Yogi Adityanath vs Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जहां एक तरफ अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने जैसे भावनात्मक मुद्दों को हवा देने में जुटी है तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें करारा जवाब देने का मूड बना लिया है. यूपी विधानसभा चुनाव में सपा बीजेपी के हिंदू विरोधी होने का नैरेटिव सेट करने में जुटे हैं तो सीएम योगी एक बार फिर से इनपर मुस्लिम परस्त होने का ठप्पा लगा रहे हैं. इसके लिए सीएम योगी ने पिछले 10-12 सालों में सबसे सफल साबित हुए हथियार कब्रिस्तान को राजनीति के केंद्र में ले आए हैं.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर लेने के लिए सीएम योगी ने एक बार फिर से कब्रिस्तान को राजनीति में ले आए हैं.
‘उनको कब्रिस्तान पसंद है और हमें राम मंदिर’
बांदा में 710 करोड़ से अधिक लागत की 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे सीएम योगी ने जोरदार तरीके से कांग्रेस और सपा को निशाने पर लिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चित्रकुट और बुंदेलखंड की स्मृतियों में प्रभु श्रीराम किस रूप में हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है. यहां के किसानों, युवाओं और जनमानस के मन में श्रीराम हम सबके लिए एक नई प्रेरणा होती है. कुछ लोग हैं जो विरासत को अपमानित करते हैं. कुछ लोगों ने हिंदू परंपरा और सनातन को अपमानित करना और इसे कोसना ही अपना जीवन का एक मात्र ध्वेय बनाया है. वे लोग भारत को वैभवशाली और विकसित रूप में देखना पसंद नहीं करते हैं.
उन्होंने कहा कि उन्हें अयोध्या में भव्य राम मंदिर अच्छा नहीं लगता. उन्हें वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम अच्छा नहीं लगता. उन्हें मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी का भव्य धाम अच्छा नहीं लगता. उन्हें चित्रकुट धाम और उसकी सजावट के लिए किए जाने वाले प्रयास अच्छे नहीं लगते. उन्हें मंदिरों के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए किए जाने वाले प्रयास अच्छे नहीं लगते.
सीएम ने सपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि याद कीजिए हम विरासत का संरक्षण करने के लिए जो पैसा जो आज हमारे जनप्रतिनिधिगण मंदिरों के सुंदरीकरण के लिए प्रदान करते हैं. समाजवादी पार्टी के दौर और आज में अंतर यही है कि ये पैसा तो आपका, बीजेपी की सरकार आई तो यह पैसा मंदिरों के विकास, धामों के सुंदरीकरण में खर्च किया जा रहा है. समाजवादी पार्टी की सरकारों में वही पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री वाल के लिए खर्च में चला जाता था.
बीजेपी के लिए विरासत और विकास एक साथ चलने वाली प्रक्रिया का पार्ट है. वह विकास को जितना महत्व देता है जितना विरासत का संरक्षण जरूरी है. वह मानता है कि अपनी विरासत के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करके उसका संरक्षण करके ही हम विकास की इन योजनाओं को भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित कर पाएंगे और उस सुरक्षित प्रक्रिया के साथ जोड़ने के लिए आज हम सब आपके पास आए हैं.
यूपी की राजनीति में कब्रिस्तान कब से बना राजनीतिक मुद्दा
याद करा दें कि साल 2012 में यूपी में मख्यमंत्री पद संभालने के कुछ महीनों के भीतर ही अखिलेश यादव ने अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए एक योजना शुरू की. इसी के तहत राज्य के कब्रिस्तानों की सुरक्षा और बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) बनवाने के लएि विशेष बजट दिए गए थे. इसके बाद से बीजेपी के तमाम नेता कब्रिस्तान के तमाम नेता बीजेपी पर हमलावर रहे हैं. 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फतेहपुर की रैली में कब्रिस्तान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद से यह लगभग हर चुनाव में सपा पर आक्रमण करने के लिए बीजेपी का सबसे बड़ा हथियार बन गया है.
बीजेपी की पिच पर खेल रहे हैं अखिलेश यादव
इसके लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगातार प्रयास में जुटे हैं. अखिलेश यादव हर रोज राम मंदिर चंदा चोरी को लेकर बीजेपी पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं. ऐसे वहीं बकरीद के मौके पर गौ हत्या को लेकर जब सीएम योगी और पश्चिम बंगाल में सीएम सुवेंदु अधिकारी ने सख्ती बरतने वाले फैसले लिए तो सपा ने इसे भी मुद्दा बना दिया. सपा गाय को राष्ट्रमाता बनाने के मुद्दे को हवा देने में जुटे हैं. इसके लिए वह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को आगे कर अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं.
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अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें
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