ms dhoni Birthday: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई महान खिलाड़ी आए और गए. लेकिन एक ऐसा नाम जिसने न सिर्फ मैच जीतने का तरीका बदला, बल्कि करोड़ों भारतीयों को यह सिखाया कि बड़े सपने कैसे देखे जाते हैं. और उन्हें कैसे पूरा किया जाता है. वह नाम है महेंद्र सिंह धोनी. आज धोनी अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं. झारखंड के एक छोटे से शहर रांची से निकलकms dhoni Birthday: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई महान खिलाड़ी आए और गए. लेकिन एक ऐसा नाम जिसने न सिर्फ मैच जीतने का तरीका बदला, बल्कि करोड़ों भारतीयों को यह सिखाया कि बड़े सपने कैसे देखे जाते हैं और उन्हें कैसे पूरा किया जाता है वह नाम है महेंद्र सिंह धोनी. आज धोनी अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं. झारखंड के एक छोटे से शहर रांची से निकलकर विश्व क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. विश्व क्रिकेट के सबसे सफल कप्तान बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.
एमएस धोनी (MS Dhoni) की कहानी इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि अगर आपके भीतर जुनून हो, तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती. क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने से पहले धोनी भारतीय रेलवे में एक टिकट कलेक्टर के रूप में काम करते थे. खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी करने वाले इस युवा के दिल में हमेशा क्रिकेट के लिए एक खास जगह थी. साल 2004 में जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि रेलवे की नौकरी छोड़कर आने वाला यह लंबा बालों वाला लड़का एक दिन देश का भाग्य बदल देगा. शुरुआत में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले धोनी ने बेहद कम समय में खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढाला और दुनिया के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बन गए.
क्रिकेट के इतिहास में कप्तानों की कोई कमी नहीं रही, लेकिन धोनी ने जो मुकाम हासिल किया, वह आज तक दुनिया का कोई भी कप्तान नहीं छू सका. महेंद्र सिंह धोनी विश्व क्रिकेट के इकलौते ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने अपनी कप्तानी में आईसीसी के तीनों बड़े सीमित ओवरों के खिताब भारत की झोली में डाले. उन्होंने साल 2007 में युवा टीम के साथ पहला आईसीसी टी20 विश्व कप जीता, फिर साल 2011 में करोड़ों देशवासियों का सपना पूरा करते हुए वनडे विश्व कप का खिताब भारत को दिलाया, और साल 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर लिया.
मैदान पर धोनी की सबसे बड़ी ताकत उनका शांत स्वभाव था, जिसके कारण उन्हें ‘कैप्टन कूल’ का खिताब मिला. मैच चाहे कितना भी फंसा हो या आखिरी ओवर में जीत के लिए कितने भी रन चाहिए हों, धोनी के चेहरे पर कभी शिकन नहीं दिखती थी. दबाव के पलों में सटीक फैसले लेना, गेंदबाजों को सही सलाह देना और खेल को आखिरी गेंद तक ले जाकर अपनी सूझबूझ से जीतना उनकी आदत बन चुकी थी. मुश्किल हालात में भी टीम को बिखरने से बचाना और शांत रहकर मैच का रुख पलट देना ही उन्हें दुनिया के अन्य कप्तानों से अलग और महान बनाता है.
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धोनी को सिर्फ एक बेहतरीन कप्तान के रूप में ही नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास के सबसे खतरनाक और सर्वश्रेष्ठ ‘फिनिशर’ के रूप में भी याद किया जाता है. जब भी भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ाती, तब धोनी क्रीज पर आकर मोर्चा संभालते थे। वह मैच को अंत तक ले जाते थे क्योंकि उन्हें खुद पर और अपनी रणनीति पर पूरा भरोसा था. विरोधी टीमें जानती थीं कि जब तक धोनी क्रीज पर मौजूद हैं, तब तक मैच खत्म नहीं हुआ है. आखिरी पलों में छक्का मारकर मैच जिताने की उनकी शैली आज भी हर क्रिकेट प्रेमी के जहन में ताजा है.
