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1970 और 1980 का दशक बॉलीवुड का एक जादुई दौर था, जिसने फिल्म इंडस्ट्री की परिभाषा ही बदल दी. यह वह समय था जब थिएटर के बाहर मीलों तक लाइनें लगी रहती थीं और जैसे ही कोई फिल्म स्टार स्क्रीन पर आता था, सिक्कों की बारिश होने लगती थी. लेकिन, राजेश खन्ना की रोमांटिक मुस्कान और अमिताभ बच्चन की दमदार आवाज वाले ‘एंग्री यंग मैन’ पर्सनैलिटी के पीछे, कुछ दूर की सोचने वाले लोग थे जिन्हें सिनेमा का असली आर्किटेक्ट माना जाता है. ऋषिकेश मुखर्जी, प्रकाश मेहरा, यश चोपड़ा, रमेश सिप्पी और शक्ति सामंत जैसे डायरेक्टर्स ने न सिर्फ बेहतरीन फिल्में बनाईं, बल्कि बॉलीवुड को 5 अनमोल सुपरस्टार भी दिए, जिसमें मुख्य रूप से राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना और ऋषि कपूर के नाम शामिल हैं, जिन्होंने दशकों तक दर्शकों पर राज किया.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में जब भी कामयाबी और स्टारडम की बात होती है, तो अक्सर सबसे पहले एक्टर्स का नाम दिमाग में आता है. लेकिन, असलियत यह है कि पत्थर को तराशकर मूर्ति बनाने का काम हमेशा कैमरे के पीछे से डायरेक्टर्स ने ही किया है. 1970 और 1980 के दशक की शुरुआत में जब देश में सामाजिक और आर्थिक बदलाव हो रहे थे, तो सिल्वर स्क्रीन पर एक नई क्रांति की जरूरत थी. उस जमाने के कुछ चुनिंदा डायरेक्टर्स ने इस जरूरत को पहचाना. उन्होंने न सिर्फ कहानियां बुनीं, बल्कि ऐसे कैरेक्टर स्ट्रक्चर भी बनाए जिन्होंने आम एक्टर्स को हमेशा आगे बढ़ने वाले सुपरस्टार्स में बदल दिया. तो आइए, उन 5 महान डायरेक्टर्स पर करीब से नजर डालते हैं जिन्होंने बॉलीवुड को उसके सदाबहार सुपरस्टार्स दिए.

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1. ऋषिकेश मुखर्जी: ऋषिकेश मुखर्जी बॉलीवुड में एक ऐसे डायरेक्टर के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्होंने इंसानी भावनाओं को बिना किसी दिखावे के बहुत सादगी से दिखाया. उन्होंने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन दोनों के करियर को इतनी ऊंचाइयों तक पहुंचाया कि वे अमर हो गए. 1971 की फिल्म ‘आनंद’ ने राजेश खन्ना के स्टारडम को एक नई गंभीरता दी. ‘जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं’ जैसे डायलॉग ने काका को घर-घर में मशहूर कर दिया. वहीं, अमिताभ बच्चन को उनके अंदर के गंभीर एक्टर को दुनिया के सामने लाया. इसके बाद ‘अभिमान’, ‘मिली’ और ‘चुपके चुपके’ जैसी फिल्मों के जरिए, उन्होंने अमिताभ बच्चन को एक सेंसिटिव और कॉमिक एक्टर के तौर पर स्थापित किया, जो उनकी एंग्री यंग मैन की इमेज से अलग था. उन्होंने धर्मेंद्र को भी ‘चुपके चुपके’ से ब्रेकथ्रू दिलाया, जिसे उनके करियर की सबसे अच्छी कॉमेडी माना जाता है.

