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मऊ जनपद में स्थित हजरत मीर शम्सी साहब की कहानी सबसे अलग है. लगभग 400 वर्ष पूर्व ईरान से आए और यही बस गए. चमत्कारी इतने थे कि जो कहते थे वह हो जाता था. यही वजह है कि आज भी लोग उनके समाधि पर पूजा पाठ करते हैं और मन्नतों को मांगते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना विकासखंड क्षेत्र के ग्राम करहा निवासी सैयद हसन आरिफ बताते हैं कि हजरत मीर शम्सी साहब की लगभग 400 वर्ष पुरानी दरगाह आज भी क्षेत्रवासियों की आस्था का केंद्र बनी हुई है.

मऊः उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में स्थित हजरत मीर शम्सी साहब की कहानी सबसे अलग है. लगभग 400 वर्ष पूर्व ईरान से आए और यही बस गए. चमत्कारी इतने थे कि जो कहते थे वह हो जाता था. यही वजह है कि आज भी लोग उनके समाधि पर पूजा पाठ करते हैं और मन्नतों को मांगते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना विकासखंड क्षेत्र के ग्राम करहा निवासी सैयद हसन आरिफ बताते हैं कि हजरत मीर शम्सी साहब की लगभग 400 वर्ष पुरानी दरगाह आज भी क्षेत्रवासियों की आस्था का केंद्र बनी हुई है.

यहां के लोगों के अनुसार हजरत मीर शम्सी साहब का मूल नाम मीर शम्सुद्दीन था, जो करीब 4 शताब्दी पहले ईरान से भारत आए थे. बताया जाता है कि कुछ समय मुहम्मदाबाद गोहना में रहने के बाद उन्होंने करहा के जंगल क्षेत्र में अपनी कुटिया बनाकर लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना शुरू किया.

52 बीघा का पोखरा भी क्षेत्र में बना है चर्चा का विषय

उनका कहना है कि दरगाह के निर्माण के दौरान एक बार धरन छोटी पड़ गई थी. तब हजरत मीर शम्सी साहब ने उसे चादर से ढकने का निर्देश दिया और कुछ समय बाद धरन लगभग 3 फुट से अधिक बड़ी हो गई, लोग इसे उनकी करामात के रूप में मानते हैं. दरगाह के समीप स्थित 52 बीघा पोखरा भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहता है. वहीं यह भी स्थानीय मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति अपने घर की नाली का पानी इस पोखरे में बहाता है तो उसके साथ कोई न कोई अप्रिय घटना हो जाती है.

हर बृहस्पतिवार को दरगाह पर दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं. लोग अगरबत्ती और चादर चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगते हैं तथा मुराद पूरी होने पर दोबारा हाजिरी लगाते हैं. यह दरगाह वर्षों से आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बनी हुई है. इस दरगाह पर हर धर्म के लोग पहुंचते हैं क्योंकि सभी धर्म के लोगों की आस्था जुडी हुई है. यह जो कहते थे. वह पूरा हो जाता था और आज भी लोगों की मानना है कि यदि वहां सच्चे मन से मन्नत मांगी जाए तो वह पूरी हो जाती है. कुछ साल पहले तक अभी वह धर्म रखी गई थी लेकिन अब ईदगाह पूरी तरह से पक्का होने की वजह से धरन गायब हो गई.

राजा की पूरी हुई थी मान्यता

हजरत मीर शम्शी इतनी चमत्कारी थे कि कभी एक राजा को संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी, वह उनके यहां आए और इनसे आशीर्वाद मांगे. उन्होंने कहा कि जाइए आपके पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी और ऐसा ही हुआ. वह काफी जेवरात और आभूषण लेकर उनके यहां आए और कहा की यहां अपना आलिशान बिल्डिंग बना लीजिए लेकिन उन्होंने बिल्डिंग नहीं बनवाया. उस आभूषण और जेवरातों के पैसे से पोखरी की खुदाई कराई फिर जब वापस आकर देख तो बाबा उसी हालत में पड़े थे तो उन्होंने कहा कि आखिर जेवरत और आभूषण कहां गए वह गुस्से में बोले कि जाकर पोखर के पास खुदाई करो तुम्हारे जेवरात और आभूषण मिल जाएंगे. जबकी पोखरी की खुदाई के समय ही वह आभूषण और जेवरात खर्च हो गए थे लेकिन जैसे ही वह राजा पोखर के पास खुदाई किए जेवरात वापस निकल गए यह भी चमत्कार माना जाता है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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