सतना के किसान अंशुमान सिंह ने बताया कि खस की खेती बीज से नहीं बल्कि पुराने पौधों की जड़ों से निकाले गए कल्लों के जरिए की जाती है. इसकी रोपाई के लिए जुलाई सबसे उपयुक्त महीना माना जाता है क्योंकि मानसून की बारिश पौधों को तेजी से जमने में मदद करती है. अच्छी बारिश होने के बाद खेत में 2×1 फीट की दूरी पर लाइन बनाकर कल्ले लगाए जाते हैं. शुरुआत में हल्की सिंचाई और खरपतवार की सफाई करनी पड़ती है लेकिन पौधे जमने के बाद ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं रहती है.
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