मौके पर डटे रहे। भीगते हुए भी वह बचाव अभियान की निगरानी करते रहे और टीम को लगातार दिशा-निर्देश देते रहे। स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्होंने किसी अधिकारी को इतनी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ राहत कार्य का नेतृत्व करते पहली बार देखा। ट्रैफिक पुलिस में रहते हुए भी सड़क हादसों के घायलों की जान बचाने वाले जायसवाल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वर्दी का सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



