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जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई दो किताबों को लेकर UAPA के तहत FIR दर्ज गई है। इन किताबों में मुंबई हमलों के मास्टर माइंड आतंकी हाफिज सईद और अलगाववादी नेता मकबूल भट को महान हस्तियां बताया गया है। पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने शनिवार FIR दर्ज करके छापेमारी शुरू कर दी है। विवादित किताबों में से एक हिलाल अहमद और संतोष मीना की ‘पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स ऑफ JK’ है। इसे जम्मू की ओबेरॉय बुक सर्विस ने प्रकाशित किया है। दूसरी किताब सुशांत गिरी की ‘ग्रेट पर्सनैलिटी ऑफ जम्मू-कश्मीर’ है। इसे दिल्ली के अनुराग प्रकाशन ने पब्लिश किया है। अधिकारियों के मुताबिक, एक किताब की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में भेजी गई थीं, जबकि दूसरी किताब की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में बांटी गई थीं। भाजपा ने इसे एकेडमिक जिहाद बताते हुए किताबों पर बैन और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। BJP ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की। किताब के पन्नों का वह हिस्सा जिसमें अलगाववादियों के बारे में लिखा है… विवाद की वजह… पूर्व डीजीपी बोले- ये बातें पाकिस्तान के एजेंडे को बढ़ावा देती हैं जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि मसरत आलम, सैयद अली शाह गिलानी और शब्बीर शाह जैसे लोग पाकिस्तान की ISI और वहां की सरकार का एजेंडा आगे बढ़ाते थे। उन्होंने कहा, अगर इन्हें महान नेता की तरह पेश किया जाएगा, तो नई पीढ़ी को यही संदेश मिलेगा कि बड़ा बनने के लिए इन्हीं जैसा बनना चाहिए। किताब में मीरवाइज उमर फारूक को कश्मीर की आखिरी उम्मीद बताया गया है। क्या सच में जम्मू-कश्मीर के लोग ऐसा मानते हैं? इस तरह की बातें पाकिस्तान के एजेंडे को बढ़ावा देती हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश देकर वापस मंगाई किताबें राज्य के 1832 सरकारी स्कूलों और 394 पीएम श्री स्कूलों के लिए ‘समग्र शिक्षा’ लाइब्रेरी ग्रांट के तहत उम्र के हिसाब से सही किताबें खरीदने का आदेश जारी हुआ था। लाइब्रेरी की किताबें चुनने के लिए जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजनों के एक्सपर्ट्स और एकेडेमिक्स की चार सब-कमेटी बनाई गई थीं। इन कमेटियों ने 364 पब्लिशर्स से जमा की गई 463 किताबों को चुना। विवाद बढ़ने पर विभाग ने किताबें वापस लेने का आदेश जारी किया। इसमें कहा गया, “विभाग के ध्यान में आया है कि इन किताबों में बहुत ही आपत्तिजनक कंटेंट है। यह साफ है कि सब-कमेटी सीरीज 4 के सदस्यों और सुपरवाइजरी अधिकारियों ने ऐसी किताबों की सिफारिश करने में गंभीर लापरवाही बरती, अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई और रूजरी सावधानी नहीं रखी। लेखकों और पब्लिशर्स को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बैन और ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। इसमें यह भी निर्देश दिया गया कि उनकी लिखी या पब्लिश किए गए सभी प्रिंटेड मटेरियल को केंद्र शासित प्रदेश से वापस ले लिया जाए। मामले की जांच के लिए 2 अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। इसकी रिपोर्ट 30 दिन के अंदर सक्षम अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। 8 अधिकारी सस्पेंड किए गए विवाद बढ़ने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को दोनों किताबों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी एक्शन लेते हुए राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। एक संविदा कर्मचारी की सेवा भी समाप्त की गई और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। सस्पेंड अधिकारियों के नाम पब्लिशर के दफ्तर पर छापा, UAPA समेत कई धाराओं में केस पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 49 (उकसावा), 61(2) (आपराधिक साजिश), 152 (देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालना), 196 (वैमनस्य फैलाना) और 353 (झूठे बयान या अफवाहें प्रकाशित करना) के अलावा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13 के तहत मामला दर्ज किया है। FIR दर्ज होने के बाद काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने जम्मू के बहु प्लाजा में एक पब्लिशर के दफतर पर छापा मारा। जांच के दौरान पुलिस ने कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए हैं। फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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