Honey Trehan On Satluj Controversy: ‘सतलुज’ को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है. तीन साल तक सेंसर प्रक्रिया और कानूनी लड़ाई से गुजरने के बाद रिलीज हुई यह फिल्म भारत में महज दो दिन के भीतर ही ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दी गई. अब निर्देशक ने बताया कि आखिर फिल्म से किसे और क्यों आपत्ति थी.
नई दिल्ली. 3 साल तक फिल्म ‘सतलुज’ की सेंसर बोर्ड संग कानूनी और वैचारिक लड़ाई लड़ी. ‘सतलुज’ बड़े पर्दे पर तो रिलीज नहीं हो सकी. लेकिन छोटी पर्दे पर जगह नाम बदलने के बाद मिली. ‘पंजाब 95’ से ‘सतलुज’ बनी ये फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर बिना किसी कट के स्ट्रीम हुई. लेकिन महज 48 घंटे बाद इस पर्दे से भी फिल्म को हटा दिया गया. ये किसने किया और क्यों? इस पूरे घटनाक्रम और सेंसरशिप के विवाद पर अब फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने खुलकर अपनी बात रखी है.
फिल्म के लेखक और निर्देशक हनी त्रेहान ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि उन्हें इस बात का अफसोस जरूर है कि फिल्म सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच सकी. उन्होंने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि दर्शक अब इसे उसी रूप में देख पाएंगे, जैसा इसे बनाया गया था. उन्होंने साफ-साफ कहा कि फिल्म का टाइटल बदलने के अलावा फिल्म में किसी तरह का समझौता नहीं किया गया.
बातचीत में हनी त्रेहान ने कहा, ‘अगर कोई मुझसे पूछता है कि फिल्म से किसे दिक्कत थी? तो सच कहूं तो मुझे नहीं पता. मेरे सामने न कोई चेहरा है और न ही कोई नाम. हमारे पास जो भी बातें या आपत्तियां आईं, वे थर्ड पर्सन या वकीलों के जरिए आईं.’ हनी ने आगे बताया कि एक वक्त ऐसा आ गया था जब सेंसर बोर्ड की तरफ से बातचीत का कोई जरिया ही नहीं बचा था. सब कुछ रुक जाने के बाद जी5 आगे आया और इस अनकट रिलीज को मुमकिन बनाया.
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‘सतलुज’ का सेंसर बोर्ड से तीन साल से अधिक का लंबा संघर्ष रहा है. 2022 में ‘पंजाब 95’ नाम से CBFC को भेजी गई इस फिल्म पर पहले 27 कट लगाए गए. फिल्म टीम के बॉम्बे हाई कोर्ट जाने के बाद मामला रिवीजन कमिटी को भेजा गया, जिसने 120 से 127 कट की मांग कर दी. इन कट्स में मुख्य किरदार का नाम बदलने, भारतीय ध्वज वाले सीन हटाने और पंजाब पुलिस के संदर्भ हटाने जैसी मांगें शामिल थीं. निर्देशक ने इन कट्स को ठुकरा दिया क्योंकि इससे फिल्म की मूल भावना बदल जाती.
फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है. जसवंत सिंह खालड़ा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में कथित तौर पर 25,000 से ज्यादा अज्ञात अंतिम संस्कारों की जांच कर मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठाया था. फिल्म में उनका किरदार दिलजीत दोसांझ ने निभाया है. इसके अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं. फिलहाल यह फिल्म भारत में उपलब्ध नहीं है. लेकिन विदेशों में ZEE5 पर स्ट्रीम की जा रही है.
ZEE5 पर रिलीज होने के ठीक दो दिन बाद रविवार को जब इस फिल्म को अचानक हटा दिया गया तो प्लेटफॉर्म ने सिर्फ ‘हालिया घटनाक्रमों’ का हवाला दिया. वहीं, पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि फिल्म को ‘सुरक्षा चिंताओं’ के चलते हटाया गया है.
इस बड़े झटके के बावजूद निर्देशक हनी त्रेहान ने मन में कोई कड़वाहट न होने की बात कही. उन्होंने कहा, ‘मेरे मन में कोई कड़वाहट नहीं है. कभी-कभी इमोशनल रूप से बुरा जरूर लगता है क्योंकि आपको अपने सवालों के जवाब नहीं मिल रहे होते. लेकिन मैं खुद को समझाता हूं कि मैं सिर्फ एक फिल्म की बात कर रहा हूं, जबकि देश चलाने वाले लोगों के पास बहुत बड़ी जिम्मेदारियां होती हैं. कई बार उनकी भी कुछ मजबूरियां रही होंगी. मैं उन पदों पर बैठे लोगों और उनके फैसलों का सम्मान करता हूं.’
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