Coding for School Students: बच्चों को किस उम्र से और कैसे कोडिंग सिखानी चाहिए? क्या स्कूलों की पढ़ाई इसके लिए काफी है? जानिए बच्चों को टेक-स्मार्ट बनाने का सबसे आसान और सही तरीका. इससे खेल-खेल में उनका दिमाग कंप्यूटर से भी तेज चलने लगेगा.
Coding for Kids: बच्चों को खेल-खेल में कोडिंग सिखाई जा सकती है
कोडिंग सीखने की सही उम्र क्या है?
बच्चों को कोडिंग सिखाने की कोई तय उम्र नहीं होती. 6 से 7 साल की उम्र (पहली या दूसरी क्लास) से इसकी बेसिक शुरुआत की जा सकती है. इस उम्र में बच्चों का दिमाग नई चीजें बहुत तेजी से सीखता है. शुरुआत में उन्हें कोडिंग की थ्योरी नहीं, बल्कि विजुअल गेम्स के जरिए कोडिंग के पीछे का लॉजिक समझाया जाता है. जब बच्चा 11-12 साल का हो जाए, तब वह पायथन (Python) जैसी टेक्स्ट-बेस्ड कोडिंग या जावास्क्रिप्ट सीख सकता है.
कोडिंग की शुरुआत कैसे करें?
छोटे बच्चों को सीधे ब्लैक स्क्रीन पर कोडिंग सिखाएंगे तो वे भाग खड़े होंगे. शुरुआत हमेशा ‘ब्लॉक-बेस्ड कोडिंग’ (Block-based coding) से करनी चाहिए. इसके लिए Scratch और Blockly जैसे मुफ्त टूल्स बहुत पॉपुलर हैं. इसमें बच्चों को अलग-अलग ब्लॉक्स को पहेली की तरह जोड़कर अपनी कहानी या छोटा सा गेम बनाना होता है. इसके अलावा Minecraft और Roblox जैसे गेम्स भी बच्चों को खेल-खेल में कोडिंग के कॉन्सेप्ट सिखा देते हैं.
क्या स्कूलों में कोडिंग सिखाई जाती है?
स्कूल एजुकेशन में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के आने के बाद से देश के शिक्षा सिस्टम में बड़ा बदलाव आया है. अब कई टॉप और टेक-सैवी स्कूलों में कक्षा 6 से ही कोडिंग और एआई (AI) को सिलेबस का हिस्सा बना दिया गया है. सीबीएसई (CBSE) और अन्य एजुकेशन बोर्ड्स भी इसके लिए छोटे-छोटे कोर्सेस चला रहे हैं. हालांकि, हर स्कूल में अभी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसलिए पेरेंट्स चाहें तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की मदद भी ले रहे हैं.
कोडिंग सीखने के क्या फायदे हैं?
कोडिंग सीखने से बच्चा सिर्फ सॉफ्टवेयर बनाना नहीं सीखता, बल्कि उसका सोचने का तरीका भी बदल जाता है. वह किसी भी बड़ी समस्या को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर हल करना सीखता है, जिसे ‘कम्प्यूटेशनल थिंकिंग’ कहते हैं. इससे बच्चों का मैथ्स और साइंस का डर भी दूर होता है. सबसे बड़ी बात, यह बच्चों को सिर्फ स्क्रीन पर रील्स देखने वाला ‘कंज्यूमर’ नहीं, बल्कि कुछ नया बनाने वाला ‘क्रिएटर’ बनाती है.
काम की सलाह: बच्चे पर न बनाएं दबाव
सबसे जरूरी बात है कि कोडिंग को बच्चों पर एक और विषय की तरह न थोपें. भेड़चाल का हिस्सा बनकर लाखों रुपये के महंगे ऑनलाइन कोर्स के जाल में फंसने की जरूरत बिल्कुल नहीं है. इंटरनेट पर यूट्यूब और स्क्रैच जैसी वेबसाइट्स पर फ्री में बेहतरीन कंटेंट मौजूद है. अगर बच्चे का इंटरेस्ट कंप्यूटर में दिख रहा है, तभी उसे आगे बढ़ाएं, वरना उसे उसकी पसंद की फील्ड चुनने की आजादी दें.
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