सीमित ओवरों के अलावा टेस्ट क्रिकेट में भी धोनी का नेतृत्व बेमिसाल रहा. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने दिसंबर 2009 में पहली बार टेस्ट क्रिकेट में नंबर-1 रैंकिंग हासिल की थी. यह भारतीय क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, क्योंकि इसके बाद टीम इंडिया लंबे समय तक दुनिया की शीर्ष टेस्ट टीम बनी रही. धोनी ने भारत के लिए कुल 60 टेस्ट मैचों में कप्तानी का जिम्मा संभाला, जिनमें से उन्होंने टीम को 27 शानदार मुकाबलों में जीत दिलाई, जो यह साबित करता है कि वे खेल के हर प्रारूप को गहराई से समझते थे.
जब 2007 में धोनी को भारतीय टी20 टीम की कमान सौंपी गई थी, तब टीम में कई युवा खिलाड़ी शामिल थे. धोनी ने उन युवाओं में वो विश्वास जगाया जिसने भारत को पहला टी20 विश्व चैंपियन बना दिया. उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत के लिए कुल 72 मैचों में कप्तानी की, जिसमें से टीम ने उनके नेतृत्व में 41 मैचों में जीत का परचम लहराया. धोनी का युवाओं पर भरोसा करना और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाना भारतीय क्रिकेट के एक नए युग की शुरुआत थी.
यदि धोनी के व्यक्तिगत प्रदर्शन और आंकड़ों की बात की जाए, तो एक बल्लेबाज के रूप में भी उनका योगदान अतुल्नीय है. उन्होंने भारत के लिए 90 टेस्ट मैच खेले, जिनमें शानदार बल्लेबाजी करते हुए 4,876 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से 6 बेहतरीन शतक और 33 अर्धशतक निकले. वहीं, फटाफट क्रिकेट यानी 98 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने देश के लिए 1,617 रन जोड़े. मध्यक्रम में बल्लेबाजी करने के बावजूद इतने रन बनाना उनकी निरंतरता और काबिलियत को दर्शाता है.
एक विकेटकीपर के रूप में धोनी ने विकेट के पीछे की परिभाषा ही बदल दी. उनकी बिजली जैसी तेज स्टंपिंग और गजब के रिफ्लेक्स के सामने दुनिया का बड़े से बड़ा बल्लेबाज भी क्रीज छोड़ने से डरता था. धोनी की मैच को पढ़ने की क्षमता और डीआरएस (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) लेने में उनकी सटीकता इतनी गजब थी कि फैंस इसे मजाक में ‘धोनी रिव्यू सिस्टम’ कहने लगे थे. वनडे क्रिकेट इतिहास में वह भारत के सबसे सफल विकेटकीपर बल्लेबाज माने जाते हैं, जिन्होंने विकेट के पीछे और आगे रहकर टीम को अनगिनत बार संकट से निकाला.
साल 2020 की 15 अगस्त की शाम भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए बेहद भावुक करने वाली थी. हमेशा की तरह बिना किसी शोर-शराबे और तामझाम के, धोनी ने सोशल मीडिया पर एक साधारण पोस्ट के जरिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी. उनके इस अचानक लिए गए फैसले ने करोड़ों फैंस की आंखें नम कर दीं. भले ही उन्होंने नीली जर्सी को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया, लेकिन उनकी उपलब्धियां, उनकी सीख और उनके द्वारा जिताए गए मैच आज भी भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास का सबसे खूबसूरत हिस्सा हैं.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद भी धोनी का जादू क्रिकेट के मैदान पर कम नहीं हुआ. आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए वह सिर्फ एक कप्तान नहीं, बल्कि ‘थाला’ बन गए. उनकी कप्तानी में सीएसके ने साल 2010, 2011, 2018, 2021 और 2023 में कुल पांच बार आईपीएल की चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम की. इसके अलावा उन्होंने टीम को 2010 और 2014 में चैंपियंस लीग टी20 का खिताब भी दिलाया. आईपीएल में 278 से अधिक मैच खेलते हुए धोनी ने 5,400 से ज्यादा रन बनाए हैं और विकेट के पीछे 150 से अधिक कैच लपके हैं. 45 वर्ष की उम्र में भी मैदान पर उनकी रणनीतियां, कप्तानी और हेलीकॉप्टर शॉट देखने के लिए पूरा स्टेडियम पीली जर्सी में रंग जाता है, जो यह बताने के लिए काफी है कि धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक इमोशन हैं.
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