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राजधानी में हाई-रिस्क कैदियों की सुरक्षा और निगरानी का तरीका पूरी तरह बदलने की तैयारी है। नरेला में बनने वाली हाई-सिक्योरिटी जेल एक नई जेल नहीं होगी, बल्कि तकनीक आधारित कारागार प्रबंधन का ऐसा मॉडल होगी, जिसमें कैदियों की निगरानी, आवाजाही, पेशी और सुरक्षा से जुड़ी लगभग हर प्रक्रिया डिजिटल और स्वचालित प्रणाली के जरिये संचालित होगी। केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की सहायता देगी, जबकि शेष लागत दिल्ली सरकार वहन करेगी।


तिहाड़ जेल देश के सबसे बड़े जेल परिसरों में से एक है। यहां लंबे समय से क्षमता से दो गुना करीब 20 हजार कैदी रखे जा रहे हैं। इससे सुरक्षा प्रबंधन, निगरानी और पुनर्वास व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। आतंकवाद, संगठित अपराध के हाई-रिस्क कैदियों को अदालत में पेशी के लिए जेल से बाहर ले जाना भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना रहता है। 

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