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2. प्रकाश मेहरा: 1970 के दशक की शुरुआत में, जब लोग राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से ऊब चुके थे, देश के युवाओं में एस्टैब्लिशमेंट के खिलाफ गुस्सा पनप रहा था. डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने इस नब्ज को समझा. प्रकाश मेहरा ने ‘जंजीर’ में इंस्पेक्टर विजय के रोल के लिए अमिताभ बच्चन को चुना, जबकि उस समय अमिताभ की कई फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं. इस एक फिल्म ने बॉलीवुड को उसका सबसे बड़ा सुपरस्टार ‘एंग्री यंग मैन’ दिया. मेहरा-बच्चन की जोड़ी ने बाद में ‘हेरा फेरी’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’ और ‘शराबी’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं. प्रकाश मेहरा की फिल्मों ने विनोद खन्ना को एक दमदार एंटी-हीरो और बागी को-स्टार के तौर पर भी स्थापित किया, जिससे वह उस समय अमिताभ बच्चन को टक्कर देने वाले अकेले स्टार बन गए.

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3. यश चोपड़ा: यश चोपड़ा एक अनोखे डायरेक्टर थे, जो कोयला खदानों में काम करने वालों का दर्द और दूसरी तरफ स्विट्जरलैंड की घाटियों में शिफॉन साड़ी पहनी एक्ट्रेस के रोमांस को दिखा सकते थे. 1975 की ‘दीवार’ और उसके बाद आई ‘त्रिशूल’ में यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन के गुस्से को एक सामाजिक और पारिवारिक संदर्भ दिया. ‘दीवार’ का विजय आज भी सिनेमा के इतिहास के सबसे आइकॉनिक किरदारों में से एक माना जाता है. दूसरी ओर, यश चोपड़ा ही थे जिन्होंने ‘कभी कभी’ और बाद में ‘चांदनी’ जैसी फिल्मों से रोमांटिक जॉनर को जिंदा रखा. उन्होंने ऋषि कपूर की चॉकलेट बॉय इमेज का इतना फायदा उठाया कि वे 70 और 80 के दशक के सबसे पसंदीदा रोमांटिक स्टार बन गए.

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4. रमेश सिप्पी: जब हम रमेश सिप्पी के बारे में सोचते हैं, तो सबसे पहले ‘शोले’ (1975) का नाम आता है, जो बॉलीवुड की सबसे बड़ी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर में से एक बन गई. लेकिन, सिप्पी का योगदान सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं था. सिप्पी ने धर्मेंद्र को ‘सीता और गीता’ और ‘शोले’ से एक्शन-कॉमेडी की दुनिया में सबसे ऊपर पहुंचाया. जय और वीरू की जोड़ी ने धर्मेंद्र और अमिताभ दोनों के स्टारडम को अमर कर दिया. रमेश सिप्पी ने ‘शक्ति’ (1982) में अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया, जिससे यह साबित हुआ कि अमिताभ बच्चन सिर्फ एक कमर्शियल हीरो नहीं थे, बल्कि एक्टिंग के सच्चे मास्टर थे. उनकी सूझबूझ भरी नजर ने समय-समय पर विनोद खन्ना और ऋषि कपूर जैसे स्टार्स के करियर को भी रास्ता दिखाया.

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5. शक्ति सामंत: अगर 1970 के दशक की शुरुआत में ‘राजेश खन्ना’ का क्रेज पूरे देश में छाया था, तो इसका मुख्य कारण डायरेक्टर शक्ति सामंत थे. शक्ति सामंत ने राजेश खन्ना में वह चार्म पहचाना जिससे लड़कियां उनसे प्यार करने लगीं. ‘आराधना’ और ‘अमर प्रेम’ जैसी फिल्मों ने राजेश खन्ना को लगातार 17 गोल्डन जुबली और हिट फिल्में देने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने में मदद की, जो आज तक कायम है. सामंत जानते थे कि एक एक्टर को अमर बनाने के लिए बेहतरीन म्यूजिक कितना जरूरी है. उन्होंने आरडी बर्मन और किशोर कुमार के साथ मिलकर राजेश खन्ना के लिए जो गाने बनाए, उन्होंने खन्ना को बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार बना दिया.

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