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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर विवाद के बीच केरल के सबरीमाला मंदिर से भगवान की मूर्तियों पर चढ़े सोने के कथित गायब होने का मामला चर्चा में है. आरोप है कि गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर मूर्तियों को चेन्नई ले जाया गया और वापस आने पर उन पर पहले से चढ़े सोने का हिस्सा गायब मिला. मामले में केरल हाईकोर्ट ने दो वामपंथी नेताओं और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अधिकारियों समेत कई लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है.
अयोध्या में दान विवाद, केरल में भगवान के गहने गायब! सबरीमाला के ‘सोना कांड’ अयोध्या में दान विवाद, केरल में भगवान के गहने गायब! सबरीमाला के ‘सोना कांड’ में हाईकोर्ट का बड़ा आदेशमें हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
Ayodhya Ram Mandir Daan Chori: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा छाया हुआ है. लखनऊ से अयोध्या तक हलचल है. रामभक्तों का खून खौल रहा है. दान चोरी से सबके अंदर गुस्सा है. राम मंदिर में दान गबन को लेकर माहौल गरम है. इसी बीच अब अयोध्या से 2000 किलोमीटर दूर भगवान की मूर्ति से सोने का गहना ही गायब हो गया है. जी हां, केरल के सबरीमाला मंदिर से भगवान के गहने चोरी होने का मामला लोगों को हैरान कर रहा है. इधर अयोध्या में तो राम मंदिर में चढ़ावा चोरी हुआ. यहां तो भगवान की मूर्तियों पर से सोना के कहना ही उतार लिया गया.
भगवान की मूर्ति से सोना गायब होने का मामला अब अदालत में है. सोना गायब होने के मामले की जांच जारी है. अब केरल हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. आदेश के मुताबिक, दो वामपंथी नेताओं और टीडीबी यानी त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के पूर्व अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज होगा. जी हां, केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को सबरीमाला मंदिर से कथित तौर पर सोना चोरी होने की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को निर्देश दिया कि वह एलडीएफ यानी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के दो नेताओं और सीनियर अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करे. ये अधिकारी 2023 से 2025 के बीच मंदिर का प्रबंधन करने वाले त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के प्रमुख पदों पर थे.
क्या है सबरीमाला मंदिर में सोना कांड
सबसे पहले इस मामले को समझते हैं. एसआईटी ने पिछले साल दो अन्य मामले दर्ज किए थे. इनमें सीपीआई एम नेता और पूर्व विधायक ए. पद्मकुमार को गिरफ्तार किया गया था. ये मामले उस चोरी से संबंधित थे, जो कथित तौर पर 2019 में राज्य में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली पहली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई थी. नया मामला 2023 में एलडीएफ सरकार के लगातार दूसरे कार्यकाल के दौरान मूर्तियों को चेन्नई ले जाने से जुड़े आरोपों से संबंधित है.
गोल्ड प्लेटिंग के बहाने चेन्नई ले जाई गईं मूर्तियां
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक की मूर्तियों पर 1998 में सोने की परत चढ़ाई गई थी. साल 2019 में इन्हें दोबारा गोल्ड प्लेटिंग कराने के बहाने चेन्नई भेजा गया. आरोप है कि जब मूर्तियां वापस लौटीं तो उन पर पहले से चढ़े सोने का कुछ हिस्सा गायब था. इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि 2023 में फिर से इन्हीं मूर्तियों को गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर चेन्नई ले जाने की योजना बनाई गई. अदालत का मानना है कि ऐसा पहले हुई कथित सोने की चोरी पर पर्दा डालने के लिए किया गया.
हाईकोर्ट ने दर्ज कराया केस
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश, भरोसा तोड़ने और फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं. इसके बाद कोर्ट ने कई आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. चीज़ों को दोबारा गोल्ड प्लेटिंग के लिए भेजने के फैसले के पीछे की कथित साजिश का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा, ‘इसका मकसद पहले की गड़बड़ियों को छिपाना था और इससे देवस्वोम को और नुकसान होगा’. जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में एक सोनार यानी जौहरी और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
दरअसल, अयोध्या में विवाद राम मंदिर के चढ़ावे और उसकी पारदर्शिता को लेकर उठा है. वहीं, सबरीमाला का मामला भगवान की मूर्तियों पर चढ़े सोने के कथित गायब होने से जुड़ा है. दोनों मामलों की प्रकृति अलग है, लेकिन दोनों ने मंदिरों में चढ़ावे और बहुमूल्य आभूषणों की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब केरल हाई कोर्ट के लेटेस्ट आदेश के बाद अब इस मामले की आपराधिक जांच आगे बढ़ेगी. इसके बाद यह साफ होगा कि मूर्तियों से सोना गायब किसने किया और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है?
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