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अकाश शर्मा

General Upendra Dwivedi Interview: भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में देश की सुरक्षा, भविष्य के युद्ध, चीन से लगी सीमा, ड्रोन तकनीक और अग्निपथ योजना जैसे अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को यह दिखा दिया कि भारत जरूरत पड़ने पर सटीक, संतुलित और निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने में सक्षम है. साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय के युद्ध पहले से बिल्कुल अलग होंगे, जहां जीत केवल सैनिकों की संख्या से नहीं बल्कि तकनीक, सटीक खुफिया जानकारी और तेज फैसलों से तय होगी.

हमारे सहयोगी न्यूज चैनल CNN-News18 को दिए विशेष इंटरव्यू में जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की इच्छाशक्ति, सैन्य क्षमता और संयम का सबसे बड़ा उदाहरण है. उन्होंने बताया कि यह आतंकवाद के खिलाफ बेहद सोच-समझकर की गई सैन्य कार्रवाई थी, जिसमें भारतीय सेना ने केवल 88 घंटे के भीतर अपने सभी प्रमुख सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए. उन्होंने कहा कि दुनिया के कई युद्ध महीनों या वर्षों तक चलते हैं, लेकिन भारत ने बेहद कम समय में अपने मकसद पूरे कर यह साबित कर दिया कि अगर खुफिया जानकारी सटीक हो, सेना के तीनों अंगों के बीच बेहतर तालमेल हो और राजनीतिक नेतृत्व का स्पष्ट समर्थन मिले तो कम समय में भी बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं.

भविष्य की जंग पूरी तरह बदल चुकी है

सेना प्रमुख के मुताबिक अब युद्ध सिर्फ बंदूक, टैंक या तोपों से नहीं जीते जाएंगे. उन्होंने कहा कि आने वाले समय के युद्ध तकनीक आधारित होंगे, जहां ड्रोन, सैटेलाइट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सिक्योर संचार नेटवर्क, रियल टाइम इंटेलिजेंस और सटीक हथियार सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे. इसके अलावा सोशल मीडिया और इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर भी हर सैन्य अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना भी इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए खुद को लगातार आधुनिक बना रही है.

भारतीय सेना तेजी से बदल रही है

जनरल द्विवेदी ने बताया कि सेना का आधुनिकीकरण अब केवल नए हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है. इसके तहत सेना की संरचना, प्रशिक्षण, सैन्य सिद्धांत, तकनीकी व्यवस्था और मानव संसाधन प्रणाली में भी बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सेना को ज्यादा चुस्त, तकनीक आधारित और तेज प्रतिक्रिया देने वाली फोर्स बनाया जा रहा है. इसी सोच के तहत रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अशनि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरियों जैसी नई सैन्य इकाइयों का गठन किया जा रहा है. इनका उद्देश्य युद्ध के मैदान में तेजी से निर्णय लेना और दुश्मन पर सटीक हमला करना है.

ड्रोन होंगे भविष्य की सबसे बड़ी ताकत

सेना प्रमुख ने कहा कि ड्रोन अब केवल निगरानी का साधन नहीं रह गए हैं. आज उनका इस्तेमाल दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, लक्ष्य की पहचान करने, सटीक हमला करने, सैन्य सामग्री पहुंचाने और नुकसान का आकलन करने जैसे कई कामों में किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना सिर्फ ड्रोन की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पूरा ड्रोन इकोसिस्टम तैयार करने पर काम कर रही है. इसमें स्वदेशी ड्रोन निर्माण, प्रशिक्षित जवान, रखरखाव व्यवस्था, प्रशिक्षण केंद्र, संचालन के स्पष्ट नियम और सैन्य योजनाओं में ड्रोन का बेहतर इस्तेमाल शामिल है.

बाज बटालियन क्या करेगी?

जनरल द्विवेदी ने बताया कि सेना में बाज बटालियन बनाई जा रही हैं. इनका मुख्य काम रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) यानी बिना पायलट वाले विमानों का संचालन करना होगा. इन बटालियनों में विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक होंगे, जो लगातार हवाई निगरानी करेंगे, दुश्मन की गतिविधियों की जानकारी जुटाएंगे और कमांडरों तक तुरंत सूचना पहुंचाएंगे. इससे सेना की निगरानी क्षमता और निर्णय लेने की गति दोनों बढ़ेंगी.

ड्रोन से खतरे का जवाब भी तैयार

सेना प्रमुख ने माना कि आज ड्रोन सबसे बड़े सुरक्षा खतरों में शामिल हो चुके हैं. इनका इस्तेमाल केवल निगरानी ही नहीं बल्कि हथियार गिराने, जासूसी करने और सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए भी किया जा रहा है. इसी खतरे से निपटने के लिए भारतीय सेना आधुनिक काउंटर-ड्रोन सिस्टम विकसित कर रही है. इसके तहत रडार, सेंसर, कैमरे, जैमर, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही निष्क्रिय करने वाली तकनीकों को तेजी से शामिल किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि देश के कई सैन्य ठिकानों पर विशेष ड्रोन और काउंटर-ड्रोन हब भी बनाए गए हैं, जहां प्रशिक्षण और नई तकनीकों का परीक्षण किया जा रहा है.

अग्निपथ योजना पर क्या बोले?

अग्निपथ योजना को लेकर जनरल द्विवेदी ने कहा कि इसका उद्देश्य सेना को अधिक युवा, ऊर्जावान और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है. उन्होंने बताया कि अब तक अग्निवीरों का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है. वे सैन्य प्रशिक्षण के साथ-साथ ड्रोन, आधुनिक संचार उपकरण और नई तकनीकों को तेजी से सीख रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि योजना अभी शुरुआती चरण में है. पहला बैच अभी अपनी पूरी सेवा अवधि पूरी नहीं कर पाया है, इसलिए अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. भविष्य में जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किए जा सकते हैं.

LAC पर हालात स्थिर, लेकिन सतर्कता जरूरी

चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की स्थिति पर सेना प्रमुख ने कहा कि फिलहाल हालात स्थिर जरूर हैं, लेकिन संवेदनशील भी हैं. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच हाल के समझौतों से तनाव कुछ कम हुआ है. सीमा पर किसी भी स्थानीय विवाद को सैन्य अधिकारियों की बैठक, हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और कमांडर स्तर की बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाती है. उन्होंने बताया कि भारत और चीन के सैनिकों के बीच हर साल एक हजार से अधिक स्थानीय स्तर की बातचीत होती है, जिससे गलतफहमियां कम करने और सीमा पर शांति बनाए रखने में मदद मिलती है.

सेना की प्राथमिकताएं क्या हैं?

जनरल द्विवेदी ने कहा कि उत्तरी सीमाओं पर भारतीय सेना की तीन सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं-

  • LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना.
  • बातचीत के जरिए स्थानीय विवादों का समाधान करना.
  • किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मजबूत और भरोसेमंद सैन्य तैनाती बनाए रखना.

अपने कार्यकाल के अंत में जनरल उपेंद्र द्विवेदी का यह संदेश साफ है कि भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध की सोच से आगे बढ़ चुकी है. आने वाले समय में तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, ड्रोन क्षमता, बेहतर खुफिया तंत्र और तेज फैसले ही किसी भी युद्ध का परिणाम तय करेंगे. वहीं ऑपरेशन सिंदूर को उन्होंने इसी नए भारत की सैन्य सोच और क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया, जिसने कम समय में सटीक कार्रवाई कर यह संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर स्तर पर पूरी तरह तैयार है.

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