राजधानी में दो जुलाई को मानसून की दस्तक के बाद से रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी है। बुधवार को सुबह से घने बादल छाए रहे और शहर के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। हालांकि इस सुकून के बीच कई इलाकों में जलभराव, लंबे ट्रैफिक जाम ने लोगों को परेशान किया।
ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और यात्रियों को कई मार्गों पर घंटों जाम का सामना करना पड़ा। अन्य निचले इलाकों में जलभराव की समस्या देखने को मिली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 30.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अधिकतम सापेक्ष आर्द्रता 100 प्रतिशत और न्यूनतम 60 प्रतिशत रही।
सफदरजंग मौसम केंद्र में सुबह साढ़े आठ बजे तक बीते 24 घंटों में 24 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री तथा अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। इस दौरान अधिकांश क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश और आंधी दर्ज की गई।
जलभराव रोकने के दावों की पोल खोल दी : देवेंद्र
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने राजधानी में हुई भारी बारिश के बाद भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए जलभराव रोकने के दावों को विफल बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 445 जलभराव हॉटस्पॉट और 169 संवेदनशील स्थानों पर विशेष इंतजाम का दावा किया था लेकिन जखीरा, द्वारका, पुल प्रह्लादपुर समेत कई इलाकों में पानी भर गया।
एनजीटी ने बोरवेल सीलिंग की रिपोर्ट मांगी
एनजीटी ने भूजल के अवैध दोहन से जुड़े मामले में चार बोरवेल को सील करने की प्रक्रिया की रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की। यह मामला वरुण लूथरा बनाम केंद्रीय भूजल प्राधिकरण व अन्य से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने संबंधित विभागों की ओर से दाखिल जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया। पीठ ने शालीमार बाग के एसडीएम को निर्देश दिया कि वे चार बोरवेल को सील करने के लिए अब तक की गई कार्रवाई और पूरी प्रक्रिया की जानकारी प्रस्तुत करें।
इस बार नहीं डूबा मिंटो ब्रिज, 200 टीमें अलर्ट
हर मानसून में जलभराव की वजह से सुर्खियों में रहने वाला मिंटो ब्रिज अंडरपास इस बार अब तक पानी भरने से बचा हुआ है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का दावा है कि अतिरिक्त ड्रेन के निर्माण और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किए जाने का असर दिखाई देने लगा है। साथ ही विभाग ने पूरे शहर में जलभराव से निपटने के लिए 200 विशेष टीमें तैनात कर दी हैं, जो चौबीसों घंटे निगरानी रखेंगी।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, इस मानसून में अब तक वहां जलभराव की स्थिति नहीं बनी है और यातायात भी सामान्य बना हुआ है। पूरे शहर में जलभराव से निपटने के लिए प्रत्येक चिन्हित स्थान पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। 200 रखरखाव टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में जल निकासी, नालों के बेल-माउथ की सफाई और पानी की निकासी पर लगातार नजर रखेंगी।
अंडरपास के लिए अलग कार्ययोजना बनाई गई है। यदि किसी अंडरपास में पानी का स्तर छह से आठ इंच तक पहुंचता है तो मोबाइल पंप तत्काल चालू किए जाएंगे। इसके बाद भी यदि जलस्तर बढ़ता है और आठ इंच से अधिक हो जाता है तो नियंत्रण कक्ष यातायात पुलिस को सूचना देकर वहां वाहनों की आवाजाही रोकने का अनुरोध करेगा। साथ ही डीटीसी को बसों का मार्ग बदलने के लिए भी सूचित किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मानसून तैयारियों की समीक्षा कर सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ अलर्ट रहने के निर्देश दे चुकी हैं।
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